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ऋषभ पंत : टेस्ट का धुरंधर, टी20 में फ़ेल

बाहर और धीमी गेंद फेंक गेंदबाज़ उनके ख़िलाफ़ छोटे फ़ॉर्मेट में सफल हो रहे हैं

सितंबर 2019 के बाद से ऋषभ पंत की 78 पारियों में से सिर्फ 20 पारियां 150 से अधिक के स्ट्राइक रेट से आई हैं  •  Peter Della Penna

सितंबर 2019 के बाद से ऋषभ पंत की 78 पारियों में से सिर्फ 20 पारियां 150 से अधिक के स्ट्राइक रेट से आई हैं  •  Peter Della Penna

पिछले कुछ वर्षों में ऋषभ पंत के करियर को नज़दीक से देखने वाले बहुत कम लोगों को ही उनकी टी20 बल्लेबाज़ी पर संदेह होगा। अच्छी गेंदों को भी बाउंड्री के बाहर भेजने की उनकी क्षमता पर विशेषज्ञों को आश्चर्य होता है और वे लंबे समय से कहते आए हैं कि वह अपना दिन होने पर विपक्षी टीम को तहस-नहस कर सकते हैं।
उनके द्वारा अक्सर खेले जाने वाले अजीबोग़रीब शॉट्स, जैसे- गिरते-गिरते रैंप और पुल खेलना, एक हाथ से कवर के ऊपर से बाउंड्री मारना, प्रशंसकों को उत्साहित करती है। ये सभी शॉट टी20 क्रिकेट की ही देन हैं।
फिर भी अपने टी20 करियर की शानदार शुरुआत के बाद वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। सितंबर 2019 के बाद से उन्होंने 78 टी20 पारियों में 29 की औसत और 127.39 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाज़ी की है, वहीं टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में तो उनका औसत गिरकर 24.48 पर आ जाता है, जबकि उनका स्ट्राइक रेट भी बेहतर नहीं है।
कम से कम 1000 गेंदों का सामना करने वालों में पंत का टी20 स्ट्राइक रेट 19वां सबसे कम है। 90 बल्लेबाज़ ऐसे हैं जिन्होंने इस दौरान पंत से तेज़ रन बटोरे हैं।
इसी अवधि में कम से कम 50 टी20 पारियां खेलने वालों में 42 बल्लेबाज़ ऐसे हैं, जिनका औसत कम से कम 30 है जबकि 130 या इससे बेहतर की स्ट्राइक रेट है। भारत की टी20 टीम के आसपास रह रहे संजू सैमसन और इशान किशन भी इन बल्लेबाज़ों में शामिल है। जबकि दिनेश कार्तिक का औसत 28.80 और स्ट्राइक रेट 141.7 का है।
यदि पंत ने अपनी प्रतिभा की झलक दिखाई है, तो हाल के वर्षों में बहुत कम ही ऐसी पारियां रही हैं। सितंबर 2019 से पंत की 78 पारियों में से सिर्फ़ 20 ही ऐसी पारियां रही हैं जो 150 से अधिक के स्ट्राइक रेट से आई हैं। लेकिन उनमें से 15 पारियां 20 से कम गेंदों की हैं। इनमें से प्रत्येक पारी में पंत नंबर 5 या इससे पहले बल्लेबाज़ी करने आए हैं।
इस बात से आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि पंत ने पिछले तीन सालों में खेले 85 टी20 मैचों में सिर्फ़ एक प्लेयर ऑफ़ द मैच का पुरस्कार जीता है। केवल दो अन्य खिलाड़ियों ने इतने पुरस्कार जीते हैं, जिन्होंने पंत से अधिक मैच खेले हैं। टिम साइफ़र्ट और इमाद वसीम ने क्रमश: 90 और 101 मैच खेलकर एक-एक प्लेयर ऑफ़ द मैच पुरस्कार जीता है।
ऐसा नहीं है कि पंत जब भी क्रीज़ पर जमे हैं, वह अपना स्ट्राइक रेट सुधारने में क़ामयाब रहे हैं। उन्होंने 20 या अधिक गेंदों की 35 पारियां खेली हैं और उनमें से केवल पांच ही 150 से अधिक के स्ट्राइक रेट से आई हैं। यह उन 35 पारियों का सिर्फ़ 14.3 फ़ीसदी है। सितंबर 2019 से अब तक टी20 में 118 बल्लेबाज़ों ने 20 से अधिक गेंदों की 20 या उससे अधिक पारियां खेली हैं; उनमें से सिर्फ़ पांच बल्लबाज़ों की 150 से अधिक की स्ट्राइक रेट वाली पारियों का प्रतिशत कम रहा है
दरअसल पंत का स्ट्राइक रेट 35 पारियों में जिसमें उन्होंने 20 या उससे अधिक गेंदों पर सिर्फ़ 123.50 के स्ट्राइकरेट से रन बनाए हैं, उन 118 बल्लेबाज़ों में चौथा सबसे कम है।
जेम्स एंडरसन जैसे गेंदबाज़ के सामने रैंप और नेथन लायन के ख़िलाफ़ आड़े बल्ले से प्रहार को पंत ने मुकम्मल क्रिकेट शॉट्स के ज़रिए अपने टेस्ट रनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। पिछले तीन सालों में उनके द्वारा बनाए गए 2123 टेस्ट रनों में से 83.1 फ़ीसदी रन पारंपरिक शॉट खेलकर बनाए गए हैं। इन शॉट्स पर उन्होंने 119.2 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं।
टेस्ट में पंत को इन शॉट्स से पूरा फ़ायदा मिला है क्योंकि फ़ील्ड खुली रहती है जिसका उन्होंने फ़ायदा उठाया है। निश्चित रूप से उन्होंने टेस्ट में भी आड़े बल्ले से स्लॉग किया है या तेज़ गेंदबाज़ी को रैंप शॉट खेला है, लेकिन ये उनकी लाइन और लेंथ के साथ खिलवाड़ करने के लिए कैलकुलेटेड हमले हैं। ये हताश होकर खेले गए शॉट्स नहीं हैं।
हालांकि टी20 में गेंदबाज़ों और मैच की स्थितियों ने उन्हें इन नई चीज़ों को आज़माने के लिए मजबूर किया है। और इसके पीछे का कारण शायद यह है कि पारंपरिक शॉट्स ने उन्हें टी20 फ़ॉर्मेट में उतनी तेज़ी से रन नहीं दिलाए हैं। जबकि टेस्ट में उनके पास या तो घेरे के ऊपर से खेलने का विकल्प होता है या खुली फ़ील्ड में गैप के ज़रिए रन बटोरने का विकल्प होता है, लेकिन टी20 में उनको वह लग्ज़री नहीं मिलती है।
सितंबर 2019 से टी20 में पारंपरिक शॉट्स खेलते हुए पंत का स्ट्राइक रेट 129.8 का है। कम से कम 1000 रन बनाने वाले 54 बल्लेबाज़ों में, जिनका ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के पास गेंद दर गेंद आंकड़ा है, पंत का स्ट्राइक रेट इन शॉट्स को खेलते हुए चौथा सबसे कम है। इन शॉट्स से इन 54 बल्लेबाज़ों का औसत स्ट्राइक रेट 140 का है। जबकि वे प्रति बाउंड्री के लिए औसत 5.8 गेंद लेते हैं और पंत 6.7 गेंद लेते हैं। पारंपरिक शॉट्स के साथ पंत का स्कोरिंग रेट टेस्ट में बढ़िया है, यह टी 20 में नीचे जा रही है।
हालांकि पंत के साथ हमेशा ऐसा नहीं था। सितंबर 2017 से अगस्त 2019 तक दो साल की अवधि में जब उन्होंने टी20 में अच्छा प्रदर्शन किया तो उनकी औसत 38.37 थी और इस फ़ॉर्मेट में उनका स्ट्राइक रेट 166 का था। उस दौरान उन्हीं शॉट्स ने उन्हें 159.6 के स्ट्राइक रेट से रन दिलाए थे।
लेकिन समय के साथ गेंदबाज़ों ने उन्हें चुप रखने के तरीक़े निकाले; इन दिनों पंत को बाहर गेंद करना या गति को कम करना या दोनों करना एक लोकप्रिय रणनीति है।
और यही कारण है कि जब उन्हें पारी को गति देनी होती है, तो पंत शायद रिवर्स स्वीप जैसे शॉट्स का सहारा लेते हैं और आउट हो जाते हैं। जैसे वे पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एशिया कप में भारत के सुपर 4 मुक़ाबले में आउट हुए थे। ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के गेंद दर गेंद डाटा के अनुसार पिछले तीन सालों में पंत द्वारा टी20 में खेले गए 15.5 फ़ीसदी शॉट्स इन सात; स्लॉग, स्लॉग स्वीप, रिवर्स स्वीप, रिवर्स रैंप, रिवर्स पुल, पैडल और अपर कट, में से एक हैं।
आईपीएल, पीएसएल, बीबीएल, सीपीएल और टी20 अंतर्राष्ट्रीय में शीर्ष सात में बल्लेबाज़ी करने वाले 70 बल्लेबाज़ों, जिन्होंने कम से कम 750 गेंदों का सामना किया है। यह प्रतिशत किसी भी बल्लेबाज़ द्वारा खेला जाने वाला तीसरा सबसे अधिक है। आंद्रे रसल और रोवमन पॉवेल वे बल्लेबाज़ हैं जो पंत की तुलना में इन शॉट्स को ज़्यादा खेलते हैं। और जैसा कि नीचे दिया गया ग्राफ़िक्स दिखाता है, वे इसे अधिक से अधिक सफलता के साथ भी करते हैं।
टी20 में आड़े बल्ले से स्लॉग करना पंत की कमज़ोरी रही है। पिछले तीन सालों में पंत आईपीएल और टी20 अंतर्राष्ट्रीय में स्लॉग या स्लॉग स्वीप खेलते हुए आउट हुए हैं- जो कि गेंदबाज़ों से उनके आउट होने का 40 फ़ीसदी है। यह प्रतिशत ऊपर बताए गए 70 बल्लेबाज़ों में सबसे ज़्यादा है। ज़ाहिर है पंत आधुनिक टी20 शॉट्स के सबसे अच्छे अभ्यासकर्ता नहीं हैं।
जबकि गिरते-पड़ते शॉट्स लगाने वाले पंत की छवियां हमारे दिमाग़ में यह मज़बूत पक्ष रख सकती हैं कि वह टी20 क्रिकेट के लिए फ़िट हैं, पर वास्तव में वह इस फ़ॉर्मेट की मांगों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रवींद्र जाडेजा की ग़ैरमौजूदगी में भारत के मध्यक्रम में एक बाएं हाथ के बल्लेबाज़ की ज़रूरत उन्हें टीम में रख सकती है, लेकिन इलेवन में जगह पाने का एकमात्र कारण वैराइटी नहीं हो सकती। उन्हें उम्मीदों पर भी खरा उतरना होगा।

शिवा जयरामन ESPNcricinfo में सीनियर स्‍टैटिशियन हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के एडिटोरियल फ़्रीलांसर कुणाल किशोर ने किया है।