मैच (6)
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ऑस्ट्रेलिया बनाम वेस्टइंडीज़ (1)
हज़ारे ट्रॉफ़ी (2)
श्रीलंका बनाम अफ़ग़ानिस्तान (1)
फ़ीचर्स

अर्शदीप की धारदार गेंदबाज़ी विश्व कप से पहले भारत के लिए अच्छा संकेत

डेथ ओवरों के बाद अब पावरप्ले में भी अपनी छाप छोड़ रहा है यह युवा तेज़ गेंदबाज़

नई गेंद विश्व के एक भाग में स्विंग होती है और दूसरे में क्यों नहीं? क्रिकेट का खेल एक सदी से भी अधिक समय से इस सवाल से जूझ रहा है। कई परिकल्पनाएं होने के बावजूद हमारे पास इस प्रश्न का कोई निर्णायक उत्तर नहीं है।
भुवनेश्वर कुमार अगर बेंगलुरु में बैठकर तिरुवनंतपुरम में खेला गया पहला टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैच देख रहे थे, तो उनके मन में भी यही सवाल आया होगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा जारी प्रेस रिलीज़ के अनुसार इस सीरीज़ के लिए आराम दिए जाने के बाद वह इस समय राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में कंडीशनिंग संबंधित कार्य कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध हाल ही में संपन्न हुई सीरीज़ में नई गेंद पर मुश्किल से कोई स्विंग देखने को मिली थी और दीपक चाहर और अर्शदीप सिंह को नई गेंद को दोनों तरफ़ स्विंग करवाते देख उन्हें आश्चर्य हुआ होगा।
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भुवनेश्वर ने 42 गेंदों पर 91 रन ख़र्च किए और केवल एक विकेट उनके हाथ लगा।
तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफ़ील्ड स्टेडियम में चाहर और अर्शदीप ने 15 गेंदों के भीतर मेहमानों की आधी टीम को पवेलियन भेज दिया था। हरकत के साथ-साथ पिच पर गेंद फंस रही थी जिससे बल्लेबाज़ों का काम और कठिन हो गया। अर्शदीप ने दो लगातार गेंदों पर दो बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों को चलता किया। जहां राइली रुसो को गेंद हवा में बाहर निकली और उनके बल्ले का बाहरी किनारा ले गई वहीं डेविड मिलर इन स्विंग गेंद पर क्लीन बोल्ड हुए।
स्विंग गेंदबाज़ और यहां तक कहा जा सकता है कि तेज़ गेंदबाज़ों के लिए यह अनुकूल परिस्थितियां थी।
एक छोर को संभालते हुए 56 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाकर भारत को जीत दिलाने के बाद केएल राहुल ने कहा था कि यह टी20 मैच में उनके लिए अब तक की सबसे मुश्किल परिस्थियां थी। मैच के बाद उन्होंने ब्रॉडकास्टर को बताया, "गेंद हिल रही थी और कुछ गेंदें पिच पर फंस रही थी। बल्लेबाज़ों के लिए जो कुछ कठिन हो सकता था, वह आज उस पिच पर था।"
तेज़ गेंदबाज़ी के लिए मिलती मदद को ध्यान में रखते हुए अब भारत आगामी टी20 विश्व कप की तैयारियों के मद्देनज़र अपने तेज़ गेंदबाज़ों के प्रदर्शन का आकलन किस प्रकार करेगा? विशेषकर अर्शदीप तेज़ गेंदबाज़ी क्रम में किस स्थान पर विराजमान होंगे?
विश्व कप के लिए चुने गए 15 सदस्य दल में भारत ने चार तेज़ गेंदबाज़ों का चयन किया है जिसमें से केवल पूरी तरह से फ़िट रहने पर जसप्रीत बुमराह का स्थान पक्का है। अगर फ़िटनेस और गेंदबाज़ी की लय सही रही तो मेलबर्न में पाकिस्तान के विरुद्ध भारत के पहले मैच में भुवनेश्वर और हर्षल पटेल उनके साथी तेज़ गेंदबाज़ होने की संभावना है। हालांकि पिछले कुछ महीनों में यह दोनों ही संघर्ष करते दिखे हैं।
इस सीरीज़ में दिए गए ब्रेक की शायद भुवनेश्वर को सबसे ज़्यादा आवश्यकता थी क्योंकि उन्होंने इस साल भारत की ओर से सर्वाधिक 24 टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में हिस्सा लिया है। वह तरोताज़ा होकर लौटेंगे लेकिन भारत को अब भी पारी के अंतिम चार ओवरों में उनकी गेंदबाज़ी की चिंता होगी। अपने टी20 अंतर्राष्ट्रीय करियर में 17 से 20वें ओवरों के बीच भुवनेश्वर के 14 सबसे महंगे ओवरों में से सात इस साल और चार तो इसी महीने डाले गए हैं।
इस साल भारत के पास हमेशा अपने पहली पसंद के तेज़ गेंदबाज़ों को खिलाने का मौक़ा नहीं था और बुमराह और हर्षल की उपस्थिति से डेथ ओवरों में भुवनेश्वर को ज़्यादा गेंदबाज़ी नहीं करनी पड़ेगी। भुवनेश्वर अपने पसंदीदा पावरप्ले में अधिकतर गेंदबाज़ी कर पाएंगे। हालांकि पसली की चोट से वापसी करने के बाद हर्षल अब भी अपनी लय तलाश रहे हैं और इस साल अंतिम चार ओवरों में उनकी इकॉनमी (11) भुवनेश्वर की इकॉनमी (11.37) के आसपास ही है। इस दौरान अर्शदीप निखरकर सामने आए हैं। टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में अंतिम चार ओवरों में इस साल उनकी इकॉनमी 7.38 की रही है।
यह आंकड़े आपको आश्चर्यचकित कर सकते हैं लेकिन यह ध्यान में रखने योग्य है कि अर्शदीप ने अपनी सटीकता, नियंत्रण और चतुराई के कारण ही भारतीय टीम में प्रवेश किया था। साथ ही उन्होंने दिखाया है कि वह बहुत कुछ कर सकते हैं। अपने टी20 अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत उन्होंने नई गेंद के साथ मेडन ओवर डालकर की थी और पहले 12 मैचों में पावरप्ले के दौरान उनकी इकॉनमी केवल 7.50 की रही है। भुवनेश्वर के आंकड़ों की तुलना में यह इतने शानदार नहीं है लेकिन हमें यह भी देखना चाहिए कि अर्शदीप एक युवा गेंदबाज़ हैं जो डेथ गेंदबाज़ी के लिए जाने जाते हैं।
जब भी थोड़ी सी मदद मिलेगी, अर्शदीप घातक साबित होंगे। अन्य बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों से विपरित वह गेंद को दाएं हाथ के बल्लेबाज़ों से बाहर लेकर जाते हैं। विकेट के क़रीब से गेंदबाज़ी करते हुए वह हमेशा गेंद को स्विंग करवाते हैं। इसी वजह से उन्हें राउंड द विकेट के कोण से गेंदबाज़ी करना पसंद है।
तिरुवनंतपुरम में उन्होंने दिखाया कि वह गेंद को दूसरी तरफ़ भी स्विंग करवा सकते हैं। यह भारत के लिए अच्छा संकेत है। परिस्थितियां गेंदबाज़ी के लिए अनुकूल थी और शायद इसके चलते यह कहना कठिन है कि क्या अर्शदीप ने विश्व कप की एकादश में जगह बनाने की दावेदारी को मज़बूत किया है। हालांकि यह तय है कि वह अपने छोटे से करियर में लगातार चीज़ों को ठीक से अंजाम देते आए हैं और बुधवार को उन्होंने ठीक वैसा ही किया।

कार्तिक कृष्णास्वामी ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।