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लखनऊ बनाम दिल्ली का रिपोर्ट कार्ड : सफल शुरुआत को अच्छे अंजाम में तब्दील नहीं कर पाई दिल्ली

मार्क वुड के पांच विकेटों ने मैच पर अपना मार्क छोड़ दिया

पंजा अपने नाम करने के बाद मार्क वुड  •  Associated Press

पंजा अपने नाम करने के बाद मार्क वुड  •  Associated Press

शनिवार को लखनऊ सुपर जायंट्स और दिल्ली कैपिटल्स का मुक़ाबला लखनऊ के नाम रहा। गुजरात टाइटंस और चेन्नई सुपर किंग्स के ओपनर मुक़ाबले की तरह ही लखनऊ के पास दिल्ली के ऊपर जीत की हैट्रिक लगाने का मौक़ा था और गुजरात की तरह ही लखनऊ ने दिल्ली पर न सिर्फ़ जीत हासिल की बल्कि जीत का यह अंतर टूर्नामेंट में आगे दोनों टीमों पर असर डालेगा। आइए नज़र डालते हैं कि इस एकतरफ़ा मुक़ाबले में दोनों टीमों ने विभिन्न क्षेत्रों में कैसा प्रदर्शन किया।
बल्लेबाज़ी
लखनऊ (A+) - शुरुआत धीमी रही, गेंद फंस कर आ रही थी। केएल राहुल हड़बड़ी का शिकार हुए और काइल मेयर्स भी हड़बड़ी में लग रहे थे लेकिन उन्होंने जीवनदान का लाभ उठाया। मार्कस स्टॉयनिस पारी को आगे ले जाने में नाकाम रहे। पूरन ने भी 16वें ओवर में मिले जीवनदान का फायदा उठाया लेकिन अपनी पारी को अंजाम तक नहीं पहुंचा सके। अंत में आयुष बदोनी ने कुछ अच्छे शॉट लगाकर लखनऊ को एक बड़े स्कोर पर पहुंचाया।
दिल्ली (C) - गेंदबाज़ी की ही तरह दिल्ली ने अपनी पारी की शुरुआत बहुत उम्दा ढंग से की। पहले चार ओवरों में सलामी जोड़ी ने स्कोरबोर्ड पर 40 रन टांग दिए थे लेकिन पांचवे ओवर में गेंदबाज़ी पर आए मार्क वुड ने मैच के पूरे रुख़ को ही मोड़ दिया। एक ही ओवर में उन्होंने लगातार दो गेंदों पर पृथ्वी शॉ और मिचेल मार्श को क्लीन बोल्ड कर दिया था। सरफ़राज़ ख़ान भी फ्री हिट में कैच आउट हो गए थे लेकिन अपने अगले ओवर में वुड ने सरफ़राज़ को भी फ़ाइन लेग पर गौतम के हाथों आउट करा ही दिया। इसके बाद राइली रुसो और डेविड वॉर्नर के बीच साझेदारी ज़रूर पनपी लेकिन उन्हें रवि बिश्नोई की गेंद पर लखनऊ के सफल रीव्यू पर पवेलियन लौटना पड़ा।
गेंदबाज़ी
लखनऊ (A+) - लखनऊ की गेंदबाज़ी का आग़ाज़ अच्छा नहीं रहा। पहले तीन ओवर में ही दिल्ली के बल्लेबाज़ों ने उतने रन बना लिए थे जितने लखनऊ पावरप्ले में भी नहीं बना पाई थी। हालांकि चौथे ओवर में मार्क वुड का आगमन हुआ और उन्होंने लखनऊ की कमर तोड़ दी। मध्य ओवरों में लखनऊ की कसी हुई गेंदबाज़ी ने दिल्ली की पारी को न तो संभलने दिया और न ही गियर बदलने दिया। जिस वजह से लक्ष्य दिल्ली के लिए लगातार दूर होता चला गया। वुड के पंजे ने दिल्ली की लड़खड़ाई पारी को उठने नहीं दिया और बीच में आवेश ख़ान, बिश्नोई और गौतम ने पूरा सहयोग दिया। जयदेव उनादकट को छोड़कर लखनऊ के सभी गेंदबाज़ों ने प्रभावित किया।
दिल्ली (B) - गेंदबाज़ी पावरप्ले में अच्छी हुई लेकिन फ़ील्डिंग से सहयोग नहीं मिला। पावरप्ले के बाद मेयर्स के सामने बेबस दिखे। राहुल के आउट होने के बाद दबाव बनाने में नाकाम रहे। मध्य ओवरों में कुलदीप और अक्षर ने वापसी कराई लेकिन अंतिम पड़ाव में पूरन ने गियर बदला। डेथ ओवर में ख़लील ने पूरन को आउट कर वापसी कराई। लेकिन 19वें ओवर में वाइड गेंदों ने बदोनी को सेटल होने का मौका दिया। आखिरी ओवर में बड़े शॉट लगाकर बदोनी ने लखनऊ को अच्छे स्कोर पर पहुंचाया।
क्षेत्ररक्षण
लखनऊ (A) - लखनऊ की टीम की फ़ील्डिंग दिल्ली के मुक़ाबले कहीं बेहतर रही। गौतम ने फ़ाइन लेग पर सरफ़राज़ का अच्छा कैच तो लपका ही लेकिन मिसफ़ील्ड भी कम ही की। लखनऊ दिल्ली पर दबाव बनाए रखने में सफल भी इसीलिए हो पाई क्योंकि उनके गेंदबाज़ों को फ़ील्डरों से भरपूर सहयोग मिला। अगर डीप स्क्वायर लेग पर रुसो के कैच पकड़ने में उनादकट के असफल प्रयास को छोड़ दिया जाए तो लखनऊ के क्षेत्ररक्षण ने गेंदबाज़ी को संपूर्ण संरक्षण दिया।
दिल्ली (C) - दिल्ली के गेंदबाज़ लखनऊ के बल्लेबाज़ों के लिए घातक साबित हो सकते थे यदि उन्हें फ़ील्ड में पर्याप्त सहयोग मिला होता। पावरप्ले में फ़ील्डरों ने कई मिसफ़ील्ड तो की ही साथ ही ख़लील ने बैकवर्ड प्वाइंट पर काइल मेयर्स का कैच भी टपकाया। उस समय मेयर्स सिर्फ़ 14 के स्कोर पर खेल रहे थे। विकेटों के पीछे सरफ़राज़ भी संतोषजनक प्रदर्शन नहीं कर पाए। गेंद कई बार उनके दस्तानों से छिटकती हुई नज़र आई और 16वें ओवर में उन्होंने कुलदीप के ओवर में पूरन को स्टंप करने का एक मौका भी गंवाया।
रणनीति
लखनऊ (A+) - बल्लेबाज़ी में लखनऊ की सलामी जोड़ी ने हड़बड़ी दिखाई जिसकी ज़रूरत नहीं थी। गेंद शुरु में फंस कर आ रही थी और ज़रूरत थी कि बल्लेबाज़ अपना समय लेकर खेलें। अगर मेयर्स को ख़लील ने जीवनदान नहीं होता तो लखनऊ ने 'हड़बड़ी का काम शैतान का' की कहावत को चरितार्थ कर ही दिया था। हालांकि पारी की अंतिम गेंद से पहले कृष्णप्पा गौतम को इंपैक्ट प्लेयर के तौर पर लाना लखनऊ के लिए फ़ायदेमंद साबित हुआ। इसका फ़ायदा उन्हें गेंदबाज़ी के दौरान भी मिला जब गौतम ने सरफ़राज़ का कैच लपका और किफ़ायती गेंदबाज़ी कर रनों पर नियंत्रण बनाने में भी अपनी टीम की मदद की। हालांकि गेंदबाज़ी की शुरुआत में वुड को चार ओवर तक गेंद से दूर रखना भारी पड़ सकता था। हालांकि एक बार जब वुड ने तीन विकेट दिलाए तब इसके बाद बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के सामने गौतम और बिश्नोई को रोटेट करना अच्छी रणनीति का हिस्सा था। मध्य ओवरों आवेश का इस्तेमाल भी सही समय पर किया गया और उन्होंने वॉर्नर के विकेट के रूप में दिल्ली की उम्मीदों पर विराम लगा दिया।
रणनीति (B) - इंपैक्ट प्लेयर के तौर पर अमन ख़ान को शामिल करना दिल्ली के काम नहीं आया। राहुल के सामने साकरिया के मैचअप का लाभ उठाने में दिल्ली क़ामयाब तो रही लेकिन पावरप्ले में लखनऊ पर दबाव बनाने के बावजूद मध्य ओवरों में वह मेयर्स को गियर बदलने से रोक नहीं पाए। मेयर्स और हुड्डा के पवेलियन जाने के बाद एक बार फिर दबाव बनाने का मौक़ा आया। मार्कस स्टॉयनिस को जल्द पवेलियन लौटाने के बाद पूरन को लगातार स्लॉट गेंदें डाली गईं जिसका उन्होंने भरपूर फ़ायदा उठाया। बल्लेबाज़ी की आक्रामक शुरुआत की रणनीति तो काम आई लेकिन जब लगातार झटकों के बाद पारी को संभालने की बारी आई तो वॉर्नर को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज़ इस ज़िम्मेदारी को नहीं निभा पाया।