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भारतीय स्पिन गेंदबाज़ी में निरंतर छाप छोड़ रहे हैं सौरभ कुमार

सोमवार को कर्नाटका के विरुद्ध उन्होंने बताया क्यों उन्हें टेस्ट दल में शामिल किया जा चुका है

Saurabh Kumar sends down a delivery, South Africa vs India, 2nd unofficial Test, Bloemfontein, December 1, 2021

पिछले पांच वर्षों से सौरभ कुमार घरेलू क्रिकेट में भारत के लाल गेंद के प्रमुख स्पिनर्स में से एक हैं  •  Gallo Images/Getty Images

"मैं कैरम वैरम बॉल नहीं डालता।"
इस वाक्य में सौरभ कुमार अपनी बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाज़ी पर कोई अहंकार नहीं बल्कि अपनी गेंदों में क्रीज़, हवा और डिप जैसी ख़ूबियों के उपयोग पर विश्वास जता रहे थे। सोमवार को रणजी ट्रॉफ़ी के क्वार्टर-फ़ाइनल में उन्होंने कर्नाटका के मज़बूत बल्लेबाज़ी क्रम को परेशान करके रखा। ऐसा करने में उन्होंने कुछ ख़ास करिश्माई गेंदबाज़ी नहीं की बल्कि लगातार सही टप्पे पर गेंद को गिराते रहे। उन्होंने काफ़ी हद तक बोरिंग गेंदबाज़ी की लेकिन इसके द्वारा कर्नाटका के बल्लेबाज़ों को अपने इशारों पर नचाते रहे।
उनकी स्पेल के शुरुआत से ही साफ़ था कि वह बल्लेबाज़ों को कोई तोहफ़े तो नहीं देने वाले थे। अगर बल्लेबाज़ों को रन बनाने थे तो कुछ जोखिम उठाने ही पड़ते। भले ही आप आगे बढ़ते हुए स्पिन के विरुद्ध मारना चाहते हों या बैकफ़ुट पर जाते हुए कट करना चाहते हों, दोहरे मन से खेलना यानी सौरभ की निश्चित जीत।
रविकुमार समर्थ और मनीष पांडे ठीक इसी दुविधा का शिकार बने। समर्थ अर्धशतक बना चुके थे और वहां तक पहुंचने में उन्होंने तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ पंच और कट के ज़रिए कई रन बनाए। समर्थ जानते थे कि इस सतह पर गेंदबाज़ों को लगातार मदद मिल सकती थी और ऐसे में रन बनाने के मौक़ो को हाथ से नहीं जाने देना था। जब पांडे बल्लेबाज़ी करने आए थे तब तीन विकेट पर 97 बने थे और मिडिल ऑर्डर के लिए एक नाज़ुक घड़ी थी। अनुभवी बल्लेबाज़ के तौर पर उन्होंने आसानी से रन बनाना शुरू किया और कृष्णमूर्ति सिद्धार्थ के साथ बड़ी जल्दी से अर्धशतकीय साझेदारी को पूरा किया। यूपी के क्लोज़-इन फ़ील्डर ने चहकना बंद कर दिया और कर्नाटका की मेज़बान टीम एक मज़बूत स्थिति की ओर अग्रसर दिखी।
इस सब के बीच सौरभ की गेंदबाज़ी निरंतर चलती रही। चाय के बाद वह एक छोर से बिना रुकावट के गेंदबाज़ी करते रहे और ऐसा लगा कि यह उनकी गेंदबाज़ी की ख़ासियत है। वह एक छोर को पकड़ कर रन गति पर अंकुश लगाते हैं और दूसरे छोर पर गेंदबाज़ों के लिए विकेट लेने के बराबर मौक़े बनाते हैं। पहले दिन के स्कोरकार्ड में आपको सौरभ के चार विकेट दिखेंगे लेकिन यह नहीं दिखेगा कि बाक़ी के तीन विकेटों में उनका कितना बड़ा हाथ था।
मिसाल के तौर पर मयंक अग्रवाल का विकेट ले लीजिए। मयंक को पहले सत्र में आउट होने से पहले दो ओवर तक सौरभ ने लगातार परेशान किया। उन्होंने आर्म बॉल से अंदरूनी किनारे को बीट किया और ज़्यादा फ़्लैट गेंद से बाहरी किनारे को भी छकाया। जब मयंक इनसाइड आउट जाने के लिए क़दमों का इस्तेमाल करना चाहते थे तब फ़्लाइट में बीट हुए और जब कट करने गए तो समझ आया गेंद की लंबाई उस शॉट के लिए सही नहीं थी।
लय और गतिशीलता पर निर्भर करने वाले मयंक के लिए यह ओवर काफ़ी संघर्षपूर्ण साबित हुए। वह गेंदबाज़ों पर दबाव बनाने में विश्वास रखते हैं लेकिन सौरभ ने ऐसा नहीं होने दिया। दूसरे छोर पर शिवम मावी की गेंद पर स्कोर करने की कोशिश में वह विकेटकीपर को कैच थमा बैठे। पहली विकेट के लिए 57 की ठोस साझेदारी के बाद यूपी ने अपनी लड़ाई शुरू की।
सौरभ की गेंदबाज़ी की सबसे बड़ी ताक़त है कि वह बिना थकान के लगातार गेंदबाज़ी कर लेते हैं। ऐसे में पिछले दो सालों में वह भारतीय टीम प्रबंधन के चहेते नेट बोलर बन चुके हैं। पिछले दिसंबर में इस परिश्रम का उन्हें फल मिला जब पहली बार उन्हें भारतीय दल में भी चुना गया था। सर्विसेस और फिर उत्तर प्रदेश की टीमों के लिए उनकी मेहनत रंग लाई।
सौरभ ने अधिकतर क्रिकेट ऐसे पिचों पर खेला है जहां अधिक नमी रहती है और यूपी के स्विंग गेंदबाज़ हावी रहते हैं। ऐसे में उन्हें अपनी गेंदबाज़ी में अनुसाशन के साथ ही कुछ ना कुछ नया करना पड़ता है। किसी भी तरह के पिच पर प्रभावशाली गेंदबाज़ी करने पर वह ख़ुद काफ़ी गर्व लेते हैं। जब सोमवार जैसा पिच मिले जिसपर थोड़ी अधिक मदद हो तो उन्हें रोकना मुश्किल होता है।
मयंक को आउट करने में भूमिका निभाने के बाद उन्होंने समर्थ के विकेट से अपना खाता खोला। एक तेज़ फिरकी लेते गेंद पर पूरी तरह से बीट होने के बाद समर्थ कट मारने गए लेकिन प्वाइंट को आसान कैच दे बैठे। पांडे तो 1 पर सौरभ का शिकार बन सकते थे। आक्रामक शुरुआत के लिए मशहूर पांडे को सौरभ ने ख़ूब फ़्लाइट दी और ड्राइव के लिए ललचाया। हवा में बीट हुए पांडे ने मिड-ऑफ़ पर कैच का मौक़ा दिया लेकिन अंकित राजपूत से ग़लती हो गई।
पांडे को आख़िरकार सौरभ ने आर्म बॉल पर क्रीज़ से खेलते हुए विकेट के पीछे कैच के ज़रिए आउट किया। अगली गेंद पर श्रीनिवास शरत उछाल और टर्न का शिकार बने। दिन के बिलकुल अंत की ओर जब बल्लेबाज़ों ने प्रत्याक्रमण करने की कोशिश की तो उन्होंने चतुराई से गति परिवर्तन के ज़रिए कृष्णप्पा गौतम को आउट किया। बारिश से प्रभावित दिन में सौरभ ने 72 ओवर में से आधे से कुछ कम ओवर डाले और दो रन प्रति ओवर से थोड़े ज़्यादा दर से रन बनाने दिए। उन्होंने ऐसे विकेट झटके जिसके सहारे उनकी टीम अब मैच में मज़बूत स्थिति में आ चुकी है। उनके फ़िगर हैं 29-6-67-4।
अगर भारतीय टेस्ट टीम में आर अश्विन और रवींद्र जाडेजा के बाद आप विकल्प खोजें तो शायद अक्षर पटेल, कुलदीप यादव और जयंत यादव के बाद कोई नाम आसानी से नहीं आएगा। हालांकि सौरभ के प्रथम श्रेणी आंकड़े उन्हें इस चर्चा का हिस्सा बनाते हैं। 2018-19 और 2019-20 के रणजी सत्रों में उन्होंने 18 मैचों में 19.29 के औसत से 95 विकेट लिए जिनमें 10 बार उन्होंने पांच या उससे अधिक विकेट लिए। उनका सर्वश्रेष्ठ रहा 32 रन देकर सात विकेट। अगर ऐसे प्रदर्शनकर्ता के बारे में आप गुणगान नहीं सुनते हैं तो शायद वजह यही है कि वह आईपीएल नहीं खेलते। साथ ही कोविड के चलते 2020-21 सीज़न का ना होना भी उनके ख़िलाफ़ गया।
भारत के चयनकर्ता और प्रबंधन के सदस्य लगातार उनपर नज़रें टिकाए बैठे हैं। अलुर की उमस और गर्मी में आज उन्होंने एक आक्रामक बल्लेबाज़ी क्रम के ख़िलाफ़ तन और मन की शक्ति को दर्शाते हुए नियंत्रित गेंदबाज़ी से अपने सपने को साकार करने की ओर एक और बड़ा क़दम लिया।

शशांक किशोर ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo के स्थानीय भाषा प्रमुख देबायन सेन ने किया है।