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हमने स्मार्ट क्रिकेट नहीं खेला: द्रविड़

भारतीय कोच ने कहा कि कुछ ख़राब शॉट के कारण भारत दूसरा और तीसरा वनडे हार गया

भारत के कोच राहुल द्रविड़ के लिए साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ खेली गई वनडे श्रृंखला "आंखें खोलने वाली" थी। भारत श्रृंखला 3-0 से हार गया और द्रविड़ का मानना है कि पहले और तीसरे मैच में खेले गए "ख़राब शॉट" के कारण उनकी टीम को पहला और तीसरा मैच गंवाना पड़ा।
उन दोनों मैचों में शिखर धवन और विराट कोहली ने लक्ष्य का पीछा करते हुए अपने अर्धशतकों को बड़ी पारी में नहीं बदल सके। धवन और कोहली के आउट होने के बाद हार्दिक पांड्या और रवींद्र जडेजा की गैरमौजूदगी में मध्य और निचले मध्यक्रम के बल्लबाज़ो ने अपने जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया।
वनडे मैचों में भारत के प्लेइंग 11 में बल्लेबाज़ों और गेंदबाज़ों के समीकरण (टेम्पलेट) के बारे में जब राहुल से प्रश्न किया गया तो राहुल ने कहा, "निश्चित तौर पर हम बीच के ओवरों में अच्छा खेल सकते थे। हम अपनी टीम टेम्पलेट के अच्छी तरह से समझते हैं और आप किसी भी टेम्पलेट के साथ खेले, आप हमेशा चाहते हैं कि आपका प्लेइंग इलेवन संतुलित हो। कुछ एक ऑलराउंडर जो हमारी टीम में छठे, सातवें और आठवें स्थान पर खेल कर टीम को संतुलित कर सकते हैं, वह अभी चयन के लिए उपलब्ध नहीं हैं। उम्मीद है कि जब वे वापस आएंगे तो इससे हमें थोड़ी और गहराई मिलेगी, जो हमें थोड़े अलग अंदाज में खेलने का मौक़ा देगी।"
"हालांकि आप देखेंगे कि साउथ अफ़्रीका ने भी दो मौक़ो पर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 296 और 287 रन बनाए। अगर मैं इन दोनों मैचों में दूसरी पारी के 30 वें ओवर के बारे में सोचता हूं, तो हमें वास्तव में उस स्कोर पीछा करना चाहिए था। हमने ऐसा नहीं किया क्योंकि हमने कुछ ख़राब शॉट खेले और हमने गंभीर परिस्थितियों में स्मार्ट क्रिकेट नहीं खेला।"
श्रृंखला के दौरान भारतीय स्पिनरों और साउथ अफ़्रीकी स्पिनरों के देखें तो मेज़बानों ने इस मामले में भी बाजी मारी है। इस संदर्भ में द्रविड़ ने कहा कि बीच के ओवरों में विकेट कैसे लिया जाए, इस पर टीम को काम करने की ज़रूरत है। भारत ने तीसरे वनडे में उस मोर्चे पर कुछ अलग करने की कोशिश की। उनके तेज़ गेंदबाज़ों ने पिछले दो मैचों की तुलना में थोड़ी ज़्यादा हिट द डेक गेंदबाज़ी की और उन्हें इसके बेहतर परिणाम भी मिला।
द्रविड़ ने कहा, "मुझे लगता है कि बीच के ओवरों में हमें शायद अपने विकेट लेने के विकल्पों में सुधार करने की ज़रूरत है। अक्सर बीच के ओवरों में विकेट लेने में स्पिनर एक बड़ी भूमिका निभाते हैं, लेकिन साथ ही जब इस समय पर तेज़ गेंदबाज़ गेंदबाज़ी करने आते हैं तो वह किस तरह की गेंदबाज़ी करें,हमने उस पर चर्चा की है। हम समझते हैं कि बीच के ओवरों में विकेट लेने में हम असफल रहे हैं। हालांकि हमें पता है कि इस संदर्भ में हमें क्या करने की ज़रूरत है।"
श्रृंखला से पहले कार्यवाहक कप्तान केएल राहुल ने कहा था कि टीम वेंकटेश अय्यर को अपने छठे गेंदबाज़ी विकल्प के रूप में देख रही है। हालांकि पहले वनडे मैच में अय्यर को गेंदबाज़ी नहीं दिया गया। हालांकि उन्होंने दूसरे मैच में पांच ओवर की गेंदबाज़ी की थी।
द्रविड़ ने इस बारे में कहा, "जब आप टीम में छठे गेंदबाज़ होते हैं, तो ऐसा हो सकता है कि टीम को आपकी गेंदबाज़ी करने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने कहा, "विचार स्पष्ट रूप से वेंकटेश अय्यर जैसे खिलाड़ी को छठे गेंदबाज़ी विकल्प के रूप में विकसित करने का है, चाहे वह वेंकटेश हो या हार्दिक। हमारे पास जाडेजा जैसे खिलाड़ी का विकल्प भी है जो वास्तव में अच्छी बल्लेबाज़ी कर रहे हैं और संभावित रूप से जब वह टीम में वापस आएंगे तो नंबर 6 पर बल्लेबाज़ी कर सकते हैं।
अय्यर की बल्लेबाज़ी के पॉज़िशन के बारे में भी काफ़ी चर्चा हुई है, लेकिन द्रविड़ ने कहा कि टीम प्रबंधन उनकी भूमिका के बारे में "बहुत स्पष्ट" था।
"मुझे पता है कि उसने केकेआर के लिए आईपीएल में और कई बार मध्य प्रदेश के लिए शीर्ष क्रम में बल्लेबाज़ी की है, हालांकि उसने मध्य क्रम में भी एमपी के लिए बल्लेबाज़ी की है। हमारी टीम में हम छठे गेंदबाज़ी के विकल्प की तलाश कर रहे थे। उनके लिए टीम में यही भूमिका थी क्योंकि इस समय हमारे पास शीर्ष क्रम में काफ़ी विकल्प हैं।"
अगर इस सीरीज़ में भारत के कुछ सकारात्मक चीज़ों पर बात की जाए तो उसमें दीपक चाहर के द्वारा तीसरे वनडे में खेली गई पारी को ज़रूर शामिल किया जाएगा। 288 रनों का पीछा करते हुए, भारत एक समय 7 विकेट के नुकसान पर 223 रन था, लेकिन चाहर ने श्रृंखला का अपना पहला मैच खेलते हुए 34 गेंदों में 54 रनों की पारी खेलकर टीम को लक्ष्य के काफ़ी पास ले गए थे। उन्होंने श्रीलंका में भी इसी तरह का प्रदर्शन किया था। द्रविड़ ने चाहर और शार्दुल ठाकुर की काफ़ी प्रशंसा की। शार्दुल ने सीम गेंदबाज़ी ऑलराउंडर के रूप में खेलते हुए पहले दो एकदिवसीय मैचों में 50 * और 40 * रन बनाए।
द्रविड़ ने कहा, "उन्होंने (चाहर) श्रीलंका और यहां पर दिखाया है कि उनके पास बल्लेबाज़ी की भी क्षमता है। मैंने उसे भारत ए की टीम में में भी देखा है और मुझे पता है कि वह काफ़ी अच्छी बल्लेबाज़ी कर सकता है। जाहिर है, हम जानते हैं कि वह गेंद के साथ क्या कर सकता है। उसे और शार्दुल को देखकर अच्छा लगा। ऐसे गेंदबाज़ जो निचले क्रम में आकर बल्ले से भी योगदान देने में सक्षम रहते हैं, वह टीम के लिए काफ़ी कारगार साबित हो सकते हैं। हम निश्चित रूप से चाहर और शार्दुल को कुछ और मैचों में मौक़ा देंगे।"
ऑलराउंडरों के अलावा, द्रविड़ ने कहा कि टीम अपने मध्य क्रम के बल्लेबाज़ों को भी पर्याप्त मौक़ा देने की कोशिश कर रही है।
"इस सीरीज़ में भी पूरा विचार यही था," उन्होंने कहा। यदि आप देखें तो हमने वास्तव में मध्य क्रम को नहीं बदला। सिर्फ़ अंतिम मैच में हम सूर्या को टीम में लेकर आए। अन्यथा हमने बल्लेबाजी क्रम में बिल्कुल भी बदलाव नहीं किया। इसलिए हम उन्हें लगातार मौक़े और वह सुरक्षा देना चाहते हैं। एक बार जब आप लोगों को वह दे देते हैं, तो आप उनसे बेहतर प्रदर्शन की मांग करते हैं। जब अपने देश के लिए खेल रहे हैं तो हर इंसान आपसे बढ़िया प्रदर्शन की उम्मीद रखता है।"

हेमंत बराड़ ESPNcricinfo के सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।