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इंग्लैंड में भारत (1)
फ़ीचर्स

धोनी सर की तरह अंत तक खेलना है : किरण नवगिरे

घरेलू टी20 प्रतियोगिता में सर्वाधिक रन बनाने वाली यह धाकड़ बल्लेबाज़ पहली बार महिला टी20 चैलेंज का हिस्सा बनी हैं

Kiran Navgire is all smiles

किरण नवगिरे महिला टी20 चैलेंज में वेलॉसिटी का हिस्सा हैं  •  Kiran Navgire

अपने व्हॉट्सऐप स्टेटस पर किरण नवगिरे ने महेंद्र सिंह धोनी के प्रति अपने अपार प्रेम को ज़ाहिर किया है। वह उन्हें क्रिकेट का भगवान मानती हैं।
महाराष्ट्र की इस धाकड़ बल्लेबाज़ ने बताया, "मैं धोनी की तरह लंबे छक्के लगाना चाहती थी और इसी वजह से मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था। देश के साथ-साथ मेरे लिए भी बहुत कुछ बदल सा गया जब धोनी ने (2011) विश्व कप जीतने के लिए वह छक्का लगाया था।"
11 वर्षों बाद नवगिरे अपनी बल्लेबाज़ी के दम पर सुर्ख़ियां बटोर रही हैं। हाल ही में संपन्न हुई महिला टी20 लीग में नागालैंड का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने सर्वाधिक 35 छक्के लगाए। इसके अलावा उन्होंने 54 चौकों की मदद से कुल 525 रन बनाए। इस दौरान वह एक टी20 मैच में 150 से अधिक का स्कोर बनाने वाली पहली भारतीय महिला भी बनी। साथ ही अपनी पार्ट टाइम ऑफ़ स्पिन से उन्होंने सात विकेट झटके।
इस प्रदर्शन के बाद वह महिला टी20 चैलेंज में अपना पहला मैच खेलने की कगार पर हैं। तीन टीमों वाली यह प्रतियोगिता अपने चौथे संस्करण में है और नवगिरे को दीप्ति शर्मा के नेतृत्व वाली वेलॉसिटी टीम में चुना गया है।
एमसीए स्टेडियम पर अपने दूसरे अभ्यास सत्र के बाद कप्तान दीप्ति ने कहा, "मैं किरण को पहली बार नेट्स में खेलते हुए देख रही थी जब मुझे पता चला कि वह शेफ़ाली (वर्मा) की तरह एक बेहतरीन पावर हिटर हैं। अभ्यास में मैंने उन्हें ज़्यादातर समय छक्के लगाते हुए ही देखा है। जब वह बल्लेबाज़ी करती हैं तब ऐसा लगता है कि गेंद मैदान से बाहर जाकर ही गिरेगी। उनके ताक़तवर शॉट देखकर समझ नहीं आता कि यह शॉट कोई पुरुष खेल रहा है या फिर कोई महिला।"
नवगिरे महाराष्ट्र के सोलापुर ज़िल्हे के मिरे गांव में पली-बड़ी। उनका मानना है कि अपने परिवार के साथ खेत में काम करने और बचपन में अलग-अलग खेल खेलने से उन्हें यह ताक़त मिली है।
इस 27 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, "मिरे में क्रिकेट इतना नहीं खेला जाता लेकिन सब लोग कबड्डी, खो-खो और ऐथलेटिक्स खेलते हैं। मेरे पिताजी हमेशा से ऐथलेटिक्स को लेकर काफ़ी प्रोत्साहित करते रहे हैं और एक बार तो उन्होंने मुझे इस खेल में ज़ोर आज़माने को कहा था। मैं बचपन से ही खेल-कूद करती थी और पांचवीं कक्षा में मैंने ऐथलेटिक्स में हिस्सा लेना शुरू किया।"
नवगिरे जैवलिन थ्रो, शॉट पुट और 100 मीटर की दौड़ में भाग लेती थी। 2009-10 में उन्होंने महाराष्ट्र राज्य की ऐथलेटिक्स टीम में जगह बनाई थी और अब तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर वह 110 से अधिक मेडल जीत चुकी हैं।
अपने कॉलेज में ऐथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते समय नवगिरे ने क्रिकेट टीम का ट्रायल दिया और जल्द ही वह यूनिवर्सिटी लेवल पर खेलने लगीं।
इस बात को याद करते हुए उन्होंने कहा, "मेरे कोच मुझे आठवें-नौवें स्थान पर बल्लेबाज़ी के लिए भेजते थे और मैंने ख़ुद को कभी एक बल्लेबाज़ नहीं समझा। मुझे छक्के लगाना पसंद था जिस वजह से मैं ऊपर बल्लेबाज़ी करने के मौक़े ढूंढती रहती थी।"
क्रिकेट की ट्रेनिंग नहीं लेने के बावजूद नवगिरे ने तीन साल पुणे यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व किया।
वह आगे कहती हैं, "अगर मैंने कॉलेज में अपने कोच की बात सुनी होती तो मेरा क्रिकेट करियर वहीं पर समाप्त हो जाता। जब भी मैं उनसे अगले स्तर पर क्रिकेट खेलने के बारे में पूछती, वह कहते कि भारत में महिलाओं के लिए घरेलू क्रिकेट होता ही नहीं है। 23 साल की उम्र में मुझे पता चला कि सर ग़लत थे।"
आज़म कैंपस में एक प्रतियोगिता के दौरान वहां के स्पोर्ट्स निदेशक गुलज़ार शेख़ नवगिरे की बल्लेबाज़ी से प्रभावित हुए। उनकी सलाह पर नवगिरे ने अहमदनगर से पुणे स्थानांतरित करने का निर्णय लिया और आज़म कैंपस में उनकी क्रिकेट ट्रेनिंग शुरू हुई।
पुणे ज़िल्हे के क्रिकेट एसोसिएशन की वार्षिक प्रतियोगिता में खेलते हुए नवगिरे ने पांच मैचों में 429 रन बनाए जिससे उनके करियर को गति मिली।
नवगिरे ने बताया, "एसोसिएशन के अध्यक्ष मेरे खेल से प्रभावित हुए और उन्होंने मुझे महाराष्ट्र राज्य की टीम के चयन के लिए भेजा। मैंने उस स्तर पर खेला नहीं था और सीनियर खिलाड़ियों की मौजूदगी में मैं उन मैचों में अच्छा नहीं कर पाई। इस वजह से मेरा चयन नहीं हुआ।" वह अपने प्रदर्शन और मानसिकता पर काम करने के इरादे से पुणे लौट आईं।
अगले साल महाराष्ट्र टीम के ट्रायल आज़म कैंपस के मैदान पर हुए और बल्ले के साथ दमदार प्रदर्शन करते हुए नवगिरे 30 खिलाड़ियों की सूची का हिस्सा बनी। इन मैचों ने उन्हें अपने खेल की कमज़ोरियों पर काम करने का अवसर दिया।
उन्होंने कहा, "लंबे समय तक मैं केवल चौके और छक्के लगाने को देखती थी। मुझमें सिंगल-डबल लेने का आत्मविश्वास नहीं था। समय के साथ मैंने छोर बदलने पर काम किया। मैंने अपने खेल में विविधता लाने पर काम किया।"
नवगिरे 2017 में अपने पहले निजी कोच जॉन्टी गिलबिले से मिली। वह जॉन्टी को अपनी बल्लेबाज़ी मानसिकता का श्रेय देती हैं। उन्होंने कहा कि जॉन्टी ने उन्हें एक सशक्त बल्लेबाज़ बनाया और छक्के लगाने की अपनी क्षमता को सिंगल चुराने की योजना के साथ जोड़ने को कहा।
2018 में उन्हें आत्मविश्वास हो गया था कि वह कुछ बड़ा हासिल करेंगी। पुणे में एक स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंट में उन्हें सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार का ख़िताब मिला। पूर्व भारतीय खिलाड़ी और वर्तमान में वेलॉसिटी में नवगिरे की कोच देविका पालशिकर के हाथों उन्हें सम्मानित किया गया था।
नवगिरे 2017 से अपने घरेलू शहर पुणे में महिला टी20 चैलेंज में हिस्सा लेने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, "यह मेरे और सारे पुणे शहर का सौभाग्य है कि महिला टी20 चैलेंज यहां खेला जा रहा है। इस शहर में मैंने वह मेरी ज़िंदगी को बदलने वाला टूर्नामेंट खेला था, इसी शहर में गुलज़ार सर से मेरी मुलाक़ात हुई और इस शहर ने मुझे कई सारे अनुभव दिए। मैंने कई बार इस पिच पर बल्लेबाज़ी की है और मैं परिस्थितियों की समझ का पूरा लाभ उठाना चाहती हूं।"
वह समझती हैं कि इस प्रतियोगिता में उन्हें उच्च स्तर की गेंदबाज़ी का सामना करना होगा। इस विषय पर उनका कहना है, "विश्व स्तरीय गेंदबाज़ों का सामना करना उत्साहित करने तथा चुनौती देने वाला है। यह मुझ जैसी अनकैप्ड खिलाड़ी के लिए (सोफ़ी) एकलस्टन, (अलाना) किंग, सलमा (ख़ातून) जैसे उच्च कोटि के गेंदबाज़ों का सामना करने का सुनहरा मौक़ा होगा।"
मैच वाले दिन पर नवगिरे क्या-क्या करेंगी? उनके अनुसार प्लान बहुत सरल है : "धोनी सर की तरह ठंडे दिमाग़ से अंत तक खेलना है और जो भी गेंदबाज़ सामने हो, एक सिक्स तो ज़रूर मारूंगी।"

ऑन्नेशा घोष ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं।