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बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए निखरती है यह श्रीलंकाई टीम

किसी बड़े नाम के ना होते हुए भी वे इस साल सात टी20 में चार बार चेज़ करने में सफल रहे हैं

वर्तमान की श्रीलंकाई टीम अगर आप को हरा सकती है तो शायद सिर्फ़ लक्ष्य का पीछा करते हुए।
शायद यह बात शुरुआत में समझ से परे लगे। श्रीलंका के सर्वश्रेष्ठ टी20 खिलाड़ी वनिंदू हसरंगा एक गेंदबाज़ हैं। उनके साथ हैं महीश थीक्षना, जिनकी 21 टी20आई पारियों के बाद इकॉनमी है 6.56 की। उनका कोई भी बल्लेबाज़ विश्व के शीर्ष स्तर का नहीं कहलाएगा। ऐसे में जब विपक्ष एक बड़ा स्कोर खड़ा कर देता है तो श्रीलंका का जीतना कठिन लगता है।
हालांकि इस टीम की सोच में कुछ तो बात है जो उन्हें लक्ष्य का पीछा करने के लिए प्रेरित करती है। इस साल सात मैचों में पीछा करते हुए उन्होंने चार मैच जीते और एक और टाई करवाया है, हालांकि उस मैच में सुपर ओवर से ऑस्ट्रेलिया की जीत हुई थी। जो स्कोर उन्होंने हासिल किए हैं वह भी कम नहीं - पल्लेकेले में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 177, पिछले मैच में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ 184 या फिर शनिवार को 176 का लक्ष्य
शारजाह आजकल एक कम स्कोर वाला मैदान माना जाता है। इसी मैदान पर पिछले साल विश्व कप के दौरान श्रीलंका ने 19 ओवर में 172 का लक्ष्य हासिल करके एक नया ग्राउंड रिकॉर्ड बनाया था। चरिथ असलंका ने उस जीत में 49 गेंदों पर 80 नाबाद बनाए थे।
शनिवार को श्रीलंका ने उस ग्राउंड रिकॉर्ड को सुधारते हुए 176 बनाए। असलंका ने पारी की सबसे ख़राब बल्लेबाज़ी की और 14 गेंदों पर आठ ही रन बनाए। 2022 में कप्तान दसुन शानका ने सात पारियों में 138 के स्ट्राइक रेट से 188 रन बनाए हैं लेकिन वह भी 10 गेंद पर 9 पर आउट हो गए। पावरप्ले में बल्लेबाज़ी करने के बावजूद अपनी धीमी और आश्वस्त बल्लेबाज़ी के लिए मशहूर पथुम निसंका ने 28 गेंदों पर 35 रन बनाए।
इस सब के बावजूद श्रीलंका को जीत मिली। फ़ॉर्म में चल रहे कुसल मेंडिस 19 गेंदों पर 36 रनों के साथ सर्वाधिक स्कोरर रहे और उन्होंने राशिद ख़ान के लगातार गेंदों पर लेगसाइड के ऊपर छक्के जड़े। दनुष्का गुनातिलका ने भी अपने साधारण फ़ॉर्म से जूझते हुए 20 गेंदों पर 33 की बहुमूल्य पारी खेली।
जब 35 गेंदों पर 57 चाहिए थे तब भानुका राजापक्षा की एंट्री हुई और उन्होंने मैच की निर्णायक पारी खेलते हुए 14 गेंदों पर 31 बनाए। पिछले विश्व कप के बाद से श्रीलंका के लिए दूसरी पारी में बल्लेबाज़ी करते हुए उनका स्ट्राइक रेट 158 का रहा है।
राजापक्षा को हमेशा स्पिन के ख़िलाफ़ बेहतरीन बल्लेबाज़ी के लिए जाना गया है लेकिन यहां उन्होंने तेज़ गेंदबाज़ों की भी ख़ूब पिटाई की। श्रीलंका अपने बल्लेबाज़ी क्रम में उन्हें एक फ़्लोटर के रूप में प्रयोग करता दिखता है और ऐसे में स्पिन और पेस दोनों के विरुद्ध उनका असरदार होना लाभदायक साबित होगा।
किसी के भी आकड़ें ऐसे नहीं जो विपक्ष में डर का संचार कर देंगे। पिछले साल विश्व कप से भी इस बार का शीर्ष क्रम काफ़ी अलग है। बावजूद इसके ऐसे जीत से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। श्रीलंका को अब क्रमशः भारत और पाकिस्तान से भिड़ना है। उनमें यह विश्वास रहेगा कि वह इससे बड़े स्कोर भी चेज़ कर सकते हैं।

ऐंड्रयू फ़िडेल फ़र्नांडो ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के श्रीलंका संवाददाता हैं, अनुवाद ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के सीनियर असिस्टेंट एडिटर और क्षेत्रीय भाषाओं के प्रमुख देबायन सेन ने किया है