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पांच खिलाड़ी जो अगले सीज़न चेन्नई की नैय्या पार लगा सकते हैं

इस साल तो चेन्नई बाहर हो गई है लेकिन उनके साथ कुछ सकारात्मक चीज़ें भी हुई हैं

मुंबई इंडिंयस के ख़िलाफ़ 97 रन पर ढेर हो जाना, शायद ही किसी चेन्नई सुपर किंग्स के प्रशंसक ने सोचा होगा। इस पांच विकेट की हार के बाद चेन्नई का प्लेऑफ़ में जगह बनाने का सपना टूट गया, लेकिन सकारात्मक होकर देखा जाए तो कुछ ऐसी चीज़ें हैं जो यह टीम अपने साथ लेकर जाएगी। चाहे वह डेवन कॉन्वे हों या मुकेश चौधरी, ये खिलाड़ी आने वाले कुछ वर्षों में इस टीम को मैच जिताते ज़रूर नज़र आने वाले हैं।
कोलकाता नाइट राइडर्स के ख़िलाफ़ पहले मैच में तीन रन पर आउट होने के बाद इस बायें हाथ के बल्लेबाज़ को सात मैचों के लिए बाहर बैठा दिया गए। किसी भी खिलाड़ी के लिए यह निराशाजनक हो सकता है। पंजाब किंग्स से हार मिलने के बाद अचानक रवींद्र जाडेजा टीम की कप्तानी छोड़ देते हैं और अगले ही मैच में कॉन्वे को मौक़ा मिलता है। कॉन्वे भी धोनी की कप्तानी में शानदार प्रदर्शन करते हैं।
सनराइज़र्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ 55 गेंद में नाबाद 85 रन, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के ख़िलाफ़ 37 गेंद में 56 रन और इसके बाद दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ़ 49 गेंद में 87 रन। बिना शक कहा जा सकता है कि कॉन्वे चेन्नई के लिए इस सीज़न कुछ उम्मीद बनकर आए हैं।
फ़ाफ़ डुप्लेसी और शेन वॉटसन जैसे ओपनरों को खोना किसी भी टीम के लिए खल सकता है और इस सीज़न की शुरुआत से ही चेन्नई ओपनिंग संयोजन खोजती हुई नज़र आई। कॉन्वे ने पिछले कुछ मैचों में जिस तरह से ख़ुद को साबित किया है, उससे पूरी तरह से लग रहा है कि वह इस कैंप का लंबे समय तक हिस्सा रह सकते हैं। कॉन्वे ने इस सीज़न पांच मैच खेलते हुए ही 231 रन बनाए हैं, जिसमें उनका औसत 57.75 और स्ट्राइक रेट 154 का रहा है।
दीपक चाहर को मोटी रकम देने के बाद जब वह चोटिल हो गए, तो लगा कि चेन्नई के लिए शुरुआती ओवरों में कौन गेंदबाज़ उनकी कमान संभालेगा? शुरुआती कुछ मैचों में बायें हाथ के तेज़ गेंदबाज़ मुकेश चौधरी का प्रदर्शन सामान्य रहा था, लेकिन उन्होंने इसके बाद दीपक की भूमिका को बहुत अच्छे से संभाला। 11 मैचों में लिए 16 विकेट बताते हैं कि उनका और चेन्नई का साथ लंबा चलने वाला है। सनराइज़र्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ उनका इस सीज़न का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है, जहां उन्होंने 47 रन देते हुए चार विकेट अपने नाम किए थे।
चेन्नई के लिए इस सीज़न अगर कुछ और अच्छा हुआ है तो वह हैं श्रीलंका के मिस्ट्री स्पिनर महीश थीक्षना। इसमें और भी अच्छी बात हो जाती है कि चेन्नई इस उभरते हुए स्पिनर को मात्र 70 लाख रुपये में ख़रीद कर लाई है। स्पिनरों के कप्तान कहलाए जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी के लिए यह बहुत अच्छा है। अगर देखा भी जाए तो वह कमाल का प्रदर्शन करने में क़ामयाब रहे हैं। उन्होंने नौ मैचों में 7.45 के इकॉनमी से 12 विकेट अब तक हासिल किए हैं।
एक हरफ़नमौला के तौर पर शिवम दूबे ने जरूर निराश किया हो, लेकिन एक बल्लेबाज़ के तौर पर वह लगभग क़ामयाब रहे हैं। वैसे तो उनको अधिकतर मौक़े नहीं मिले, लेकिन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के ख़िलाफ़ उनकी नाबाद 95 रनों की पारी को कौन ही भूल सकता है। इस पारी से पहले वह लखनऊ के ख़िलाफ़ 49 और पंजाब किंग्स के ख़िलाफ़ 57 रन की पारी खेलकर पीली जर्सी में अपनी छाप छोड़ चुके थे।
क्रीज़ में खड़े रहते हुए लंबे छक्के लगाने की क्षमता उनको दूसरों से अलग बनाती है। वैसे भी शिवम ने बेंगलुरु के ख़िलाफ़ बेहतरीन पारी खेलने के बाद कहा था कि चेन्नई का हिस्सा होना उनके लिए सपने के सच होने जैसा है। कुल मिलाकर यह खिलाड़ी पीली जर्सी में रमता नज़र आ रहा है।
महेंद्र सिंह धोनी जुलाई में 41 साल के हो जाएंगे। ऐसे में सवाल चेन्नई के प्रशंसकों के लिए तो बनता है कि वह कब तक इस टीम का हिस्सा रहेंगे? उन्होंने अंदेशा तो पिछले साल ही दे दिया था कि यह सीज़न उनका आख़िरी है लेकिन इस बाद वह पुराने धोनी की तरह दिखे हैं। धोनी को कप्तानी भी दोबारा मिल गई है लेकिन क्या वह 2023 में पीली जर्सी में दिखेंगे?
हैदराबाद के ख़िलाफ़ मैच में टॉस के बाद जब धोनी ने कहा, "आप पक्का मुझे अगले साल पीली जर्सी में देखोगे, चाहे यह पीली जर्सी या कोई दूसरी पीली जर्सी, वह अलग बात है।" धोनी के इस बयान से उनके प्रशंसक थोड़ा तो ख़ुश हो ही सकते हैं। धोनी के प्रदर्शन की बात करें तो मुंबई इंडियंस के ख़िलाफ़ हुए पहले मैच में उन्होंने नाबाद 28 रन बनाते हुए जीत दिलाई थी। इसके अलावा दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ़ नाबाद 21 और पिछले मैच में मुंबई के ख़िलाफ़ नाबाद 36 रन की पारी बताती है कि उनमें अभी भी मैच फ‍़िनिशर वाली बात है।

निखिल शर्मा ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर हैं। @nikss26