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भारतीय टीम में अपनी भूमिका अच्छी तरह से समझते हैं दीपक हुड्डा

श्रीलंका के ख़िलाफ़ भारतीय टीम को अच्छे स्कोर तक पहुंचाने में दीपक ने अहम भूमिका निभाई

श्रीलंका के ख़िलाफ़ पहले टी20आई के दौरान जब दीपक हुड्डा बल्लेबाज़ी करने आए तो भारत मुश्किल स्थिति में था। सिर्फ़ 77 के स्कोर पर भारत ने अपने चार विकेट गंवा दिए थे। हालांकि बाक़ी दिनों की तरह वानखेड़े की पिच इस बार बल्लेबाज़ों को उतना समर्थन नहीं कर रही थी। यहां पर चौके और सिक्सर लगाना आसान नहीं था।
महीष थीक्षणा फ़्लैट और शॉर्ट ऑफ़ लेंथ गेंदबाज़ी कर रहे थे। वह बिल्कुल विकेट टू विकेट दिशा रख रहे थे। शुभमन गिल भी अपने पहली टी20आई में कुछ इसी तरह की गेंद पर पगबाधा आउट हुए। वहीं संजू सैमसन रन रेट को बढ़ाने की फ़िराक़ में धनंजय डिसिल्वा की एक ऑफ़ ब्रेक गेंद को हवा मे मारने के प्रयास में कैच आउट हुए। इशान किशन भी वनिंदु हसरंगा की एक गेंद पर हवाई स्वीप लगाने के लिए गए तो वह भी डीप मिड विकेट सीमा रेखा पर कैच आउट हो गए।
11 ओवर तक श्रीलंकाई स्पिनरों ने पांच ओवर की गेंदबाज़ी की थी। उन पांच ओवरों में उन्होंने 22 रन ख़र्च करते हुए तीन विकेट लिए। जब भारत इस स्थिति में था तो ईएसपीएनक्रिकइंफ़ों फ़ोरकास्टर के अनुसार भारत का स्कोर 152 के आस-पास तक पहुंचने के आसार थे। हालांकि इस मैदान पर यह स्कोर काफ़ी नहीं था क्योंकि इस मैदान की बाउंड्री काफ़ी छोटी थी और इसके अलावा भारतीय टीम में अर्शदीप सिंह बीमार होने के कारण मौजूद नहीं थे।
दीपक क्रीज़ पर आने के बाद पहली ही गेंद पर बीट हो गए। वह हसरंगा के गुगली को समझ नहीं पाए थे। इसके बाद अगली आठ गेंदों पर उन्होंने संभल कर खेला। 15वें ओवर के बाद भारत का स्कोर 101 था और अब हार्दिक पंड्या भी पवेलियन वापस जा चुके थे। इसके बाद फ़ोरकास्टर के अनुसार भारत 142 के स्कोर के आस-पास पहुंच रहा था।
16वें ओवर में थीक्षणा अपने स्पेल का अंतिम ओवर फेंकने आए और कुछ एक शॉर्ट गेंदें फेंकी। इससे दीपक को बड़े शॉट लगाने का मौक़ा मिल गया, जो अब तक आराम से बल्लेबाज़ी कर रहे थे। उस गेंद पर दीपक ने मिडविकेट की दिशा में एक लंबा सिक्सर लगाया। उसके बाद वाली गेंद फ़ुलर थी और उस गेंद पर भी दीपक ने ताक़तवर प्रहार करते हुए सीमा रेखा के बाहर पहुंचा दिया। इन दो सिक्सरों के बाद फ़ोरकास्टर पर भारत का अंतिम स्कोर 157 के आस-पास जाने के आसार दिखने लगे।हुड्डा ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "वह उनका [थीक्षणा का] आख़िरी ओवर था और उन्होंने एक ढीली गेंद फेंकी। टी20 क्रिकेट में आपको गेंद को हिट करने के लिए हर समय अपना नज़रिया साफ़ रखना होता है। अक्षर [पटेल] और मैंने सोचा कि गेंदबाज़ों को निशाना बनाने का यह सही समय है और हमने वही किया।"
इसी तरह से हसरंगा जब अपने कोटे का आख़िरी ओवर फेंकने आए तो उन्होंने पहली पांच गेंदों पर तो कोई बाउंड्री नहीं दी लेकिन अंतिम गेंद पर उनसे ग़लती हो गई और दीपक उसी के इंतज़ार में बैठे हुए थे। हसंरगा के द्वारा फेंकी गई शॉर्ट गेंद को आराम से सीमा रेखा के बाहर पहुंचा दिया गया था।
दीपक ने अपनी पारी के दौरान सबसे ज़्यादा रन (13) शॉर्ट गेंदों के ख़िलाफ़ बनाए। इसके लिए उन्होंने बस तीन गेंद लिए। उनकी इस पारी में उन्होंने साफ़ दिखा गया कि वह स्पिन का सामना करने के मामले में बाक़ी के बल्लेबाज़ों से कैसे अलग हैं। स्पिन गेंदबाज़ों का सामना करते हुए दीपक ने 13 गेंदों में 26 रन बनाया, जबकि बाक़ी के बल्लेबाज़ों ने स्पिन के ख़िलाफ़ 41 गेंदों में 31 रन बनाया। इसके अलावा दीपक ने 35 गेंदों में 68 रनों की शानदार साझेदारी भी की। इसी कारण से भारत 162 के स्कोर तक पहुंचने में कामयाब हो पाया।
दीपक को पता है कि नंबर छह पर कैसे बल्लेबाज़ी करनी है और ऐसी परिस्थितियों में क्या करना है।
उन्होंने कहा, "यह बहुत स्पष्ट था कि शुरुआती विकेट गंवाने के बाद हमें साझेदारी बुननी थी। जब आप निचले क्रम में नंबर छह पर बल्लेबाज़ी कर रहे हों तो आपको ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार रहना होगा। इस खेल में आप पिच के अनुसार अपने खेल को आगे बढ़ाते हैं और एक अच्छा स्कोर पोस्ट करते हैं। नंबर छह के रूप में बल्लेबाज़ी करते समय मैं यही सोच रहा था कि मुझे फ़िनिशर का काम करना है।"

विशाल दीक्षित ESPNcricinfo अस्सिटेंट एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।