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हार्दिक 2.0 : गेंदबाज़ी में पैनापन और बल्लेबाज़ी में धोनी की झलक

उन्होंने फिर एक बार दिखाया कि परिस्थितियों के हिसाब से अपनी ताक़त का इस्तेमाल कैसे किया जाता है

मोहम्मद रिज़वान के लिए स्क्वेयर के सामने रन बनाना पूरी पारी में काफ़ी कठिन हो रहा था। ऐसे में जब हार्दिक पंड्या ने उन्हें एक शरीर में अंदर आती शॉर्ट गेंद डाली तो उन्हें रैंप शॉट एक बढ़िया विकल्प लगा। फ़र्क़ बस इतना था कि उन्हें हार्दिक की गति का कोई अंदाज़ा नहीं था।
दरअसल यह पहले के पार्ट-टाइम मध्यम तेज़ गेंदबाज़ हार्दिक नहीं हैं। उनके सामने थे एक विशेष तेज़ गेंदबाज़ी करने वाले हार्दिक, जो यथोचित समय पर अपनी पीठ सहित पूरे शरीर का इस्तेमाल करते हुए बल्लेबाज़ों को परेशान करना जानते हैं। वही पीठ जिसके चलते चार साल पहले इसी मैदान पर इसी टूर्नामेंट में इसी विपक्ष के ख़िलाफ़ उन्हें स्ट्रेचर पर मैदान से बाहर ले जाना पड़ा था।
उस सितंबर 2018 की दोपहर में कई सवाल खड़े हुए थे। क्या हार्दिक कभी भी पूरे ज़ोर के साथ फिर गेंदबाज़ी करेंगे? अगर ऐसा नहीं हुआ तो क्या वह विशेषज्ञ बल्लेबाज़ बनकर टीम में जगह बरक़रार रख पाएंगे? और टीम संतुलन का अब क्या होगा?
इस साल फ़रवरी तक हार्दिक की गेंदबाज़ी पर रहस्य का साया बना रहा। उन्होंने इस पर कोई सार्वजनिक बात वैसे भी नहीं की। जब उन्हें आईपीएल की नई टीम गुजरात टाइटंस का कप्तान घोषित किया जा रहा था तो उन्होंने बस इतना ही बताया कि उनकी गेंदबाज़ी "राज़ की बात" रहेगी।
पिछले साल के टी20 विश्व कप में हार्दिक भारतीय एकादश में बतौर बल्लेबाज़ ही खेले और उसके बाद उन्होंने खेल से कुछ दिन ख़ुद को दूर रखा। वह सोशल मीडिया से भी हट गए और एकांत में सही ट्रेनिंग और सही आराम की योजना बनाई। हर डाली गई गेंद, हर खेली गई बॉल, मैदान के हर चक्कर और अभ्यास के दौरान हर आवृति का हिसाब रखा गया।
इस वापसी के दौरान एक समय आया जब हार्दिक को शॉर्ट गेंद खेलने पर चोटिल होने का भय था। दरअसल हार्दिक ने कभी छाती का गार्ड नहीं पहना था क्योंकि उनका मानना था कि इसकी ज़रूरत केवल कमज़ोर बल्लेबाज़ों को लगती है। पूर्व भारतीय विकेटकीपर किरण मोरे ने उन्हें समझाया कि इसे पहनने में कोई शर्म नहीं और ऐसा लगभग सभी महान बल्लेबाज़ करते आ रहे हैं।
हार्दिक का आईपीएल प्रदर्शन इतिहास के पन्नों में याद किया जाएगा। उन्होंने कभी शीर्ष क्रम में बल्लेबाज़ी की, कभी मध्यक्रम में तो कभी फ़िनिशर का रूप धारण किया। उनकी कड़ी मेहनत गेंदबाज़ी में रंग लाई और वह बिना चोटिल होने के डर के अच्छी गति के साथ गेंदबाज़ी करते दिखे।
हार्दिक का यही रूपांतर रिज़वान के सामने निकल आया और उनकी गति के चलते पाकिस्तानी विकेटकीपर इतना झुक चुके थे कि वहां से गेंद छोड़ना संभव नहीं था। गेंद तेज़ी से उनके बल्ले से लगकर थर्ड पर आवेश ख़ान की तरफ़ उड़ गई और आवेश को आगे डाइव लगाकर कैच पकड़ना पड़ा। यह एक क्लासिक तेज़ गेंदबाज़ का विकेट था।
आपको स्पीड गन की ज़रूरत नहीं पड़ती यह जानने के लिए कि इस गेंद की गति काफ़ी तेज़ थी। उन्होंने इफ़्तिख़ार अहमद को हुक शॉट पर गति से छकाकर आउट किया और ख़ुशदिल शाह को भी एक अतिरिक्त गति की गेंद से डीप कवर पर लपकवाया।
ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के आंकड़ों के अनुसार हार्दिक की सारी गेंदें शॉर्ट या गुड लेंथ से थोड़ी शॉर्ट थीं। उन्होंने एक बार भी फ़ुल गेंद नहीं डाली। उनके तीनों विकेट शॉर्ट गेंद पर आए और हर गेंद की गति 140 किमी प्रति घंटे से अधिक थी।
मैच के बाद हार्दिक ने कहा, "गेंदबाज़ी में मेरी योजना काफ़ी सरल थी। मैं मानता हूं आपको परिस्थितियां भांपनी पड़ती हैं और फिर अपने मज़बूत पक्ष के हिसाब से प्लान बनाना पड़ता है। हार्ड लेंथ मारना मेरी ताक़त है लेकिन ज़रूरी है कि मैं इसका ध्यान से उपयोग करूं। मेरी कोशिश रहती है बल्लेबाज़ द्वारा ग़लती करवाना।"
हार्दिक की कारगर गेंदबाज़ी के बावजूद इस मैच को फ़िनिश करने के लिए उनकी बल्लेबाज़ी की भी ज़रूरत पड़ी। भारत एक कठिन सतह पर प्रवाह के साथ बल्लेबाज़ी नहीं कर पाया था और जब आख़िर में पाकिस्तान के एक खिलाड़ी को दंड स्वरूप दायरे के अंदर रखना पड़ा, तब जाकर हार्दिक ने नसीम शाह के ओवर में फ़ील्ड का उपयोग करते हुए तीन बाउंड्री लगाए। यह चेज़ लगभग एम एस धोनी की शैली की थी, जहां हार्दिक को पता था कि गेंदबाज़ भी बल्लेबाज़ों जितना, या शायद उनसे अधिक दबाव में था। तीन गेंदों पर छह रहते उन्होंने एक फ़्लैट छक्के के साथ मैच को ख़त्म किया और बिना अधिक भाव के इस जीत का आनंद लिया।
उन्होंने कहा, "मैंने सालों तक खेलते हुए यह समझा है कि जब मैं शांत और शीतल मन के साथ बल्लेबाज़ी करता हूं तो सबसे बेहतर होता हूं। ऐसे चेज़ में आपको ओवर दर ओवर प्लान बनाना पड़ता है। मेरे लिए यह 15वें ओवर से शुरू हुआ था और मुझे पता था हम शायद थोड़ा पिछड़ गए हैं लेकिन उनके पास एक खिलाड़ी डेब्यू पर है और दूसरा बाएं हाथ का स्पिनर है। अगर आख़िरी ओवर में 15 रन की भी आवशयकता होती तो मुझे विश्वास है हम जीतते। मैं अपने मन को बिलकुल खाली रखने की कोशिस करता हूं। मैं बहुत कुछ नहीं सोचता क्योंकि मेरे पास खोने को कुछ नहीं होता। मुझे पता होता है कि मैं एक छक्का लगा सकता हूं। और ख़ासकर मैं बाएं हाथ के स्पिनर के विरुद्ध काफ़ी आत्मविश्वासी था।"
मैच के बाद कप्तान रोहित शर्मा ने हार्दिक की गेंदबाज़ी की जमकर तारीफ़ की। उन्होंने कहा, "वह काफ़ी शांत रहते हैं मैदान पर लेकिन उनकी ख़ास बात यह है कि वह सटीक योजनाएं बनाए रखते हैं कि उन्हें गेंद या बल्ले से क्या करना है। वह आत्मविश्वास से भरे हैं और उन्हें पता है कि उन्हें कैसी फ़ील्ड चाहिए। और वह अच्छ गति से गेंदबाज़ी करते हैं और यही हमने आज भी देखा। यह गेम की समझ की बात है। हमने बल्ले के साथ भी देखा कि वह एक बड़े दबाव वाली चेज़ में मैदान के बीच कैसे शांत और स्थिर थे। 10 रन प्रति ओवर के सामने आप ग़लतियां कर सकते हैं लेकिन उन्होंने कोई दबाव आने नहीं दिया। उनकी स्थिरता के चलते उन्होंने हमें जीत दिलाई।"

शशांक किशोर ESPNcricinfo के सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के असिस्टेंट एडिटर और स्थानीय भाषा प्रमुख देबायन सेन ने किया है।