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विराट कोहली, दिल से...

एशिया कप से पहले स्टार स्पोर्ट्स के साथ पूर्व भारतीय कप्तान के साक्षात्कार की प्रतिलिपि

इतने बड़े टूर्नामेंट के लिए बबल के ना होने पर
कुछ हद तक सामान्य स्थिति वापस आ गई है। मुझे पता है हालात काफ़ी ख़राब थे और हम सब मैनेज करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि हम (खिलाड़ी) बाहर आम जनता के संघर्ष के साथ अपनी तुलना कर भी नहीं सकते। लेकिन क्रिकेट जगत में भी बबल का जीवन थोड़ा कठिन था और यह अब अच्छा लग रहा है। सबसे पहले तो कमरे में इतने लोग मौजूद हैं और ऊपर से ऐसे बड़े टूर्नामेंट में आते ही बड़ी ऊर्जा का अनुभव होता है। मीडिया के लोगों से बातचीत होती है और आप एक बड़े टूर्नामेंट के लिए तैयार हो जाते हैं।
एशिया कप की यादें
यह व्यक्तिगत तौर पर मेरे लिए एक बहुत ख़ास टूर्नामेंट रहा है। 2010 में मेरे पहले एशिया कप में हमने श्रीलंका को हराकर ख़िताब जीता था। उसके बाद हम 2012 और 2014 में नहीं जीत पाए लेकिन फिर हमने 2016 एशिया कप को भी टी20 प्रारूप में ही जीता था।
एशिया कप हमेशा से विशेष रहा है लेकिन हां (2012 में पाकिस्तान के विरुद्ध) वह 183 का स्कोर मुझे हमेशा याद रहेगा क्योंकि मैं 23 साल का था और मुझे लगा कि मैं इस स्तर पर अच्छा खेल सकता हूं। रविवार का दिन, पाकिस्तान के विरुद्ध एक बड़ा लक्ष्य का पीछा और फिर ऐसी पारी...इससे मैंने काफ़ी आत्मविश्वास का अनुभव किया। मैंने बांग्लादेश में एक ख़राब पिच पर 49 बनाए थे और ऐसी पारियां आपको हमेशा याद रहती हैं।
भारत-पाकिस्तान मुक़ाबलों का दबाव
मैं ऐसा नहीं कहूंगा कि इस मुक़ाबले में बाहर का माहौल और किसी गेम से बहुत अलग नहीं है। आप विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ़्रीका और इंग्लैंड के विरुद्ध बड़े मैच खेलते हैं लेकिन पाकिस्तान से किसी भी टूर्नामेंट में मैच से पहले बाहर का माहौल ऐसा बनता है जिसे आप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। हालांकि जैसा मैं हमेशा कहता हूं कि जब आप मैदान पर उतर जाते हैं तो यह बस एक मैच का दर्जा ले लेता है। तो यह आप पर है कि आप बाहर के माहौल से उत्साह लें और मज़े लें लेकिन केवल मैदान पर उतरने से पहले।
यूएई में खेलने की चुनौती
अच्छी बात है कि हम शाम को खेल रहे हैं और ऐसे में सूरज के ताप से लगभग बच ही जाएंगे। हालांकि हमने हालिया समय में यूएई में अक्तूबर में क्रिकेट खेला है और ज़ाहिर है इस बार अगस्त में अधिक गर्मी होगी। कल अभ्यास के वक़्त थोड़ी हवा भी चल रही थी। कभी-कभी उमस भी रहती है लेकिन हम यहां खेल चुके हैं और परिस्थितियों से वाक़िफ़ हैं।
100 टी20 खेलने का महत्व
मतलब नंबर आप देख लो इन तीनों फ़ॉर्मैट में 100 से ज़्यादा हो गया है लेकिन मेरे लिए इसका अर्थ बहुत अलग है। यह दीर्घकालिक निरंतरता के अलावा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के बदलते मांग के साथ क़दम रखने के संकेत हैं। अपनी गेम को सुदृढ़ करना और सुधारना और उस पर काम करना - यह क्रिकेट ही नहीं आपके जीवन के लिए भी बहुत अहम चीज़ है। आपको अपना मोल पता चलता है। मैंने हाल ही में कहा था कि आंकड़ें नहीं बल्कि पर्दे के पीछे चल रही मेहनत मायने रखती है। आप बैठे हैं तो आपको पता होता है कि आप क्या सोच रहे हैं और आप के लिए चुनौतियां क्या है। आप उनसे कैसे उभर सकते हैं। जब आपको समझ आता है कि 'हां मैं कर सकता हूं' तब आपको लगता है कि आप क्रिकेट खेलने ही नहीं बल्कि जीवन के इस बेहतरीन मौक़े का सदुपयोग कर रहे हैं। इससे आपको संतुष्टि से ज़्यादा कृतज्ञता होती है कि आप अपने जीवन के साथ कुछ सकारात्मक कर रहे हैं।
हालिया ब्रेक पर
यह ब्रेक बहुत अलग था क्योंकि 10 साल में पहली बार मैंने एक महीना बैट छूआ भी नहीं। जब मैंने सोचा कि मैंने एक महीना बैट छूआ भी नहीं तब मुझे एहसास हुआ कि मैं हाल ही में अपनी तीव्रता का नाटक कर रहा था। प्रतिस्पर्धी होना और ख़ुद को आश्वस्त करना कि आपके पास तीव्रता है लेकिन उसी समय आपका शरीर आपको रुकने के लिए कह रहा है। दिमाग़ कह रहा है कि 'तुम एक ब्रेक लो और रुको'। ऐसे में मुझे समझ आया कि रवि भाई (पूर्व कोच रवि शास्त्री) कैसे मेरे साथ कार्यभार और क्रिकेट के मूल्य के बारे में बात करते थे, कि कैसे मैंने पिछले 10 सालों में किसी से भी 40 या 50 प्रतिशत अधिक क्रिकेट खेला था। ऐसे में आप इसे यह कहकर नज़रअंदाज़ कर सकते हैं कि आप फ़िट हैं और ख़ुद पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
मुझे एक ऐसे शख़्स के रूप में देखा गया है जो मानसिक रूप से ख़ूब मज़बूत है। और मैं हूं, लेकिन हर किसी की एक सीमा होती है और आपको उस सीमा को पहचानने की आवश्यकता होती है नहीं तो चीज़ें आपके लिए ख़राब हो सकती हैं। इसलिए इस अवधि ने मुझे बहुत सी चीज़ें सिखाईं जिन्हें मैं उभरने नहीं दे रहा था। अब मैंने उन्हें स्वीकार कर लिया है। यार, जीवन में आपके काम के अलावा और भी बहुत कुछ है। या जब आपके आसपास का माहौल ऐसा हो कि हर कोई केवल आपके काम की पहचान को देखता है, तो कहीं न कहीं आप एक इंसान के रूप में अपना नज़रिया खोने लगते हैं। वह चीज़ मुझे इस बार समझ आई कि मैं बतौर एक इंसान कौन हूं। इस चीज़ का मुझे एहसास हुआ कि सबका प्यार और समर्थन पाना एक अच्छी बात है लेकिन केवल यह मेरे इंसानियत का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। मैं शुक्रगुज़ार हूं कि मुझे इतना प्यार और समर्थन मिलता है लेकिन आपको हमेशा पता होना चाहिए की आपको चाहिए क्या। आपको 'ना' बोलना आना चाहिए और आपमें किसी भी नकारात्मक सोच से दूर चले जाने कि क्षमता होनी चाहिए।
मैंने हमेशा अपने दिल की बात मानी है। मुझे थोड़ा अभद्र और अपरिपक्व माना जाता था लेकिन मैंने कभी कोई बनावट की कोशिश नहीं की थी। सिर्फ़ इन हालिया दिनों में मैंने कोई और बनने की कोशिश की थी लेकिन इस अवधि ने मुझे लोगों की मांग और अपेक्षा से दूर अपनी अंतरात्मा के साथ थोड़ा समय बिताने का मौक़ा दिया है। बीच में मुझे अभ्यास करने का उत्साह नहीं मिल रहा था। मैं महसूस कर रहा था कि मैं ट्रेनिंग के लिए उत्साहित नहीं हूं, मैं प्रैक्टिस के लिए उत्साहित नहीं था और इसने मुझे काफ़ी परेशान किया क्योंकि मैं ऐसा नहीं हूं, और मुझे सचमुच उस माहौल से दूर जाने की आवश्यकता है। जब आप ऐसे माहौल में रहते हैं, तो आप कुछ भी नहीं देख पाते हैं। जब आप ख़ुद को वहां से निकालते हैं, तब आपको एहसास होता है कि आपके साथ क्या हो रहा था। और यह एक अद्भुत ब्रेक रहा है। मैंने कभी इतना लंबा ब्रेक नहीं लिया था, और सबसे पहले मुझे एहसास हुआ कि मैं सुबह उठा और जिम जाने के लिए उत्साहित था। जो 'ओह, मुझे यह करना पड़ेगा' जैसी कोई सोच नहीं है। इस तरह से वह मेरा पहला मार्क था।
यह मेरे लिए सामान्य आदत है और सबको समझना चाहिए कि आपको इस निष्कर्ष पर आने के लिए ख़ुद को थोड़ा समय देना चाहिए। आज कल आप बहुत सारी अपेक्षाओं को लेकर बहक सकते हैं.… आपने बेन स्टोक्स और ट्रेंट बोल्ट के साथ जो हुआ उसका परिणाम देखा है… मोईन [अली] ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया। ये विषमता नहीं हैं, लेकिन ऐसा होता है और जो लोग उनके संपर्क में हैं, वे जानते हैं कि उनके जीवन में क्या हो रहा है।
ब्रेक के बाद तीव्रता को फिर से हासिल करना
मैं अब काफ़ी हल्का महसूस कर रहा हूं और यह सारी चीज़ें केवल क्रिकेट के कार्यभार से संबंधित नहीं थीं। बाहर काफ़ी कुछ हो रहा था जिसका असर था। बहुत सारी चीज़ें सीखने को मिलती हैं जब आप बाहर से इसे एक अलग नज़रिए से देखते हैं। आप जूनून के साथ और दिल से खेल रहे हो लेकिन बाहर लोगों को इसके मोल का कोई ज्ञान नहीं। जब लोग आपको उस नज़रिए से नहीं देखते तो आपको एक वास्तविकता का ज्ञान होता है कि जैसे आप ख़ुद को देखते हैं वैसा असल में नहीं है। तीव्रता के बारे में मुझे यह लगा नहीं कि मैं उसे कहीं भी बनावटी रख रहा हूं। मैं ख़ुद को स्पर्धा करने की मनोवृत्ति की ओर धकेल रहा था।
मैं ऐसा व्यक्ति हूं जो सुबह जागकर देखना चाहता है कि इस दिन में वह क्या कर सकता है और मैं हर चीज़ में ख़ुद को पूरी तरह से झोंक देने की सोचता हूं। लोग मुझसे क्रिकेट के मैदान पर अधिक तीव्रता की बात जब पूछते हैं तो मैं यही कहता हूं कि मुझे क्रिकेट खेलना पसंद है और मुझे इस तथ्य से प्यार है कि मेरे पास हर गेंद पर योगदान देने के लिए बहुत कुछ है, और मैं मैदान पर अपनी पूरी ऊर्जा लगा दूंगा और मेरे लिए यह कभी भी असामान्य नहीं होगा। बाहर के बहुत से लोगों ने और यहां तक की टीम के अंदर भी लोगों ने मुझसे पूछा कि आप इसे कैसे बनाए रखते हैं? और मैं सिर्फ़ इतना कहता हूं: मैं किसी भी क़ीमत पर अपनी टीम को जीत दिलाना चाहता हूं।
बाबर निरंतरता के साथ रन बनाते हैं। उन्हें खेलते हुए देख कर बहुत मज़ा आता है। वह अच्छा खेल रहें हैं और धीरे-धीरे अपनी छाप छोड़ रहे हैं लेकिन मेरे प्रति उनके व्यवहार में कभी कोई परिवर्तन नहीं आया है। यह बताता है कि जीवन और क्रिकेट दोनों में उनकी परवरिश कितनी अच्छी रही है।
विराट कोहली
"यह स्वाभाविक रूप से नहीं हो रहा था। मुझे ख़ुद को ज़ोर देना पड़ रहा था। मुझे यह नहीं पता था ... मैं इस तरह का आदर्श खिलाड़ी बन गया। मैं इस तथ्य के लिए बहुत आभारी हूं कि इतने सारे लोग मेरी वजह से प्रेरित होते हैं लेकिन आप उसकी वजह से इंसान होने से नहीं रोक सकते। मैं समझता हूं कि लोग आपसे प्यार और आपका समर्थन क्यों करते हैं, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आप हमेशा आप ही थे, और इन पलों में भी मुझे यह स्वीकार करने में कोई शर्म नहीं है कि मैं मानसिक रूप से उदास महसूस कर रहा था और यह महसूस करना एक बहुत ही सामान्य बात है। मैं दिन के अंत में एक आम इंसान ही हूं और लोगों के कहने के लिए यह एक बात या समय होनी चाहिए, 'अगर वह इसको अनुभव कर सकता है, तो आराम करे इस तरह महसूस करना सामान्य है'। यह असामान्य नहीं है, इसके बारे में लोगों से बात करें और उनके साथ चर्चा करें। कोई नहीं सोचेगा कि आप कमज़ोर हैं… आपको उन लोगों से मदद मिलेगी जिनकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी, लेकिन हम बोलते नहीं हैं क्योंकि हम झिझकते हैं। हम मानसिक रूप से कमज़ोर नहीं दिखना चाहते। मेरा विश्वास कीजिए, मज़बूत होने का दिखावा उससे कहीं ज़्यादा बुरा है। मुझे कोई शर्म नहीं है कि मैं मानसिक रूप से कमज़ोर महसूस कर रहा था।"
एक नए शैली की टी20 खेलने के बारे में
देखिए आक्रामक टी20 क्रिकेट खेलना हमेशा से ही हमारा लक्ष्य रहा है। आप बड़े स्कोर खड़े करने या बड़े चेज़ को अंजाम देना इस नीयत के बिना कर ही नहीं सकते। लेकिन बड़े टूर्नामेंट में शायद आपके पास यह चेतना और क्रिकेट कौशल होना चाहिए कि आप एक शैली से क्रिकेट खेलना चाहें। इसमें कभी-कभी आपकी टीम को परेशानी भी मिल सकती है लेकिन यह बहुत ज़रूरी है कि आपकी टीम में ऐसे खिलाड़ी हों जो ऐसे में टीम की नैय्या पार लगा सकें। मेरे व्यक्तिगत अनुभव से मैं इतना ही कह सकता हूं कि एशिया कप या किसी बड़े टूर्नामेंट में आपको परिस्थिति के हिसाब से खेलना आना चाहिए। जो खिलाड़ी अपने हुनर और मन पर नियंत्रण रखेगा उसी की टीम जीतेगी लेकिन खेल के बुनियाद बदलते नहीं हैं। दबाव में आपकी तकनीक, आपका कौशल, आपकी क्रिकेट की समझ और आपकी कठिनाइयों को समझने और उनसे पार पाने की क्षमता ही रंग लाती है।
बाबर आज़म पर कोहली की राय
मैंने पहली बार उनसे 2019 विश्व कप मैच के बाद मैनचेस्टर में बात की थी। तब वह और इमाद (वसीम, पाकिस्तानी स्पिनर) साथ थे। इमाद को मैं अंडर-19 के समय से जानता हूं और उन्होंने मुझे बताया कि बाबर मुझसे बात करना चाहते हैं। हमने बैठकर गेम के बारे में बात की। मैंने उस दिन उनकी आंखों में मेरे प्रति सम्मान और आदर देखा और इसमें आज तक कोई बदलाव नहीं आया है। बावजूद इसके कि आज वह हर प्रारूप में शायद पूरी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ हैं। वह इतनी निरंतरता के साथ रन बनाते हैं और उन्हें खेलते देखने में बड़ा मज़ा आता है। वह अच्छा खेल रहें हैं और धीरे-धीरे अपनी छाप छोड़ रहे हैं लेकिन मेरे प्रति उनके व्यवहार में कभी कोई परिवर्तन नहीं आया है। यह बताता है कि जीवन और क्रिकेट दोनों में उनकी परवरिश कितनी अच्छी रही है।
ऐसे खिलाड़ी और ऐसे व्यक्तित्व हमेशा क़ामयाब होते हैं और कई औरों के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं और ऐसा मैं उनके साथ भी होते देखता हूं। मैंने उन्हें उनके सफलता पर बधाई दी और मैं चाहता हूं कि वह और उन्नति देखें। वह हर सफलता के हक़दार हैं और वास्तव में विश्व क्रिकेट को रोमांचक बनाए रखने के लिए ऐसे खिलाड़ियों की सख़्त ज़रूरत है।
हम बस इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि यह दोनों टूर्नामेंट हमें जीतने हैं। आप अपना समर्थन बनाए रखिए। केवल घर से ही नहीं बल्कि स्टेडियम में आकर हमारा हौसला बढ़ाइए ताकि हम आपको गौरवान्वित कर सकें।
विराट कोहली
राष्ट्रगान सुनने का अनुभव
मेरे लिए हमेशा जब राष्ट्रगान गाया गया है, ख़ासकर जब बड़े टूर्नामेंट में मैंने इसका पहली बार अनुभव किया था, तो एक जगह पर इतनी एकता और ऊर्जा मैंने और कहीं महसूस नहीं किया है। इस पूरे अनुभव की जो ताक़त है वह अद्वितीय है और आपके रौंगटे खड़े कर देता है। सब मिलकर गाते हैं और सब का एक ही लक्ष्य होता है कि वह भारत को जीत दिलाएं। आपके मन में और कुछ नहीं चलता और आप अगर इस लम्हे में ख़ुद को समा सकते हैं तो आपको दर्शकों की ऊर्जा का भी एहसास हो जाता है। मेरे लिए कुछ यादगार अनुभव रहे हैं जैसे 2016 में ईडन गार्डन्स में या ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मोहाली में। मुझे राष्ट्रगान गाने के कई अवसर मिले हैं लेकिन कुछ अनुभव इतने यादगार हैं कि कभी भुलाए नहीं जा सकते।
समर्थकों के लिए संदेश
हमारे लिए दो बहुत बड़े टूर्नामेंट आ रहे हैं और मैं व्यक्तिगत तौर पर इतना ही कहूंगा कि आपको हमारे टीम में प्रतिभा के बारे में पता है। आप सब विश्वास रखते हैं कि हम कुछ ख़ास कर गुज़र सकते हैं। हम बस इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि यह दोनों टूर्नामेंट हमें जीतने हैं। आप अपना समर्थन बनाए रखिए। केवल घर से ही नहीं बल्कि स्टेडियम में आकर हमारा हौसला बढ़ाइए ताकि हम आपको गौरवान्वित कर सकें।