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ग्रीन पार्क टू ग्रीन पार्क : लाल गेंद के खिलाड़ी श्रेयस अय्यर का सफ़र

2014 में एक नवागंतुक से लेकर 2021 में एक अनुभवी खिलाड़ी तक, कानपुर में उनकी वापसी उनके करियर का एक चक्र पूरा करेगी

2014 में इसी मैदान पर श्रेयस अय्यर ने यूपी के खिलाफ खेली थी शानदार पारी  •  BCCI

2014 में इसी मैदान पर श्रेयस अय्यर ने यूपी के खिलाफ खेली थी शानदार पारी  •  BCCI

"साले कुछ कर, पिछले दो मैच में बाहर बैठ कर दूसरों के लिए ताली मार रहा है। वहां जाकर खेल और लोग तेरे लिए ताली बजाएंगे।"
प्रवीण आमरे को अपने दिमाग में पता था कि वह श्रेयस अय्यर के अंदर का जुनून बाहर निकालने के लिए ऐसा कर रहे थे। श्रेयस को वह 12 साल की उम्र से जानते थे। वह मानते हैं कि दिसंबर 2014 में कानपुर में रणजी ट्रॉफी उनके लिए मेक-या-ब्रेक वाला मैच था।
पहले दो मैचों में श्रेयस असफल रहे और उस समय मुंबई के कोच आमरे को विरोध का सामना भी करना पड़ा लेकिन आमरे ने श्रेयस का साथ नहीं छोड़ा। तब मुंबई का अभियान अधर में था। मुंबई को पहली बार जम्मू एंड कश्मीर से हार का सामना करना पड़ा तो रेलवे ने पहली पारी में बढ़त हासिल करके अंक हासिल किए। आमरे की नौकरी और श्रेयस का स्थान दोनों मुश्किलों में थे, लेकिन चार दिन बाद 19 साल के श्रेयस ने ना सिर्फ़ लाल गेंद के क्रिकेटर के रूप में ख़ुद को स्थापित किया, बल्कि आमरे की नौकरी भी बचा ली। तब कानपुर में ही मुंबई का यह नया बल्लेबाज़ी स्टार उभरा था।
सात साल बाद, श्रेयस अपने उसी सफलता के दृश्य को उसी स्थान पर संजो रहे हैं। ग्रीन पार्क में उन्होंने उत्तर प्रदेश के आक्रमण के सामने ख़ुद को साबित किया, जहां पर प्रवीण कुमार और अंकित राजपूत जैसे गेंदबाज़ थे। अब गुरुवार को श्रेयस भारत के 303वें पुरुष टेस्ट क्रिकेटर बने। यह कैप उन्हें 54 प्रथम श्रेणी मैचों में 52.18 के औसत से 4592 रन बनाने के बाद नसीब हुई।
आमरे ने कहा, "वह इसका हक़दार है।"
उनकी उस पारी की परिस्थितियां उल्लेख के लायक भी हैं। सियाली पिच पर मुंबई ने उत्तर प्रदेश के पहली पारी में 206 रनों के जवाब में 53 रनों पर पांच विकेट गंवा दिए थे। विकेट लगातार गिरते जा रहे थे और श्रेयस अपने ड्रेसिंग रूम के गरमाए माहौल को महसूस कर रहे थे। वह अपनी किट भी होटल रूम में भूल गए थे। आमरे ने गुस्से में आकर देखा और श्रेयस जल्दी से शार्दुल ठाकुर के गियर लगाकर बल्लेबाज़ी के लिए निकल पड़े।
उस पारी के बाद श्रेयस ने कहा था, "प्रवीण सर दुखी थे। मेरे दिमाग में भी चीज़ें चल रही थी। मुझे पता था कि अगर मैं वहां रन नहीं बनाता, तो मुझ पर हर तरफ से बमबारी होती।"
वह अंदर पहुंचे और अपनी तीसरी गेंद पर छक्का लगा दिया। क्रीज़ से दो कदम बाहर खड़े होकर उन्होंने प्रवीण कुमार की चौथी गेंद पर मिडविकेट की ओर उठाकर मार दिया और अगली गेंद पर एक शानदार एक्स्ट्रा कवर की ओर खूबसूरत ड्राइव लगाई। इससे पहले कि उत्तर प्रदेश के गेंदबाज़ कोई प्रतिक्रिया देते, मुंबई एक बार फिर मार्च पर थी।
श्रेयस की पहली 10 गेंद में छह बाउंड्री आ चुकी थी। श्रेयस जब वापस लौटे तब तक उत्तर प्रदेश के ख़िलाफ़ वह धमाकेदार 75 रनों की पारी खेल चुके थे। मुंबई ने बढ़त बनाई और अधर में लटके अपने रणजी अभियान को एक स्टाइल में बदल दिया। श्रेयस ने उस सीज़न में 809 रन बनाए थे। अगले सीज़न में उन्होंने 1321 रन खड़े किए और एक रणजी सीज़न में सबसे ज़्यादा रन बनाने के वीवीएस लक्ष्मण के रिकॉर्ड से 95 रन दूर रह गए। मुंबई ने यह 2015-16 सीज़न अपने नाम भी किया। आमरे ने याद करते हुए कहा, "यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यह आश्चर्यजनक है कि वह अब उसी स्थान पर डेब्यू कर रहा है जहां उसने पहली बार अपनी छाप छोड़ी थी।"
भारतीय टेस्ट टीम के साथ श्रेयस का यह पहला अनुभव नहीं है। मार्च 2017 में, उन्हें धर्मशाला में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ चौथे और अंतिम टेस्ट के लिए विराट कोहली के प्रतिस्थापन के रूप में बुलाया गया था। वह केवल टेस्ट से पहले की शाम टीम में शामिल हुए, लेकिन उन्हें सप्ताह भर टीम के साथ बिताकर सीरीज़ जीत का अनुभव लेने का मौक़ा मिला।
यह कॉल-अप कुछ हफ़्ते पहले एक वार्म-अप गेम में उनके एक दमदार प्रदर्शन का परिणाम था। इस मैच को प्रथम श्रेणी दर्जा प्राप्त था। श्रेयस को मेहमान टीम से स्लेजिंग मिली, लेकिन उन्होंने अपने खेल से इसका जवाब दिया।
डेविड वार्नर ने स्ट्राइक लेने पहुंचे श्रेयस को स्लेज करते हुए कहा था, "हमें दिखाओ कि तुम्हारे पास क्या है, मुझे तुम्हारे खेल में कुछ भी नहीं दिखता।" उन्होंने पहली ही गेंद का सामना करते हुए नेथन लायन को छक्का लगाकर जवाब दिया। श्रेयस उस समय अपना सर्वोच्च प्रथम श्रेणी स्कोर 202* बनाने जा रहे थे।
श्रेयस के खेल में जो निडरता है, वह उनके अपार आत्मविश्वास से आई है। और यह अद्वितीय है क्योंकि उनके उभरने के समय, मुंबई के खिलाड़ियों ने "खडूस" मानसिकता की कसम खाई थी। श्रेयस अलग थे। वह न केवल इससे दूर हो गए, बल्कि ताज़गी से बोले कि कैसे खाडूस उनकी शैली नहीं थी।
वह अपने खेल को आगे ले जाना चाहते थे और गिरना नहीं चाहते थे। यह उनके उस सहज ज्ञान के बारे में है, जहां वह आधे उपाय के बारे में नहीं सोचते। यह शायद 54 प्रथम श्रेणी मैचों में 82 के उनके अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट में दिखता भी है। 2015-16 में रणजी ट्रॉफ़ी फ़ाइनल में श्रेयस ने 82 के स्ट्राइक रेट से 117 रन की मैच जिताऊ पारी खेली थी।
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 2017 में उनका वह दोहरा शतक मात्र 210 गेंद में आया था। इसी साल उन्होंने विजयवाड़ा में दो अनाधिकृत टेस्ट में न्यूज़ीलैंड ए के ख़िलाफ़ 108 और 82 रनों की पारी खेली थी, जिसमें मैट हेनरी, लॉकी फ़ग्र्युसन और ईश सोढ़ी जैसे गेंदबाज़ थे।
प्रतिभा के लिए पैनी नज़र रखने वाले आमरे ने श्रेयस को मुख्य कोच के रूप में एक लाख निर्देश दिए। सिर्फ़ ​इसीलिए कि वह इसके उलट ख़ुद को साबित करके दिखाएं। श्रेयस की आंखों में निडरता और शांत आश्वासन ने ही आमरे को उनकी ही शैली में सुधार करने देने के लिए आश्वस्त किया।
आमरे ने कहा, "उसकी अपनी ही स्टाइल है, मैंने कई बार उसकी आलोचना की [अपनी स्टाइल को बदलो], कई बार मुंबई के बल्लेबाज़ केवल खडूस ही नहीं होते, वह कॉपी बुक भी होते हैं। वह उस तरह का लड़का था जो जाते ही पहली बॉल को ऑन साइड पर मारता था, कई एक्सपर्ट इसको पसंद नहीं करते थे। मुंबई क्रिकेट इस पर आधारित है कि आप क्रीज़ पर समय बितओ, जम जाओ, लेकिन वह पहली ही गेंद से हावी होना चाहता था। मैंने भी उसको प्रमोट किया, क्योंकि यह उसकी अपनी स्टाइल थी और मैं नहीं चाहता था कि वह अपनी इस स्टाइल को खो दे।"
"उन्होंने नंबर 6-7 से शुरुआत की, मैंने उन्हें चुनौती दी कि उन्हें नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करनी होगी। और फिर मैं [कोच के रूप में] विकल्प तलाश रहा था, उन्होंने आकर कहा कि वह नंबर तीन पर खेलने को तैयार हैं। यह था उनका आत्मविश्वास जो उनकी क्षमता के बारे में बताता है।"
चार साल पहले, जब वह एक पदार्पण करने से चूक गए, तो आमरे से श्रेयस ने अपना दुख जताया था।
उन्होंने कहा, "वह खेल का एक अच्छा स्टूडेंट है, वह जानता है कि वह किस प्रतियोगिता का सामना कर रहा है। चार-पांच साल पहले उन्होंने कहा था कि अगर मैं किसी अन्य देश के लिए खेलता, तो मैं टेस्ट खेलता। मैंने उनसे कहा, यह आसान नहीं है, आप इसके लायक हैं कि आपको अपनी टेस्ट कैप का इंतज़ार करना पड़ रहा है। वह आम तौर पर मुखर है लेकिन अपने वरिष्ठों का सम्मान करता है लेकिन अपने खेल को जानता है और अपनी प्रवृत्ति का समर्थन करता है। वह दिखावा नहीं करेगा, वह एक आत्मविश्वासी व्यक्ति है जो चुनौतियों का सामना करना पसंद करता है।"
"जब आप टी20, वनडे और चार दिवसीय खेल रहे होते हैं तो श्रेयस के लिए चुनौती जल्दी से खुद को अनुकूल करने की थी। और वह बहुत खुले दिमाग का और सीखने वाला था। उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा था, उन्होंने सुना जो परिवर्तन करने के लिए मैंने उनसे कहा। इस सीज़न उनकी कंधे की सर्ज़री अहम थी। वह इन महीनों में ख़ुद को तरोताज़ा कर सके।"
आमरे कहते हैं, "भारत के साथ हमारे मध्य क्रम को देखते हुए कोई भी क्रिकेटर चिंतित है। एक कोच के रूप में चुनौती उस बेंचमार्क पर लौटने की थी जिसे हमने उनकी चोट से पहले सेट किया था, और हमें इसके लिए अपना रास्ता बनाना था। घर पर बैठना, यह वास्तव में उनके लिए निराशाजनक था, उन्हें घर के अंदर बैठना पसंद नहीं था। इसलिए उन दो महीनों में वह गंभीर थे। वह अपने रिहैब के बाद तैयार थे, हमने धीरे-धीरे उनको तैयार किया।" उनके लाल गेंद के खेल के कौन से पहलू हैं जिनमें मुंबई के लिए शुरुआत करने के बाद सुधार हुआ है?
आमरे ने कहा, "बाउंड्री लगाने की उनकी आदत, खेल को आगे बढ़ाने की उनकी क्षमता, एक सत्र में सौ रन हासिल करना, खेल को विरोधियों से दूर ले जा सकता है। वह सिर्फ़ क्रीज़ पर कब्जा करने पर नहीं बल्कि खेल को आगे बढ़ाने के बारे में सोचता है।"
जब श्रेयस ग्रीन पार्क में बल्लेबाज़ी करने उतरेंगे, तो यह मान लेना सही है उनके लिए हजारों लोग ताली बजाएंगे। 2014 में एक नवागंतुक से लेकर 2021 में एक अनुभवी खिलाड़ी तक, कानपुर में उनकी वापसी भी उनके करियर का एक चक्र पूरा करेगी।

शशांक किशोर ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।