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आईपीएल में रमने लगे हैं शाहबाज़ अहमद

बल्ले से वह निचले मध्य क्रम में लगातार रन बना रहे हैं, गेंदबाज़ी में भी उन्होंने किया है सुधार

शाहबाज़ को टीम में पांचवें गेंदबाज़ की भूमिका मिली है  •  BCCI

शाहबाज़ को टीम में पांचवें गेंदबाज़ की भूमिका मिली है  •  BCCI

बीज गणित और गणना ने बंगाल और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के हरफ़नमौला शाहबाज़ अहमद को किसी विरोधी टीम के गेंदबाज़ या बल्लेबाज़ से ज़्यादा परेशान किया है।
2011 में शाहबाज़ के पिता ने उन्हें सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री में दाखिला दिलाया, लेकिन पिछले साल तक वह पहले सेमेस्टर से एक विषय गणित में 101 से आगे नहीं बढ़ पाए। यह पिछले सीज़न की बात है, जब वह बेंगलुरु के लिए आईपीएल में खेल रहे थे। उन्होंने इसके लिए ऑनलाइन परीक्षा दी और पास हुए। शाहबाज़ कहते हैं, "तो आप कह सकते हैं कि मैंने अपनी इंजीनियरिंग पूरी कर ली है।"
इसके अलावा, वह अपने क्रिकेट कौशल को भी निखारने में बहुत मेहनत कर रहे हैं, जिसका नतीज़ा भी उनके हक़ में ही जा रहा है।
फ़रवरी में उन्हें बेंगलुरु ने नीलामी में दोबारा ख़रीद लिया था। इस सीज़न आईपीएल में उन्होंने अपनी पहली पांच पारियों में सभी में 25 से ज़्यादा रन बनाए। यह रन नंबर पांच और छह पर आने वाले बल्लेबाज़ के लिए मायने रखते हैं। वह अपनी बायें हाथ की स्पिन में सफल नहीं हो पाए, लेकिन उन्होंने कुछ अच्छे स्पेल बेशक़ निकाले।
शाहबाज़ का मज़बूत पक्ष बल्लेबाज़ी रहा है, लेकिन 2020 में उनके बेंगलुरु के साथ पहले सीज़न में वह केवल दो मैच खेल पाए और केवल एक ही गेंद का सामना किया। इससे अगले साल उन्हें अधिक मौक़े मिले लेकिन वह सात पारियों में 8.42 के औसत और 111.32 के स्ट्राइक रेट से केवल 59 रन ही बना सके।
जब बल्ले से वह रन नहीं बना पाए तो उन्होंने ख़ुद के अंदर की कमी को पहचाना। शाहबाज़ ने कहा, "मैंने महसूस किया कि मैं तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहा था। जब भी मैं बड़े शॉट लगाने की कोशिश करता तो मैं ओपन स्टांस पोज़ीशन में आ जाता था। तब सिमन कैटिच [तब बेंगलुरु के प्रमुख कोच] और माइक हेसन [फ़्रैंचाइज़ी के डायरेक्टर ऑफ़ क्रिकेट] सर ने मुझे बताया कि अगर मैं अपनी शेप बनाए रखता हूं तो मैं किसी भी परिस्थिति में रन बना सकता हूं। इस बार मैंने यही समझने की कोशिश की और काम किया।"
बेंगलुरु में उनके पास टी20 के दो बड़े बल्लेबाज़ों के दिमाग़ पढ़ने का भी मौक़ा रहा है। शाहबाज़ कहते हैं, "एबी डिविलियर्स और ग्लेन मैक्सवेल सर तकनीक पर ज़्यादा बात नहीं करते हैं। जब भी मैंने उनसे बात की, तो यह प्लानिंग, परिस्थिति और बात की कि कैसे अलग परिस्थतियों में प्लान किया जाए तेज़ गेंदबाज़ों और स्पिनरों पर बाउंड्री लगाने के अच्छे विकल्प क्या हो सकते हैं या कैसे विभिन्न परिस्थतियों में स्कोरबोर्ड को चलाए रखा जाए और वहां से ऐसा प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया जा सके जिससे मैच जीता जाए।"
इस सीज़न उन्होंने एक के बाद एक अहम पारियां खेली हैं और उनका स्ट्राइक रेट भी पिछले सीज़न (125.00) के मुक़ाबले इस बार (143.01) बेहतर हो गया है।
पहले मैच में, कोलकाता नाइट राइडर्स के ख़िलाफ़, वह जब मैदान पर आए तो स्कोर चार विकेट पर 62 रन था और उन्होंने 20 गेंद में 27 रन बनाए जिससे उनकी टीम 129 का लक्ष्य हासिल कर पाई। राजस्थान रॉयल्स के ख़िलाफ़ वह इसी स्कोर के क़रीब मैदान पर आए और इस बार बेंगलुरु 170 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही थी। उन्होंने 26 गेंद में 45 रन बनाए, जबकि उनके साथ खेल रहे दिनेश कार्तिक ने 23 गेंद में नाबाद 44 रन बनाए और अपनी टीम को जीत दिलाई।
पहले बल्लेबाज़ी करते हुए दिल्ली कैपिटल्स के ख़िलाफ़, बेंगलुरु का स्कोर 75 रन पर चार विकेट था और जल्द ही यह 92 रनों पर पांच विकेट हो गया। शाहबाज़ और कार्तिक ने इसके बाद छठे विकेट के लिए नाबाद 97 रनों की साझेदारी की और बेंगलुरु को विजयी स्कोर तक पहुंचाया।
शाहबाज़ ने कहा, "मुझे डीके [कार्तिक] भाई के साथ बल्लेबाज़ी करके मज़ा आता है। वह दबाव भरी परिस्थिति में भी ठंडे और शांत रहते हैं। "वह बस कहते हैं हमें मैच को डीप में ले जाना है। अगर मैं कोई ग़लत शॉट खेलता हूं तो वह कहते हैं कि इस समय ऐसे शॉट की ज़रूरत नहीं है। अगर कोई ख़राब गेंद मिले तभी मुझे मारना चाहिए। अन्यथा, मुझे सिंगल लेने चाहिए या अगर डॉट बॉल भी हो जाती है, तो भी चलेगा। उनके साथ कभी दबाव महसूस नहीं होता क्योंकि वह एक ही ओवर में मूमेंटम को बदल सकते हैं।"
शाहबाज़ ने राजस्थान रॉयल्स वाले मैच को याद दिलाया, जब युज़वेंद्र चहल और आर अश्विन टर्न ले रही पिच पर बल्लेबाज़ों की परीक्षा ले रहे थे। "मैं नहीं समझ पा रहा था कि कैसे गेम को डीप ले जाया जाए। अश्विन का एक ओवर बचा था, मैं उनको आराम से खेलना चाहता था क्योंकि तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ रन बनाने आसान थे, लेकिन डीके भाई आए और अश्विन पर आक्रमण किया। उस एक ओवर में मैच पूरी तरह से बदल गया।"
42 गेंद में 82 रन की ज़रूरत थी और कार्तिक ने तीन चौके और एक छक्का लगाकर अश्विन के ओवर में 21 रन निकाले। यह शाहबाज़ के लिए एक और क्रिकेट की सीख थी।
जब वह 2021 आईपीएल में बल्लेबाज़ी से जूझ रहे थे तो यह उनकी गेंदबाज़ी थी, जिसने उन्हें बेंगलुरु में बनाए रखा। उन्होंने सात विकेट लिए, जिसमें सनराइज़र्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ सात रन देकर तीन विकेट भी शामिल था।
इस साल उन्हें मैक्सवेल के साथ पांचवें गेंदबाज़ की ज़िम्मेदारी दी गई है। इस बार वह महंगे साबित हुए, लेकिन उन्होंने लखनऊ सुपर जायंट्स के ख़िलाफ़ 4-0-25-0 का भी स्पेल किया। गुजरात टाइटंस के ख़िलाफ़ उन्होंने शुभमन गिल और हार्दिक पंड्या को आउट करके टीम की मैच में वापसी कराई और पिछले ही मैच में चेन्नई सुपर किंग्स के ख़िलाफ़ उन्होंने ऋतुराज गायकवाड़ को आउट करके ओपनिंग साझेदारी तोड़ी।
शाहबाज़ ने इसका श्रेय बेंगलुरु के बल्लेबाज़ी और स्पिन गेंदबाज़ी कोचएस श्रीराम को दिया, जिन्होंने उन्हें आत्मविश्वास दिलाया। शाहबाज़ ने कहा, "जब मैं पहली बार आईपीएल में आया तो मुझे अपने गेंदबाज़ी कौशल पर थोड़ा संदेह था कि क्या यह इस स्तर के लिए काफ़ी है, लेकिन पिछले दो सीज़न से मैंने एस श्रीराम से बहुत कुछ सीखा है कि कैसे प्रत्येक बल्लेबाज़ को गेंद करनी है और उन्हें आउट करना है। वह मेरी गेंदबाज़ी के बारे में अच्छे से जानते हैं।"
शाहबाज़ ने कहा कि सबसे बड़ा सुधार उनके रिदम में हुआ है, जिसमें वह अक्सर जूझा करते थे। श्रीराम ने उन्हें रन अप तेज़ करने की सलाह दी, जिससे उन्हें रिदम मिली और बाक़ी फ़ायदे भी हुए।
"पहले मेरी गेंदबाज़ी गति बहुत धीमी थी। अगर आप आईपीएल में इस गति से गेंद करोगे तो बल्लेबाज़ आप पर हमेशा आक्रमण करेगा। तो मेरी सबसे बड़ी चिंता यही थी कि कैसे मैं अपनी गति को 4 से 5 किमी प्रति घंटा बढ़ा सकता हूं। जैसे ही मैंने अपने रिदम पर काम करना शुरू किया, मेरी गति भी बढ़ गई।
"अब मैं अपनी साधारण गेंद के लिए 94-95 किमी प्रति घंटा का लक्ष्य रखा हूं और मेरी धीमी गति की गेंद करीब 88-89 किमी प्रति घंटा। अगर मैं 95 किमी प्रति घंटा बरक़रार रख पाता हूं तो यह इन परिस्थतियों में मुझे बहुत फ़ायदा पहुंचाएगी। नहीं तो मुंबई के ​इन पाटा विकेट पर​ स्पिनरों के लिए बहुत मुश्किल है।"
टी20 में पारंपरिक ज्ञान यह है कि बाएं हाथ का फिंगर स्पिनर बाएं हाथ के बल्लेबाज़ के सामने उतना प्रभावी नहीं होता है, लेकिन शाहबाज़ बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के खिलाफ भी अपने खेल को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
"जब से मैंने खेलना शुरू किया, मैं राउंड द विकेट गेंदबाज़ी करता था, क्योंकि यह अच्छा विकल्प है, लेकिन अब मैं ओवर द विकेट भी बायें हाथ के बल्लेबाज़ों को गेंदबाज़ी करता हूं, क्योंकि यह आपको बहुत विकल्प देता है, जितने विकल्प आपके पास होंगे उनका आप मैच को कंट्रोल कर सकते हो।"
"अगर आप ओवर द विकेट गेंदबाज़ी करते हो तो आप आउटसाइड ऑफ़ गेंद कर सकते हो। अगर वहां कुछ टर्न उपलब्ध है तो आप वहां गेंद डालकर अंदर ला सकते हो। तब बायें हाथ के बल्लेबाज़ों के पास एक ही विकल्प होता है कि वह गेंद को जमीन के सहारे मारे, तब लेग साइड में मारने का विकल्प नहीं बचता है।"
"ओवर द विकेट से आप लेग स्टंप की लाइन में भी गेंद कर सकते हो, जो इस सीज़न काफ़ी प्रभावशाली रहा है क्योंकि कम मैदान होने की वजह से ज़्यादातर मैच साइड विकेट पर खेले गए हैं। ऐसे में एक ओर की बाउंड्री दूसरी बाउंड्री से बड़ी होती है। तो इससे बायें हाथ के बल्लेबाज़ों को लेग साइड में हिट लगाना मुश्किल होता है। इससे अधिक विकेट लेने के विकल्प भी मिलते हैं।"
शाहबाज़ जहां अपनी गेंदबाज़ी को मज़बूत कर रहे हैं, वहीं बल्लेबाज़ी करने में उन्हें ज़्यादा मज़ा आता है और वह अधिक प्रभाव डालना चाहते हैं। उनका लक्ष्य खुद से मैच ख़त्म करने का है।
"घरेलू क्रिकेट में मैंने कुछ मैच ख़त्म किए हैं, तो मुझे अनुभव है। कोलकाता के ख़िलाफ़ हम 127 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रहे थे और मैं मुश्किल परिस्थिति में बल्लेबाज़ी करते हुए नाबाद रहा। आकाश दीप [बंगाल and रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु में साथी] ने मुझसे कहा, 'तुम इस मैच को ख़त्म कर सकते थे लेकिन तुमने ग़लत शॉट खेलकर अपना विकेट गंवाया। क्या हुआ?' यह मेरी आईपीएल में पहली पारी थी जब मैंने अच्छी बल्लेबाज़ी की। जितना अनुभव मुझे इस पॉजिशन पर बल्लेबाज़ी करते हुए मिलेगा, उतने ही ज़्यादा मैच मैं टीम के लिए ख़त्म कर सकूंगा।
"अभी मैं डीके भाई के सहायक की भूमिका में हूं, लेकिन एक समय आएगा जब मैं ख़ुद मैच ख़त्म करूंगा। मैं तैयार हो रहा हूं और इस समय का इंतज़ार कर रहा हूं।"

हेमंत बराड़ ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।