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जून 2023 में अपनी टी10 लीग शुरू करेगा श्रीलंका क्रिकेट

यह टूर्नामेंट लंका टी10 लीग के नाम से 12 दिनों तक खेला जाएगा

हालांकि 2024 से इसका आयोजन दिसंबर के महीने में हुआ करेगा  •  ICC via Getty

हालांकि 2024 से इसका आयोजन दिसंबर के महीने में हुआ करेगा  •  ICC via Getty

श्रीलंका ने जून 2023 में अपनी पहली टी10 लीग को लॉन्च करने की तैयारी कर ली है। यह टूर्नामेंट लंका टी10 लीग के नाम से जाना जाएगा। लीग में महिला और पुरुष क्रिकेट का एक साथ आयोजन किया जाएगा। जिसका मतलब होगा कि मुक़ाबले समवर्ती तौर पर वैकल्पिक दिनों के हिसाब से खेले जाएंगे। हालांकि इस सिलसिले में अभी भी एसएलसी द्वारा विस्तृत जानकारी आने का इंतज़ार है।
एसएलसी ने इस बात की घोषणा की है कि लीग में कुल छह पुरुषों की टीम और चार महिलाओं की टीम हिस्सा लेगी। लंका प्रीमियर लीग के ही तर्ज पर इस लीग में भी टीमों के नाम श्रीलंका के शहरों के आधार पर रखे जाएंगे।
भले ही अभी इन मुक़ाबलों के लिए वेन्यू और समयसारणी तय नहीं की गई है लेकिन ऐसी संभवना है कि अधिकतर मुक़ाबले कैंडी और हम्बनटोटा में खेले जाएंगे। अभी तक इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों का प्लेयर ड्राफ़्ट घोषित नहीं हुआ है लेकिन एसएलसी को उम्मीद है कि अबू धाबी टी10 लीग की तरह ही इस लीग में भी 1600 से अधिक खिलाड़ी अपना पंजीयन कराएंगे।
हर टीम कुल 16 खिलाड़ियों को अपने दल में शामिल कर सकेगी जबकि विदेशी खिलाड़ियों को अपने दल में शामिल करने की अधिकतम संख्या 6 होगी।
अगले साल जून के महीने में 12 दिनों तक इस लीग का आयोजन होगा। जबकि लंका प्रीमियर लीग का आयोजन दिसंबर में होगा। हालांकि आगे चलकर लंका प्रीमियर लीग के अगस्त में और टी10 लीग को नियमित तौर पर दिसंबर के महीने में आयोजित कराया जा सकता है।
एसएलसी के सीईओ एशले डी सिल्वा ने कहा, "अगले साल भी हमारे पास दिसंबर में एलपीएल होगा, लेकिन आगे जाकर हमने अगस्त में इसके लिए एक विंडो आरक्षित की है। तो अगले साल के लिए, हमारे पास जून में लंका टी10 और दिसंबर में एलपीएल होगा, लेकिन 2024 से, टी10 टूर्नामेंट दिसंबर में और एलपीएल अगस्त में होगा।" श्रीलंका लंबे समय से टी10 क्रिकेट का समर्थक रहा है। यह अबू धाबी टी10 लीग में भाग लेने के लिए अपने खिलाड़ियों को मंज़ूरी देने और समर्थन करने वाला पहला पूर्ण सदस्य है। तब से, वेस्टइंडीज़, ज़िम्बाब्वे, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश में क्रिकेट बोर्डों ने इस परंपरा का पालन किया है।