संक्षेप में कहें तो यह दो लाइनों की कहानी है- 2023 में WPL शुरू होने के बाद शिखा पांडे टूर्नामेंट की सबसे सफल भारतीय गेंदबाज़ रही हैं, लेकिन उन्होंने तबसे भारत के लिए नहीं खेला है।
कुल मिलाकर पहले तीन WPL सीज़न में 77 भारतीय खिलाड़ियों ने WPL खेला और उनमें से कईयों ने भारत का प्रतिनिधित्व नहीं किया है। लेकिन पांडे की कहानी कुछ और है।
2018 की शुरुआत से लेकर मार्च 2020 में कोरोना की वजह से क्रिकेट रुकने तक पांडे भारत की सेटअप में अहम खिलाड़ी थीं। उन्होंने उस दौरान 28 T20I में 24 विकेट लिए। उस समय भारत के लिए किसी भी तेज़ गेंदबाज़ ने ना इतने मैच खेले और ना ही इतना विकेट लिया। झूलन गोस्वामी ने अगस्त 2018 में T20I से संन्यास ले लिया था और पांडे, भारत की तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण की अगुवा बन गई थीं। उम्मीद थी कि वह अन्य फ़ॉर्मैट में भी गोस्वामी की जगह लेंगी, लेकिन जुलाई 2022 में जब वह समय आया तो वह राष्ट्रीय टीम के आसपास भी नहीं थीं।
15 महीने बाद भारत ने 2023 T20 विश्व कप से ठीक पहले पांडे को टीम में लाया, लेकिन उनकी वापसी सिर्फ़ छह मैच तक चली।
पहली WPL नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स (DC) और गुजरात जायंट्स (GG) ने उन पर बोली लगाई और DC ने उन्हें 60 लाख रूपये में ख़रीदा, जो उनके बेस प्राइस से 20 लाख रूपया ज़्यादा था।
जब उन्होंने भारत के लिए खेलना शुरू किया था, तब उन्हें मुख्य रूप से नई गेंद का गेंदबाज़ माना जाता था। लेकिन पिछले तीन WPL सीज़न में शीर्ष अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज़ों के ख़िलाफ़ उन्होंने ख़ुद को इससे कहीं ज़्यादा विकसित कर लिया है। उनके 30 WPL विकेटों में से 10 विकेट डेथ ओवर्स (17 से 20) में आए हैं। इस चरण में किसी भी तेज़ गेंदबाज़ ने उनसे ज़्यादा विकेट नहीं लिए हैं।
यही विविधता यूपी वॉरियर्ज़ (UPW) और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने पहचानी, जब दोनों ने WPL 2026 नीलामी में पांडे के लिए ज़ोरदार बोली लगाई। आखिरकार UPW ने उन्हें 2.4 करोड़ रूपये में ख़रीदा, जो उनके बेस प्राइस का छह गुना था। RCB ने उन पर 2.2 करोड़ रूपये तक बोली लगाई, जबकि उनके पास सिर्फ 2.85 करोड़ रूपये पर्स में थे और उनके आठ स्लॉट खाली थे। इससे बहुत कुछ समझ में आता है।
DC की टैलेंट स्काउट अनन्या उपेंद्रन कहती हैं, "वह हमेशा बहुत सूझबूझ से योजना बनाने वाली खिलाड़ी रही हैं, फिर चाहे वह रणनीतिक हो, स्किल के मामले में हो या फ़िटनेस के मामले में।"
"2007-08 में जब से मैंने उन्हें अंडर-19 के समय से देखा है, जब घरेलू खिलाड़ियों के ज़्यादा वीडियो भी नहीं मिलते थे, तब भी वह विपक्षी बल्लेबाज़ों के नोट्स बनाती थीं या बहुत ख़ास बातें याद रखती थीं। उन्हें अपनी स्किल और स्ट्रेंथ की समझ है और वह उन गेंदबाज़ों को देखती हैं, जो उनके जैसी हैं और जिन बल्लेबाजों का उन्हें सामना करना है। चाहे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट हो या घरेलू क्रिकेट, यह चीज़ हमेशा उनको ख़ास बनाती है।
"और फिर सबसे बड़ी बात यह है कि वह उन चुनिंदा भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों में से हैं, जो खेल के तीनों चरण में गेंदबाज़ी कर सकती हैं। नई गेंद के गेंदबाज़ से ख़ुद को डेथ और मध्य ओवरों के गेंदबाज़ के रूप में विकसित करना; गति, विविधता, यॉर्कर, स्लोअर और बाउंसर पर काम करना; उनको दूसरों से अलग बनाता है।"
सिर्फ़ आठ गेंदबाज़ ऐसे हैं, जिन्होंने WPL की पारी के हर चरण में पांच या उससे ज़्यादा विकेट लिए हैं। पांडे उस समूह में शामिल हैं। उनके पास WPL की पारी के पहले दो ओवरों में सबसे ज़्यादा विकेट का संयुक्त रिकॉर्ड भी है। उन्होंने पहला ओवर चार बार फेंका है और एक विकेट लिया है, दूसरा ओवर 15 बार फेंका है और चार विकेट लिए हैं। सीवर-ब्रंट और मारीज़ान काप के भी इस चरण में पांच-पांच विकेट हैं, लेकिन उन्होंने इस चरण में पांडे से ज़्यादा बार गेंदबाजी की है।
पांडे ने अपनी 27 WPL पारियों में सिर्फ़ सात पारियों में विकेट नहीं लिया है, जो बताता है कि वह लगातार खतरनाक बनी रहती हैं। उनके पास अपनी टीम के लिए ब्रेकथ्रू दिलाने का 74.1% चांस रहा है। भारतीय गेंदबाज़ों में सिर्फ़ काश्वी गौतम, जिनका सैंपल साइज़ बहुत छोटा (सिर्फ़ 9 मैच) है, उनसे ऊपर हैं और उनका प्रतिशत 77.8% है। यह उन 51 गेंदबाज़ों में से है, जिन्होंने कम से कम पांच पारियों में गेंदबाज़ी की है।
भारत की पूर्व फ़ील्डिंग कोच और WCPL में त्रिनिबागो नाइट राइडर्स (TKR) के सहायक कोच बीजू जॉर्ज कहते हैं, "चिकू (पांडे) ज़्यादातर अपने पहले स्पेल में आपको ब्रेकथ्रू दे देंगी। उन्हें हर खिलाड़ी की समझ है। आप दुनिया के किसी भी खिलाड़ी के बारे में उनसे बात करो, वह चलती-फिरती इनसाइक्लोपीडिया हैं। अभिषेक (नायर, UPW प्रमुख कोच) टीम में उनके होने से बहुत ख़ुश होंगे। वह टीम मीटिंग में लीड करती हैं, अपना 150% देती हैं और बहुत सुरक्षित फ़ील्डर भी हैं। किसी भी टीम के लिए वह एक संपत्ति हैं। वह सबसे मेहनती खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्हें मैंने देखा है। वह सर्वश्रेष्ठ से मुक़ाबला कर सर्वश्रेष्ठ बनना चाहती हैं।"
बेहतर बनने की चाह उन्हें कई जगह ले गई। क्वींसलैंड में वीनम मैनली के लिए क्लब क्रिकेट, WBBL में ब्रिसबेन हीट, सुपर स्मैश में कैंटरबरी मैजिसियंस और WCPL में TKR। इसी ने उन्हें घरेलू टीम भी बदलने पर मजबूर किया। 18 साल गोवा के लिए खेलने के बाद उन्होंने 2024-25 सीज़न से पहले बड़ौदा के लिए खेलना शुरू किया।
उपेंद्रन कहती हैं, "वह हमेशा इस बात को लेकर स्पष्ट रही हैं कि वह जिस भी लेवल पर खेलें, अपना सर्वश्रेष्ठ दें। स्वाभाविक रूप से महत्वाकांक्षी होने के कारण, वह अब भी भारत के लिए खेलने की उम्मीद रखती हैं। लेकिन अभी उन्होंने खेल का लुत्फ़ उठाने और अपने स्किल को बेहतर बनाने में एक शांति ढूंढ ली है।
"बड़ौदा काफी युवा टीम है, लेकिन हमेशा उम्मीद से ज़्यादा खेलती है। वे अक्सर स्पिन हैवी टीम रही हैं। मुझे लगता है शिखा ने इसे एक मौक़े के रूप में देखा, जहां वह एक विकसित हो रही युवा टीम में खेलें और जहां सिर्फ़ वही एक केंद्रीय चेहरा ना हों। गोवा में कई सालों तक लोग उन्हें और कुछ हद तक सुनंदा (येत्रेकर) को ही सबसे बड़ा ख़तरा मानते थे। इतने साल घरेलू टीम का भार उठाना आपको थका देता है।"
थोड़ी ज़्यादा आज़ादी से खेलने से उनकी बल्लेबाज़ी भी खुली है। सीनियर वीमेंस T20 ट्रॉफ़ी में निचले मध्य क्रम में बल्लेबाज़ी करते हुए उन्होंने छह पारियों में 154.87 के स्ट्राइक रेट से 127 रन बनाए हैं, जो बड़ौदा के लिए तीसरा सबसे अधिक था।
DC में पांडे की कप्तान रह चुकीं और अब UPW की कप्तान मेग लानिंग कहती हैं, "मैं फिर से शिखा के साथ काम करने को लेकर बहुत उत्साहित हूं। उनके साथ खेलना शानदार रहता है। वह बहुत अनुभवी हैं, अपने खेल को अच्छे से जानती हैं, अपनी ताक़त, कमज़ोरियों व विकल्पों को समझती हैं और बहुत शांत रहती हैं। इस फ़ॉर्मेट में गेंदबाज़ अक्सर दबाव में रहता है और वह इस मामले में टीम को बहुत कुछ देती हैं।"
पांडे का दूसरा बड़ा पहलू उनकी मेंटरिंग है। दुनिया भर में काफी अनुभव हासिल करने के बाद वह युवा खिलाड़ियों से बात करने में कभी हिचकिचाती नहीं हैं।
उपेंद्रन बताती हैं, "शिखा ने युवा खिलाड़ियों को गाइड करना शुरू कर दिया है। DC की WPL सेट अप में जब वी जे जोशिता, नेट बोलिंग टीम में थीं, तो दोनों काफ़ी बातचीत करती थीं। शिखा उन्हें गेंदबाज़ी करते देखती थीं और उनके साथ इस पर बात करती थीं कि वह क्या बेहतर कर सकती हैं, फिर चाहे टैक्टिकल हो या टेक्निकल पहलू।
"अगर कोई क्रिकेट की बात कर रहा हो, तो शिखा वहां जरूर होती हैं। क्वींसलैंड में ट्रेनिंग के दौरान भी उन्होंने ग्रेस हैरिस, जॉर्जिया रेडमेन और ग्रेस पार्सन जैसी खिलाड़ियों से काफ़ी चर्चा की। जो भी क्रिकेट की बात करेगा, वहां आपको शिखा ज़रूर मिलेंगी।"
लानिंग भी इससे सहमत हैं। वह कहती हैं, "वह (पांडे) हमारी तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण को लीड कर सकती हैं, युवा गेंदबाजों को गाइड कर सकती हैं और मुझे भी मदद कर सकती हैं। उन्होंने साबित किया है कि वह पारी के हर हिस्से में असरदार हैं। वह नई गेंद डाल सकती हैं, बीच के ओवरों में गेंदबाज़ी कर सकती हैं और फिर डेथ में आकर खेल को फ़िनिश कर सकती हैं। एक कप्तान के रूप में, टीम में ऐसा खिलाड़ी होना आपके काम को आसान कर देता है।"
अब पांडे WPL 2026 में ऐसी टीम के साथ जा रही हैं, जो शुरुआती सीज़न के बाद से प्लेऑफ़ में नहीं पहुंची है। अगर वह UPW को कहानी बदलने में मदद कर सकीं तो भारतीय टीम में वापसी का सपना फिर हक़ीकत बन सकता है। ख़ासकर अगले T20 विश्व कप को देखते हुए, जो इंग्लैंड में है, जहां तेज़ गेंदबाज़ों की भूमिका अहम होगी।