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भरत : मैं अपने समय का इंतज़ार कर रहा हूं

विकेटकीपर बल्लेबाज़ ने इंडिया ए टूर कार्यक्रम को सराहा और कहा कि इससे सीनियर लेवल के लिए तैयार होने में बहुत मदद मिलती है

न्यूज़ीलैंड ए के ख़िलाफ़ मैच के दौरान भरत  •  Manoj Bookanakere/KSCA

न्यूज़ीलैंड ए के ख़िलाफ़ मैच के दौरान भरत  •  Manoj Bookanakere/KSCA

भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज़ केएस भरत ने जुलाई 2018 में इंडिया-ए के लिए अपना पहला मैच खेला था। अगले साल नवंबर 2019 में उन्हें भारतीय टेस्ट दल से भी बुलावा आ गया। इसके बाद से ही वह लगातार भारतीय टेस्ट टीम और इंडिया ए सेट अप का हिस्सा रहे हैं। इन सबके बावज़ूद उन्हें अब भी अपने अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण का इंतज़ार है।
हालांकि भरत इससे कतई भी निराश नहीं हैं। वह 'चरैवेति-चरैवेति' की तर्ज पर अपना कर्म करने में विश्वास रखते हैं। किसी दार्शनिक के अंदाज़ में वह कहते हैं, "कई बार भावनाओं में बह जाना या निराश होना बहुत आसान होता है लेकिन अगर आप कठिन परिश्रम पर विश्वास करते हैं, तो फिर आप ख़ुश रहेंगे। आपको ज़िंदगी में कुछ भी पाने के लिए धैर्य रखना होता है, आप कभी शॉर्टकट नहीं ले सकते। मैं अपना काम करता हूं और बाक़ी का काम निर्णय लेने वालों पर छोड़ देता हूं। मैं इसके बारे में बहुत अधिक सोचता भी नहीं हूं।"
भरत फ़िलहाल इंडिया ए के प्रमुख विकेटकीपर के रूप में न्यूज़ीलैंड ए के ख़िलाफ़ तीन मैचों की अनौपचारिक टेस्ट सीरीज़ में हिस्सा ले रहे हैं। बारिश से प्रभावित हुबली के दूसरे अनौपचारिक टेस्ट में जब उन्हें कठिन परिस्थितियों में बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा मिला तो उन्होंने नाबाद 74 रन बनाए और फिर एक कैच भी लपका। मैच के बाद उन्होंने इंडिया ए के कार्यक्रम को भारतीय युवा क्रिकेटरों के लिए एक बेहतरीन मौक़ा बताया।
वह कहते हैं, "इंडिया ए का कार्यक्रम बहुत अच्छा है। पिछले चार सालों में हमने काफ़ी ए टूर किए हैं। इससे हमें बहुत एक्सपोज़र मिलता है और हम ख़ुद को भारत के लिए खेलने को तैयार कर पाते हैं। हम इन मैचों से सीखते हैं कि अगर हमें भारत के लिए खेलने का मौक़ा मिलता है तो हमें किसी भी परिस्थिति को संभालने आना चाहिए। वीवीएस (लक्ष्मण) सर ने भी टीम मीटिंग में हमें यही बताया कि यह ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जिस पर आप अपने आपको टेस्ट कर सकते हो। इससे पहले राहुल (द्रविड़) सर भी यहां थे और उनका भी यही मंत्र था कि किसी भी स्थिति में हम अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें।"
उन्होंने अपना ही उदाहरण देते हुए बताया, "जब मुझे पिछले साल न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच में कीपिंग करने का मौक़ा मिला तो मुझे थोड़ी सी भी घबराहट नहीं हुई क्योंकि मैं उन खिलाड़ियों के साथ और ख़िलाफ़ पहले भी खेल चुका था। यही ए टूर का लक्ष्य है और इससे आपको पहले ही अंतर्राष्ट्रीय मैच में बिना घबराए ही प्रदर्शन करने में सहायता मिलती है। इसके अलावा ए टूर में हमेशा कोई ना कोई इंडिया प्लेयर भी खेलता है, जैसे अभी हमारे साथ कुलदीप यादव और शार्दुल ठाकुर हैं। कई बार कुछ सीनियर खिलाड़ी भी हमारे ड्रेसिंग रूम का हिस्सा होते हैं। इससे हमें उन्हें जानने में आसानी होती है और जब आप सीनियर टीम का हिस्सा बनते हैं तो आप फिर उस ड्रेसिंग रूम के माहौल से अनजान भी नहीं होते हैं।"
आपको बता दें कि भले ही भरत को अपने टेस्ट डेब्यू का इंतज़ार है लेकिन वह भारत के लिए विकेट के पीछे तीन शिकार कर चुके हैं। नवंबर, 2021 के कानपुर टेस्ट में जब न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ ऋद्धिमान साहा चोटिल हो गए थे तो उन्होंने विकेटकीपिंग की ज़िम्मेदारियां निभाई थी।
2021 में ही पहली बार भरत को आईपीएल खेलने का भी मौक़ा मिला और उन्होंने इसे दोनों हाथों से भुनाया। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू (आरसीबी) के लिए आईपीएल 2021 के दुबई लेग में खेलते हुए उन्होंने आठ मैचों में 38 की औसत से 191 रन बनाए और दो मैच जिताऊ पारियां खेली।
इस अनुभव के बारे में भरत कहते हैं, "लॉकडाउन के दौरान अपना टी20 खेल सुधारने के लिए मैंने कुछ अलग तरह से अभ्यास किया था। इससे मुझे अपने टी20 खेल को गहराई से समझने में सहायता मिली। इसके तुरंत बाद मुझे आरसीबी के लिए खेलने का मौक़ा मिला। वहां मुझे विराट (कोहली), एबी (डिविलियर्स) और (ग्लेन) मैक्सवेल के साथ अभ्यास करने, समय गुजारने का मौक़ा मिला, जिससे मैंने बहुत कुछ सीखा। इससे मुझे अच्छा प्रदर्शन करने के लिए आत्मविश्वास मिला और मैंने वहां पर कुछ अच्छी पारियां भी खेलीं।"
भरत 2022 में दिल्ली कैपिटल्स के लिए चयनित हुए लेकिन उन्हें वहां सिर्फ़ दो मैच ही खेलने का मौक़ा मिला। ऋषभ पंत के रूप में एक कप्तान विकेटकीपर के होते हुए उनके लिए पहले से ही कम मौक़े थे लेकिन ऊपरी क्रम के लगातार असफल होने के बाद भी उन्हें उचित मौक़े नहीं मिले।
इस पर भरत कहते हैं, "आपको कई बार ना चयनित होने को भी एक सकारात्मक रूप में लेना होता है। अगर आप इसे निराशा की तरह लेते हैं तो एक खिलाड़ी के रूप में आपके आगे बढ़ने के लिए कोई जगह नहीं बचती है। मैं हमेशा देखता हूं कि मेरी टीम जीत रही है या नहीं, फिर चाहे मैं एकादश का हिस्सा रहूं या ना रहूं। एकादश में खेलना उस विशेष दिन की परिस्थिति और टीम संयोजन पर निर्भर करता है। आईपीएल टीम अगर 22 से 25 खिलाड़ियों को चयनित करती है तो उन पर विश्वास भी करती है। आपको बस अपने समय का इंतज़ार करना होता है और इसका कोई शॉर्ट कट नहीं है।"

दया सागर ESPNcricinfo हिंदी में सब एडिटर हैं @dayasagar95