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अमनजोत कौर : भारतीय क्रिकेट की नई उभरती ऑलराउंडर

टी20 अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू पर इस युवा खिलाड़ी ने साउथ अफ़्रीका के विरुद्ध नाबाद 41 रन बनाए

Amanjot Kaur top scored for India with 41 not out off 30, South Africa vs India, Women's Tri-Series, East London, January 19, 2023

अपने टी20 अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू पर अमनजोत ने नाबाद 41 रन बनाए  •  Gallo Images/Cricket South Africa

मैच के 12वें ओवर में भारत ने 69 के स्कोर पर पांच विकेट गंवा दिए थे। यास्तिका भाटिया के अलाना अन्य चार शीर्ष बल्लेबाज़ों ने दोहरे अंक को भी नहीं छुआ था। कठिन पिच और गर्म परिस्थितियों में रन आसानी से बन नहीं रहे थे। ठीक तब दीप्ति शर्मा का साथ देने टी20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण कर रहीं ऑलराउंडर अमनजोत कौर क्रीज़ पर आईं।
अमनजोत को चुनौतियों का सामना करना पसंद हैं। 2018-19 में पंजाब की ओर से घरेलू क्रिकेट खेलना शुरू करने के बाद उन्होंने 2019-20 से मैच खेलने के मौक़ों की तलाश में चंडीगढ़ की ओर से खेलना शुरू किया। इन दो सीज़नों में चंडीगढ़ की कप्तानी करने के साथ-साथ उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों के साथ योगदान दिया। एकादश में उनका स्थान पक्का था और वह अपना जलवा बिखेर रही थीं।
हालांकि उन्हें अपने करियर से और कुछ चाहिए था। इसलिए ज़्यादा प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने के लिए उन्होंने 2022-23 में फिर पंजाब का रुख़ किया जहां उन्हें भारतीय विकेटकीपर तानिया भाटिया से सीखने का मौक़ा मिला। सीनियर महिला टी20 ट्रॉफ़ी में अमनजोत ने 100 से अधिक के स्ट्राइक रेट से पंजाब की ओर से सर्वाधिक 192 रन बनाए। इसके बाद उन्होंने सीनियर महिला इंटर-ज़ोनल टी20 प्रतियोगिता में नॉर्थ ज़ोन के लिए आठ विकेट लिए।
भारतीय क्रिकेट में निरंतरता के साथ प्रदर्शन कर रहीं एक युवा तेज़ गेंदबाज़ी ऑलराउंडर को अनदेखा नहीं किया जा सकता और अमनजोत को महिला टी20 विश्व कप से पहले त्रिकोणीय सीरीज़ के लिए भारतीय टीम से बुलावा आया। यह और महत्वपूर्ण था क्योंकि भारत की प्रमुख ऑलराउंडर पूजा वस्त्रकर पिछले महीने ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध सीरीज़ से बाहर रहने के बाद संपूर्ण फ़िटनेस की ओर बढ़ रहीं हैं।
अब अपने पहले ही अंतर्राष्ट्रीय मैच में अमनजोत के सामने भारत को कम स्कोर पर ऑलआउट होने से बचाने की चुनौती थी। परिस्थितियों को समझने के लिए उन्होंने अपना समय लिया और पहले 13 गेंदों पर मात्र सात कर बनाए। वह फ़्री हिट का फ़ायदा उठाने से चूकी लेकिन क्रीज़ पर जमी रहीं। समय लेने के बाद अब वक़्त था अपने हाथ खोलने का।
अपना तीसरा ओवर डाल रहीं अयाबोंगा खाका का स्वागत हुआ दो बेहतरीन टाइमिंग वाली कवर ड्राइव के साथ। दोनों मौंक़ों पर खाका ने अमनजोत को ऑफ़ स्टंप के बाहर के पसंदीदा क्षेत्र में फ़ुल गेंदें दी और गैप निकालने का आमंत्रण दिया। इसके बाद अमनजोत ने मारीज़ान काप के सिर के ऊपर से एक गेंद को खेला और टाइमिंग इतनी अच्छी थी कि गेंद सीमा रेखा पार चली गई। पारी के 19वें ओवर में उन्होंने खाका को तीन और चौके लगाए।
कुल मिलाकर अमनजोत ने खाका की 10 गेंदों पर 22 और काप की पांच गेंदों पर 10 रन बनाए। 30 गेंदों पर 41 रन बनाकर वह नाबाद रहीं जो टी20 अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू पर किसी भी भारतीय का दूसरा सर्वाधिक स्कोर है।
टी20 अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू पर प्लेयर ऑफ़ द मैच ख़िताब जीतने वाली तीसरी भारतीय खिलाड़ी बनने के बाद अमनजोत ने कहा, "चंडीगढ़ के लिए खेलना एक टर्निंग प्वाइंट था क्योंकि मैंने बतौर बल्लेबाज़ ज्ञान, परिपक्वता और लाइमलाइट हासिल की। फिर मैं पंजाब गई और मुझे वह क़दम उठाना पड़ा क्योंकि मैं सीनियरों के साथ और प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलना चाहती थीं। वहां तानिया थीं और उनसे मैंने सीखा कि सबसे ऊंचे स्तर पर कैसे रहना होता है और वहां कैसी प्रतिद्वंद्विता होती है।"
छठे विकेट के लिए अमनजोत ने दीप्ति के साथ 76 रन जोड़े जो सभी महिला टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में चौथी सबसे बड़ी साझेदारी है। उनकी बदौलत भारत ने अंतिम चार ओवरों में 44 रन बनाए और टीम 150 के पास पहुंचने में क़ामयाब रही। स्पिन को मदद करती पिच पर वह स्कोर साउथ अफ़्रीका की पहुंच से बाहर चला गया।
अमनजोत ने कहा, "दीप्ति ने कहा कि मुझे गेंद को बहुत ज़ोर से मारने का प्रयास नहीं करना चाहिए। बातचीत यह थी कि पहले सिंगल के लिए कोशिश करों और सेट होने के बाद बाउंड्री आती रहेंगी। उन्होंने मुझे अपने उत्साह पर क़ाबू पाने को कहा क्योंकि यह मेरा डेब्यू था और मुझे शांत रहकर साझेदारी बनाने की सलाह दी जिससे टीम एक अच्छी स्थिति में पहुंच सके।"
अमनजोत ने 17 वर्ष की आयु में बतौर गेंदबाज़ कोच नागेश गुप्ता के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग करना शुरू किया। उनके पिता ने अकादमी में उनका नाम दाखिल करवाया था। पिता को लगा कि क्रिकेट के प्रति उनका चस्का धीरे-धीरे ख़त्म हो जाएगा। हालांकि वह भारत के लिए क्रिकेट में कुछ बड़ा कर दिखाने के लिए तत्पर थीं। उनके समर्पण को देखते हुए, उनके पिता, जो लकड़ी के ठेकेदार और बढ़ई थे, ने ठेके की नौकरी छोड़ दी और केवल अपने घर के पास के स्थान पर बढ़ईगीरी का काम किया ताकि वे अमनजोत को ट्रेनिंग के लिए ले जा सकें।
अमनजोत ने कहा, "घर और अकादमी के बीच का वह सफ़र साढ़े तीन से चार घंटे का था और उन्होंने (पिताजी) 2016-17 में उसे संभालने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। पहले वह लंबा काम लेते थे और और [ग्राहक] के यहां और कभी-कभी घर से दूर रहते थे। लेकिन मुझे अकादमी से लेने और छोड़ने के लिए, उन्होंने वह छोड़ दिया।"
भारतीय टीम के लिए अपने पहले ही मैच में छाप छोड़ने के बाद अमनजोत जानती हैं कि उनका सफ़र तो बस शुरू हुआ है। हालांकि जैसा कि हमने पहले बताया था, उन्होंने चुनौतियां पसंद हैं और वह इसके लिए तैयार हैं।

एस सुदर्शनन ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।