द्रविड़: सभी फ़ॉर्मेट के बल्लेबाज़ों को टेस्ट स्किल पर काम करने का पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है
भारत के पूर्व कोच ने कहा कि भारतीय टीम के टेस्ट मैचों में संघर्ष करने का यह एक कारण है
आशीष पंत
28-Jan-2026 • 1 hr ago
भारत के पूर्व कप्तान और पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ का मानना है कि जो भारतीय बल्लेबाज़ तीनों फ़ॉर्मेट खेलते हैं, उन्हें अपने लाल गेंद की स्किल को निखारने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है और यही हाल के वर्षों में टेस्ट क्रिकेट में उनकी कमज़ोरियों की एक बड़ी वजह है। घरेलू सीरीज़ में लगातार 12 साल तक एक भी हार न झेलने के बाद भारत ने अपनी पिछली तीन घरेलू सीरीज़ में से दो गंवाई है।
द्रविड़ ने बेंगलुरु में रोहित शर्मा पर लिखी गई क़िताब The Rise of the Hitman: The Rohit Sharma Story के लॉन्च के दौरान कहा, "एक कोच के तौर पर तीनों फ़ॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ियों के बारे में मैंने जो एक बात समझी है, वह यह है कि वे लगातार एक फ़ॉर्मेट से दूसरे फ़ॉर्मेट में स्विच करते रहते हैं।
"कई बार ऐसा हुआ है कि हम टेस्ट मैच से सिर्फ़ तीन-चार दिन पहले पहुंचते थे और जब टेस्ट की तैयारी शुरू करते थे, तो पीछे मुड़कर देखने पर पता चलता था कि इन में से कुछ खिलाड़ियों ने आख़िरी बार लाल गेंद से चार या पांच महीने पहले खेला था।
"यह वाकई एक बड़ी चुनौती बन गई है कि आप उन मुश्किल स्किल्स को विकसित करने के लिए समय कैसे निकालें। टर्न लेने वाली पिचों पर खेलना, या सीम करने वाली विकेटों पर खेलना और टेस्ट मैच में घंटों-घंटों तक ऐसा करना आसान नहीं है। इसके लिए ख़ास स्किल चाहिए।"
भारत के टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने हाल ही में कहा था कि खिलाड़ियों को टेस्ट सीरीज़ की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा और उन्होंने BCCI से टीम के शेड्यूल में इस बात को ध्यान में रखने का अनुरोध किया था।
"मेरी पीढ़ी में, जब खेल में सिर्फ दो फ़ॉर्मेट थे और फ़्रेंचाइज़ी क्रिकेट जैसी कोई अवधारणा नहीं थी, तब कई बार ऐसा होता था कि मेरे पास टेस्ट सीरीज़ की तैयारी के लिए पूरा एक महीना होता था और मैं लाल गेंद से अभ्यास कर अपने स्किल्स को बेहतर कर पाता था," द्रविड़ ने कहा। "अब जो खिलाड़ी तीनों फ़ॉर्मेट खेलते हैं या जितना क्रिकेट वे खेल रहे हैं, उसके कारण कभी-कभी उन्हें लाल गेंद की क्रिकेट का अभ्यास करने का समय ही नहीं मिल पाता।
"मुझे लगता है शुभमन ने हाल ही में इसका थोड़ा ज़िक्र किया, क्योंकि उन्होंने इसे ख़ुद महसूस किया है। वे उन खिलाड़ियों में से हैं जिन्होंने हाल ही में हमारे लिए तीनों फ़ॉर्मेट खेले हैं, इसलिए उन्होंने यह समझा होगा कि टेस्ट फ़ॉर्मेट के लिए ख़ुद को तैयार करना उनके लिए कितना मुश्किल हो जाता है।"
'टर्न लेने वाली पिचों या सीम करने वाली विकेटों पर घंटों-घंटों खेलना आसान नहीं है'•ICC via Getty Images
भारत T20I में एक महाशक्ति है। वे इस समय न्यूज़ीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज़ में 3-0 से आगे हैं और T20 विश्व कप में ख़िताब बचाने के प्रबल दावेदार के रूप में उतरेंगे। द्रविड़ के अनुसार, T20I में भारत की बेहद ऊंची रन गति के पीछे एक वजह यह है कि बल्लेबाज़ शॉर्ट-फ़ॉर्मेट का कितना अधिक अभ्यास कर रहे हैं।
"आप हिटिंग के पहलू को देखें। आज सफ़ेद गेंद की क्रिकेट में जिस तरह से खिलाड़ी बल्लेबाज़ी कर रहे हैं, वह इसलिए है क्योंकि वे इसका कहीं ज़्यादा अभ्यास कर पा रहे हैं," द्रविड़ ने कहा। "इनमें से कई लड़के IPL में ढाई महीने बिताते हैं, जहां वे सिर्फ़ यही अभ्यास करते हैं कि कितने छक्के मार सकते हैं। इसी वजह से वे इसमें और बेहतर हो जाते हैं।"
दूसरी ओर मौजूदा विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में भारत छठे स्थान पर है और 2027 में होने वाले फ़ाइनल में जगह बनाने के लिए उन्हें नतीज़ों में बड़ा सुधार करना होगा। द्रविड़ ने बल्लेबाज़ों की हालिया मुश्किलों के लिए दुनिया भर में WTC अंक हासिल करने की होड़ में बनाई जा रही ज़्यादा परिणाम-उन्मुख पिचों को भी एक कारण बताया।
"नतीजा दिलाने वाली पिचों का महत्व अब कहीं ज़्यादा बढ़ गया है," द्रविड़ ने कहा। "पहले के दौर में आपको सिर्फ सीरीज़ जीतनी होती थी, हर टेस्ट मैच जीतने का दबाव नहीं होता था। आज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की वजह से घरेलू टीमों पर सभी मैच जीतने का दबाव बढ़ गया है। यही वजह है कि आप ऐसी विकेटें ज़्यादा देख रहे हैं, जो गेंदबाज़ों के पक्ष में बहुत ज़्यादा मददगार होती हैं। और यह सिर्फ़ भारत में ही नहीं, हर जगह हो रहा है।
आशीष पंत ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं
