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रवींद्र जाडेजा : टीम इंडिया के नए संकटमोचक

जाडेजा ने पिछले कुछ सालों में अपनी बल्लेबाज़ी को नया आयाम दिया है

भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जाडेजा ने शुक्रवार को जो पहली गेंद खेली थी, एंडरसन की वह गेंद पड़कर अंदर आई। तेज़ी से स्विंग होकर पैड पर आती उस गेंद को जाडेजा बल्ले से खेलने में सफल रहे। वह क्रीज़ के बहुत भीतर खड़े थे, उनका बल्ला, शरीर के एकदम पास था और जब गेंद का बल्ले से संपर्क हुआ तो उनकी नज़र भी एकदम सीधी गेंद पर ही थी। इस दौरान उन्होंने गेंद खेलने के लिए कोई जल्दबाज़ी भी नहीं दिखाई।
जल्दी ही यह पता भी चल गया कि जाडेजा जल्दबाज़ी में हैं भी नहीं। वह जितना हो सके उतना लंबा स्ट्राइड ले रहे थे और बल्ले का पूरा चेहरा खोल सीधे बल्ले से खेल रहे थे। विशेषज्ञ बल्लेबाज़ों की तरह उनका बल्ला शरीर से एकदम नज़दीक था ताकि कोई बाहरी किनारा नहीं लगे। इसके अलावा वह गेंद का क्रीज़ में इंतजार कर रहे थे और उन्हें एकदम देरी से खेल रहे थे।
इस मैच से दो दिन पहले जाडेजा ने नेट-प्रैक्टिस के दौरान अपनी स्ट्राइड पर बहुत काम किया था और वह लगातार गेंदों को डिफ़ेंड कर रहे थे। लेकिन वह कुछ नया नहीं कर रहे थे। उन्होंने पिछले साल की गर्मियों में पटौदी ट्रॉफ़ी के पहले चार टेस्ट मैचों में भी ऐसा ही कुछ करके दिखाया था। एक निचले क्रम के बल्लेबाज़ के रूप में जाडेजा ने इस सीरीज़ में सर्वाधिक 459 गेंदें खेली हैं। ऋषभ पंत उनसे काफ़ी दूर 259 गेंदों के साथ दूसरे नंबर पर हैं।
इस सीरीज़ के पहले टेस्ट की पहली पारी के दौरान जाडेजा जब बल्लेबाज़ी करने के लिए आए थे तो भारत का स्कोर 145 रन पर 5 विकेट था। लेकिन अगले दो घंटों में 56 रन बनाकर उन्होंने भारतीय टीम को 95 रन की बढ़त दिला दी। अब भारत मैच में आगे था। हालांकि पांचवां दिन पूरा बारिश की वजह से धुल जाने के कारण भारत यह मैच जीत नहीं सका।
अब आते हैं लॉर्ड्स पर, जहां पर भारत ने बेहतरीन वापसी की थी। इस मैच में जब जाडेजा बल्लेबाज़ी के लिए आए तो भारत का स्कोर 282 रन पर 5 विकेट था। उन्होंने भारतीय पारी को 364 रन तक पहुंचाया और वह आउट होने वाले अंतिम बल्लेबाज़ थे। उन्होंने सिर्फ़ 40 रन बनाए लेकिन वह 120 गेंदों और 60 मिनट में आए थे। यह उनकी दृढ़ता को दिखाता है। सीरीज़ के चौथे टेस्ट के दौरान तो जाडेजा ने ओवल की बेजान पिच पर जैसे जान डाल दी और आर अश्विन से पहले अपने चयन को सही ठहराया।
इस टेस्ट मैच में जब वह बल्लेबाज़ी के लिए आए तो गेंद 28 ओवर पुरानी थी। हालांकि मैदान पर बादल को देखते हुए यह अब भी गेंदबाज़ों को पूरी मदद दे रही थी। जाडेजा ने अपनी पारी की शुरूआत सामान्य ढंग से की और पहले 34 गेंदों में 24 रन बनाए। लेकिन जब सामने से उनके जोड़ीदार ऋषभ पंत ने हाथ खोलना शुरू किया तो वह बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हुए। उन्होंने बहुत ही शांति से पंत के सहयोगी की भूमिका निभाई।
इस दौरान उन्होंने जेम्स एंडरसन से लेकर स्टुअर्ट ब्रॉड, मैथ्यू पॉट्स और बेन स्टोक्स के कठिन सवालों का जवाब दिया। सभी ने उनके ऑफ़ स्टंप को टारगेट करके बाहर जाती गेंदों को फेंका। जाडेजा इसके लिए तैयार थे और उन्होंने अपने बल्ले से इसका जवाब दिया। इसके बाद जब उनके शरीर पर छोटी गेंद की गई तो वह पुल के लिए नहीं गए बल्कि उसे कीपर के लिए छोड़ा।
हालांकि इस दौरान जब भी रन बनाने का मौक़ा आया उन्होंने बिल्कुल भी उसे नहीं छोड़ा। उन्होंने ब्रॉड और एंडरसन दोनों पर सीधा ड्राइव लगाया, फ़्लिक किया और छोटी गेंद आते ही उन्हें बैकफ़ुट पर जाकर कट या पुल किया। ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो की गेंद-दर-गेंद आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान जाडेजा ने 82% तक नियंत्रित शॉट खेला। इन परिस्थितियों और ऐसे गेंदबाज़ों के सामने यह बेहतरीन आंकड़े हैं। जिस ओवर में पंत ने अपना शतक पूरा किया, उसी ओवर में जाडेजा ने 109 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा कर अपना बैट लहराया।
अगर स्टोक्स और उनकी इंग्लिश टीम को यह नहीं पता कि पंत और जाडेजा इस समय दुनिया के सर्वश्रेष्ठ निचले क्रम के बल्लेबाज़ हैं और उन्होंने पिछले तीन सालों में कई बार टीम इंडिया को संकट से उबारा है, तो अब वे जान जाएंगे। मार्च में श्रीलंका के ख़िलाफ़ जाडेजा ने 175 रन की पारी खेल महान कपिल देव का रिकॉर्ड तोड़ा था। यह अब किसी भी नंबर सात या उससे नीचे आने वाले भारतीय बल्लेबाज़ का सर्वाधिक स्कोर है। 2016 के बाद से जाडेजा के 35.8% रन तब आए हैं जब भारत का छह विकेट गिर गया हो। यह पूरे विश्व में 1000 रन बनाने वाले किसी भी बल्लेबाज़ के लिए सर्वाधिक है।
2018 के बाद से जाडेजा ने हर 2.9 पारियों में अर्धशतक बनाया है, जो कि भारत के लिए सबसे तेज़ है। रोहित शर्मा (3.3) और पंत (3.5) भी इस मामले में जाडेजा से कहीं पीछे हैं। इस दौरान जाडेजा का औसत 51.45 रहा है, जो कि कम से कम 10 पारी खेलने वाले किसी भी निचले क्रम के बल्लेबाज़ के लिए सर्वाधिक है।
मैच के पहले दिन जब पंत आउट हुए तो जाडेजा 68 रन पर थे और भारत 400 के लक्षित स्कोर से बहुत दूर था। लेकिन अगले दिन जब जाडेजा आए तो वह अपनी योजना पर कायम रहे। इस दौरान भाग्य ने भी उनका साथ दिया और जब स्लिप पर उनका कैच छूटा तो अगले ही गेंद को उन्होंने कट लगाकर अपना पहला विदेशी शतक पूरा किया। आईपीएल के एक कठिन सीज़न के बाद यह जाडेजा के लिए बहुत विशेष शतक था।

नागराज गोलापुड़ी ESPNcricinfo में न्यूज़ एडिटर हैं