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चहल की चाल ने कैसे दिया कोलकाता नाइट राइडर्स को चकमा

केकेआर के कोच मक्‍कलम ने कहा कि टीम को चहल के ख़तरे का पहले से अंदाज़ा था

ब्रेबोर्न में सोमवार को जॉस बटलर ने सुनील नारायण की नौ गेंदों का सामना किया। एक ऐसी पारी जिसमें बटलर ने हर चौथी गेंद पर एक चौका लगाया, लेकिन नारायण की गेंदों पर उन्होंने कोई बड़ा शॉट खेलने का जोखिम नहीं लिया। बटलर ने नारायण की गेंदों में कुल नौ मर्तबा सिंगल चुराने की कोशिश की, लेकिन वह सिर्फ़ पांच बार ही स्ट्राइक बदलने मे क़ामयाब हो पाए।
ज़ाहिर तौर पर बटलर बल्लेबाज़ी के लिए इतनी मुफ़ीद पिच पर नारायण को, आउट करने का कोई मौक़ा नहीं देना चाहते थे। वह न केवल तेज़ स्कोर करना चाहते थे बल्कि काफ़ी देर तक बल्लेबाज़ी करके अन्य गेंदबाज़ों को दंडित करके की रणनीति के साथ बल्लेबाज़ी कर रहे थे।
नारायण ने 4-0-21-2 के आंकड़े के साथ अंत किया, जिसमें बल्लेबाज़ों ने उनके अंतिम दो ओवरों में ही हाथ खोलने के प्रयास किए, लेकिन बटलर ने तब भी नारायण की गेंदों पर प्रहार करने का जोखिम लेने की ज़हमत नहीं उठाई। यह एक असाधारण स्पेल था जिसमें नारायण ने अपनी लंबाई पर असाधारण नियंत्रण दिखाया और वह लगातार अपनी गेंदों पर मिश्रण करते भी दिखाई दिए।
फ़िर भी आइए नारायण द्वारा लिए गए विकेटों पर एक नज़र डालते हैं। नारायण के दूसरे ओवर में, देवदत्त पड़िक्कल ने उनके ख़िलाफ़ हाथ खोलने की ज़िम्मेदारी ली। उन्होंने एक छक्का लगाया, लेकिन फ़िर एक नक्कल-बॉल लेगकटर आया, जो कि नारायण की उंगलियों से अपेक्षा से अधिक धीमी गति से निकला था। ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के स्मार्ट स्टैट्स ने आउट होने से ठीक पहले राजस्थान रॉयल्स के लिए 194 के स्कोर की भविष्यवाणी की थी। विकेट ने इसे 191 पर ला दिया। जब पारी के 18वें व नारायण के आख़िरी ओवर में रियान पराग ने हिट करने की कोशिश में आउट हुए तो अनुमानित स्कोर 225 से 223 पर आ गया।
अब आप कह सकते हैं कि इसमें बहुत कुछ शामिल है, लेकिन जब युज़वेंद्र चहल ने दूसरी पारी का 17वां ओवर शुरू किया, तो कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) जीत के लिए 65.79% के साथ पसंदीदा टीम थी, लेकिन इसके अंत तक उनके पास 9.49% मौका था।
मैच के बाद केकेआर के कोच ब्रैंडन मक्कलम ने बताया कि चहल उनकी टीम के लिए कितना बड़ा ख़तरा हो सकते हैं। इस संबंध में टीम के खिलाड़ियों के बीच विस्तार से चर्चा भी हुई थी। मक्कलम ने चहल को राजस्थान की जीत का श्रेय देने के साथ-साथ मैच के अंतिम ओवरों में केकेआर के बल्लेबाज़ों पर भी हार का ठीकरा फोड़ा। मक्कलम ने कहा, "शायद चार ओवर बाक़ी थे, हम ड्राइविंग सीट पर मज़बूती से बैठे थे। फ़िर कुछ मूर्खतापूर्ण ग़लतियां और दबाव को न संभाल पाने की क़ीमत हमें चुकानी पड़ी।"
"चार ओवर में 40 रनों की दरकार थी और हमारे हाथ में छह विकेट बचे हुए थे। ऐसी स्थिति में अब मैच जीतने के प्रबल दावेदार थे, लेकिन इसका श्रेय चहल को जाता है। वह न सिर्फ़ एक शानदार गेंदबाज़ हैं, बल्कि वह उन लोगों में से एक हैं, जिन्हें दबाव की स्थिति परेशान नहीं करती है। हमने बैठकों में इस बारे में विस्तार से बात की कि वह कितना बड़ा ख़तरा साबित हो सकते हैं और हम खेल के महत्वपूर्ण क्षणों में उन्हें विकेट नहीं देना चाहते थे। अगर उस ओवर को दोबारा खेलने का मौक़ा मिलता तो हम उसे अलग तरीक़े से खेलते और तेज़ गेंदबाज़ों पर आक्रमण करने के लिए जाते।"
शायद इस तरह से विकेट गिरे जिससे मक्कलम ज़्यादा परेशान हुए। वेंकटेश अय्यर और श्रेयस अय्यर दोनों फ़्लाइट में चूके। यह दोनों गेंद क्रमशः गुगली और लेग ब्रेक थी।
हालांकि, दो विकेट गिरने के बाद मक्कलम के पास अभी जीत की उम्मीद बरक़रार थी। पैट कमिंस पूरे आईपीएल में संयुक्त रूप से सबसे तेज़ अर्धशतक बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं, जो उन्होंने इस प्रतियोगिता में पहले मारा था। श्रेयस का विकेट गिरने पर कमिंस का आना तय था, लेकिन स्पिन के ख़िलाफ़ उनका रिकॉर्ड ठीक वही है जो उन्हें ऑलराउंडर बनने से रोकता है। सभी टी20 क्रिकेट में, उनका स्पिन के ख़िलाफ़ 87.75 का स्ट्राइक रेट और 10.75 का औसत है, जबकि पेस के ख़िलाफ़ यह क्रमशः 155.71 और 20.7 का है।
मक्कलम कमिंस को पेस के सामने उतारना चाहते थे, इसलिए उन्होंने कमिंस को चहल से बचाने की कोशिश की। इसलिए शिवम मावी को कमिंस से पहले भेजा गया। हालांकि, मावी ने पहली ही गेंद को हवा में खेल दिया, जिस वजह से कमिंस को चहल की आख़िरी गेंद खेलने के लिए मैदान में आना पड़ा और पहली ही गेंद पर उन्हें पवेलियन की राह भी पकड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
कमिंस गूगली की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन चहल वास्तव में हैट्रिक के लिए भी बेताब नहीं थे। यहां भी, रॉयल्स अधिक व्यावहारिक तौर पर खेल रहे थे। चहल ने कहा कि बाद में वह एक डॉट गेंद के साथ ख़ुश हो जाते, लेकिन वह कमिंस के पाले में गेंद नहीं करना चाहते थे। लखनऊ सुपर जायंट्स के विरुद्ध खेले गए मुक़ाबले की यादें चहल के ज़हन में अभी भी ताज़ा थीं, जहां वह 18वें ओवर में लालची हो गए। उन्होंने नंबर दस के बल्लेबाज़ को गुगली गेंद डाली, जिसका खामियाज़ा उन्हें छक्का खाकर भुगतना पड़ा। इसके परिणाम स्वरूप स्कोर का बचाव करने के लिए डेब्यू कर रहे कुलदीप सेन को अंतिम ओवर में दबाव में आकर गेंदबाज़ी करनी पड़ी।
केकेआर पसंदीदा थे, अंतिम चार में 40 की ज़रूरत थी। केकेआर के बल्लेबाज़ मुक़ाबले में पहले ही चहल की धुनाई कर चुके थे। नारायण के विपरीत, अपना अंतिम ओवर शुरू करने से पहले यह मैच चहल के लिए एक साधारण मैच ही था। यह कहना सुविधाजनक है कि केकेआर के बल्लेबाज़ों को चहल के ओवर को संभलकर खेलना चाहिए था। अपने सेट बल्लेबाजों को एक ऐसे गेंदबाज़ को संभलकर खेलने के लिए कहना हास्यास्पद लगता है, जिसके आंकड़े 3-0-38-1 हों। हालांकि मक्कलम चहल की प्रतिभा को जानते हैं। उन्होंने कहा, "जब दबाव हो तो आप चहल जैसे अच्छे खिलाड़ियों को खेल में प्रवेश नहीं करने दे सकते। वह अभी बहुत अच्छे हैं। हमने क्रिकेट का अच्छा खेल खेला लेकिन हमने कुछ मूर्खतापूर्ण ग़लतियां कीं। जॉस बटलर ने एक शतक बनाया, युज़ी चहल ने एक हैट्रिक सहित पांच विकेट अपने नाम किए, और हम सिर्फ़ सात रन से हार गए। इसलिए हमने अच्छा खेल खेला, लेकिन हम दूसरे स्थान पर रहे।"
केकेआर अपने आज़ादी के साथ खेलने के तरीक़े को नहीं छोड़ेंगे। लेकिन मक्कलम शायद उनसे यह सोचने के लिए कहेंगे कि क्रिस गेल, कायरन पोलार्ड या आंद्रे रसल, चहल के उस ओवर में क्या रुख़ अपनाते?

सिद्धार्थ मोंगा ESPNcricinfo में असिसटेंट एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में ए़़डिटोरियल फ़्रीलांसर नवनीत झा (@imnot_nav) ने किया है।