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रन बनाकर ऑनलाइन ट्रोल्स पर पलटवार करना चाहते हैं मोहम्मद मिथुन

पिछले कुछ समय से उन्हें सोशल मीडिया पर गालियों और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा हैं

लगातार मैचों में कम रन बनाने के बाद मिथुन को सोशल मीडिया पर भला-बुरा कहा गया  •  Associated Press

लगातार मैचों में कम रन बनाने के बाद मिथुन को सोशल मीडिया पर भला-बुरा कहा गया  •  Associated Press

मोहम्मद मिथुन को पेशेवराना क्रिकेट के नियम पता हैं। आप अच्छा खेलेंगे तो टीम में रहेंगे और जब आपका फ़ॉर्म ख़राब हुआ तो आपको बाहर बिठाया जाएगा। लेकिन शायद मिथुन ने भी सोचा न होगा कि पिछले कुछ महीनों से उन्हें कितनी बुरी बातें सुननी पड़ी हैं।
बांग्लादेश में सोशल मीडिया पर नामचीन लोगों को गालियां सुनाना और ट्रोल किया जाना कोई नई बात नहीं है। क्रिकेटर इसका बड़ा लक्ष्य बन ही जाते हैं। हालांकि कुछ अपशब्द खिलाड़ियों के धर्म को लेकर भी कहे गए हैं वास्तव में इसका रिश्ता उनके खेल से ही होता है। इस साल बाक़ी बल्लेबाज़ों की तरह मिथुन के भी कुछ स्कोर कम रहे हैं। लेकिन उन्हें जैसी बातें कहीं गई हैं उससे उनके टीम के खिलाड़ियों को भी आश्चर्य हुआ है।
ढाका में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट में जब उनके रन नहीं बने तो उनकी कड़ी आलोचना हुई। न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ नाबाद 73 के बाद उनके बल्ले से अगले स्कोर रहे 6, 4, 1 और 0। यहां से मीम बनने का और ट्रोल होने का सिलसिला शुरू हुआ जिससे आगे बढ़कर उन्हें गालियां पड़ने लगी। यह अफ़वाह भी ज़ोर पकड़ने लगा कि कहीं न कहीं मिथुन का चयन उनसे किसी लगाव के कारण होता है। जब ज़िम्बाब्वे और ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टी20 टीम में उन्हें रखा गया तो फ़ेसबुक पर उनकी तस्वीरों पर मज़ाक़ किया गया। इनमें वो अपने टीम के साथ मुस्कुराते हुए दिखे थे।
मिथुन ने इस साल नौ वनडे में 23.16 के औसत से रन बनाए हैं और बाक़ी फ़ॉर्मेट में भी चार परियों में केवल 30 रन। पिछले महीने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ वनडे सीरीज़ में उन्होंने सिर्फ़ 51 रन बनाए। इसमें तीसरे मुक़ाबले में एक बड़ा योगदान था। तमीम इक़बाल और महमुदउल्लाह के आउट होने पर उन्होंने पारी को संभाला और नुरुल हसन को स्ट्राइक देने की कोशिश की। मिथुन की 57 गेंदों में 30 बनाने पर फिर आलोचना हुई लेकिन उनकी टीम ने इस पारी की प्रशंसा की। ज़िम्बाब्वे और ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टी20 मैचों के लिए वो बैकप ही रहे।
अब न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ पांच टी20 की श्रृंखला से वो बाहर हैं और एक मुश्किल वक़्त के बाद उन्हें टीम से एक अवकाश का मौक़ा मिला है।
"जब लोग आपका मज़ाक़ बना देते हैं तो बहुत ख़राब लगता है। ये किसी क्रिकेटर ही नहीं, किसी भी इंसान के साथ नहीं होना चाहिए," मिथुन ने ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो से कहा। "आप के परिवार के अलावा और किसी को आपके साथ ऐसी बातें करने का कोई हक़ नहीं है। शायद हमें इस माहौल से समझौता करना पड़ेगा। सीनियर खिलाड़ियों ने ऑनलाइन अपशब्दों पर खेद जताया है पर कुछ नहीं बदला है। दिनेश कार्तिक से बात करते हुए विराट कोहली ने भी कहा कि जो लोग ऐसा करते हैं उन्हें वो नज़रअंदाज़ करते हैं।"
ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ सीरीज़ में मिथुन पर ट्रोलिंग अपनी चरम सीमा पर थी। ऐसे में उनके कप्तान तमीम ने उनसे बातचीत की।
"मैंने कोच को बताया कि मुझे स्क्वेयर कट बहुत पसंद है। ऐसा होता है कि जब आप ख़राब फ़ॉर्म में हों तो आप अपने पसंदीदा शॉट पर भी आउट होते हैं। ज़िम्बाब्वे में ऐसा ही हो रहा था," मिथुन ने कहा। "तमीम भाई ने मुझे समझाया कि शायद मैं इस बारे में ज़्यादा सोच रहा था। शायद गालियों और ट्रोलिंग से मेरी मानसिकता सही नहीं थी। मुझे इससे लड़ना होगा। ऐसे में ही मैं ठंडे दिमाग़ से बल्लेबाज़ी कर पाऊंगा। तकनीकी तौर पर मुझे कोई परेशानी नहीं हैं। मैंने न्यूज़ीलैंड के दो दौरों पर रन बनाए हैं और वहां अच्छा खेलना आसान नहीं होता।"
मिथुन ने 57 गेंदों पर दो छक्के और छह चौके जड़ कर 73 बनाए और ख़राब फ़ील्डिंग के चलते बांग्लादेश ने तीन कैच टपकाए, अन्यथा 271 के लक्ष्य के सामने उन्होंने मेज़बान टीम को काफ़ी परेशान किया था। "कहते है क्रिकेट 80 प्रतिशत मेंटल गेम है और उस पारी के दौरान मैं बहुत अच्छे मानसिक स्पेस में था," मिथुन का कहना है। इस पारी के बाद तीसरे वनडे और दो टी20 में उनके बल्ले से कुल 11 ही रन बने।
मिथुन इससे पहले भी अपने करियर में जूझते नज़र आए हैं। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने से पहले वह आठ साल घरेलू क्रिकेट में तपे थे। सफ़ेद गेंद क्रिकेट में उन्हें 2014 से 2018 तक टीम से अंदर बाहर होना पड़ा और जब उन्होंने टेस्ट में पदार्पण किया तो बांग्लादेश के लिए टेस्ट से पहले रिकॉर्ड 88 प्रथम श्रेणी मैच खेल लिए थे। कुछ लोग कहते हैं उनके करियर का पतन 2019 विश्व कप में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ धीमी पारी से शुरू हुआ हालांकि मिथुन महज़ टीम के हिसाब से एंकर रोल खेल रहे थे।
मिथुन का कहना है उन्हें मानसिक तौर पर और मज़बूत होना पड़ेगा। वह अभी 30 वर्ष के हैं और कम से कम वनडे में मिडिल ऑर्डर में अहम भूमिका निभा सकते हैं। "मुझे समझना है कि मैं कहां सुधार ला सकता हूं। महामारी के बीच अपनी लय ढूंढना आसान नहीं था। आप जब लगातार क्रिकेट खेलते हैं तो मुश्किल और बढ़ती हैं। मैं इस समय का सदुपयोग करूंगा," मिथुन ने कहा। "यह मेरे करियर का अंत नहीं है। ख़राब फ़ॉर्म से गुज़र रहे खिलाड़ी का ड्रॉप होना कोई नई बात नहीं है। मैं एक बेहतर खिलाड़ी के रूप में लौटूंगा।"

मोहम्मद इसाम (@isam84) ESPNcricinfo के बांग्लादेशी संवाददाता हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सीनियर सहायक एडिटर और स्थानीय भाषा लीड देबायन सेन (@debayansen) ने किया है।