दो महान पाकिस्तानी क्रिकेटर अब्दुल क़ादिर और फ़ज़ल महमूद को पीसीबी हॉल ऑफ़ फेम में शामिल किया गया है।

महमूद एक शानदार स्विंग गेंदबाज़ थे। अपने कौशल और प्रदर्शन के दम पर वह पाकिस्तान क्रिकेट के पहले सुपरस्टार बन गए थे। उन्होंने 1952 में भारत के ख़िलाफ़ अपना पदार्पन मैच खेला था। 34 टेस्ट में महमूद ने 24.70 की औसत से 139 विकेट लिए थे। 1954 में ओवल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ उनके द्वारा किया गया प्रदर्शन क्रिकेट के लोककथाओं में काफ़ी प्रचलित है।

उनका करियर 20 साल से भी ज़्यादा चला और उसके बाद उन्होंने कई पाकिस्तानी तेज़ गेंदबाज़ों को उन्होंने प्रभावित किया। शोएब अख्तर ने उन्हें "एक मशाल वाहक" का नाम दिया था। महमूद का 2005 में 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया। साल 2012 में उन्हें पाकिस्तान क्रिकेट को दी गई सेवाओं के लिए उन्हें मरणोपरांत पाकिस्तान का दूसरा सर्वोच्च पुरस्कार नागरिक पुरस्कार हिलाल-ए-इम्तियाज़ से सम्मानित किया गया।

क़ादिर हर तरह से प्रभावशाली थे और उन्हें लेग स्पिन में महारत हासिल थी। 13 साल के टेस्ट करियर में, उन्होंने 32.80 की औसत से 236 विकेट लिए थे लेकिन संख्या अकेले किसी की प्रतिभा को विवरण नहीं दे सकती। यहां तक ​​​​कि उनका एक्शन भी काफ़ी असाधारण थी उन्होंने एक से अधिक बार स्वीकार किया कि यह बल्लेबाजों को विचलित करने के लिए तैयार किया गया था।

कादिर का 2019 में 63 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें अगले वर्ष पाकिस्तान में तीसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार सितारा-ए-इम्तियाज़ से सम्मानित किया गया। उनके बेटे उस्मान ने उनके नक्शेकदम पर चलते हुए टी20 विश्व कप में पाकिस्तानी टीम का हिस्सा हैं।

पीसीबी अध्यक्ष रमीज़ राजा ने हनीफ़ मोहम्मद, इमरान ख़ान, जावेद मियांदाद, वसीम अकरम, वकार यूनिस और ज़हीर अब्बास के साथ हॉल ऑफ़ फेम में शामिल करते हुए दोनों खिलाड़ियों की प्रशंसा की।

राजा ने कहा, "शुरुआती दिनों में फज़ल के दमदार प्रदर्शन से क्रिकेट की दुनिया में पाकिस्तान का एक अलग नाम बना और बाद में उन्होंने कई तेज़ गेंदबाज़ों के पीढ़ियों को प्रेरित किया। वहीं चालाक और जादुई अब्दुल क़ादिर ने धीरे-धीरे लुप्त हो रही कलाई की स्पिन गेंदबाज़ी की कला को पुनर्जीवित किया। फ़ज़ल महमूद और अब्दुल क़ादिर पाकिस्तान और वैश्विक क्रिकेट के लिए सर्वकालिक महान और वास्तव में उत्कृष्ट खिलाड़ी थे।"