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डबल सेंचुरी, डबल इरादा: पड़िक्कल की कप्तानी वाली भूख और भारत से खेलते रहने का सपना

अपना पहला प्रथम श्रेणी दोहरा शतक लगाने के बाद कर्नाटक के कप्तान ने कहा कि वह इस बार दोहरे शतक से चूकना नहीं चाहते थे

नीरज पाण्डेय
Feb 16, 2026, 4:11 PM • 21 hrs ago
Devdutt Padikkal celebrates after scoring a double-century, Karnataka vs Utharakhand, Ranji Trophy semi-final, 2nd day, Lucknow, February 16, 2026

पड़िक्कल ने 330 गेंदों में 232 रन बनाए  •  Tanuj Pandey/Ekana

कर्नाटक और उत्तराखंड के बीच खेले जा रहे रणजी ट्रॉफ़ी सेमीफ़ाइनल के दूसरे दिन कर्नाटक के कप्तान देवदत्त पड़िक्कल ने अपना पहला प्रथम श्रेणी दोहरा शतक लगाया। 330 गेंदों में 232 रनों की पारी खेलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए पड़िक्कल ने कहा कि वह इस बार दोहरे शतक का मौक़ा नहीं चूकना चाहते थे। इससे पहले पड़िक्कल का उच्चतम स्कोर 193 रन था, जो उन्होंने 2023-24 के रणजी ट्रॉफ़ी के दौरान पंजाब के ख़िलाफ़ बनाया था। हालांकि इस दौरान वह अपने दोहरे शतक से चूक गए थे
पड़िक्कल ने कहा, "दोहरा शतक बनाना हमेशा शानदार बात होती है। जाहिर तौर पर हमेशा आपको ऐसे मौक़े नहीं मिलते हैं। तो मैं काफ़ी खुश हूं कि मैं ऐसा कर पाया। पंजाब के ख़िलाफ़ 193 पर आउट होकर मैंने मौक़ा गंवाया था और वह पारी आज भी मुझे याद है। आज जब मैं दोहरे शतक के क़रीब पहुंचा तो मैंने ये पक्का किया कि आज मुझे ये मौक़ा नहीं चूकना है।"
इस मैच के लिए काली मिट्टी वाली पिच दी गई थी, जिस पर घास की एक अच्छी परत भी देखने को मिली। उत्तराखंड के कोच ने यह तो भांप लिया था कि यह पिच बल्लेबाज़ी के लिए अच्छी रहने वाली है, लेकिन फिर भी उन्होंने कर्नाटक को पहले बल्लेबाज़ी के लिए आमंत्रित कर दिया। कर्नाटक ने पहले दो दिनों में इस न्यौते का पूरा लाभ लिया है। बल्लेबाज़ी के लिए अनुकूल परिस्थितियों में भी अक्सर देखने को मिलता है कि बल्लेबाज़ ग़लतियां कर जाते हैं, लेकिन पड़िक्कल ने कोई गल़ती नहीं की।
उन्होंने कहा, "आपको अपनी भूख बनाए रखनी होती है। आपको ख़ुद को यह याद दिलाते रहना होता है कि ऐसे मौक़े रोज नहीं आते। रणजी सीज़न में आपको कई कठिन पिचों पर खेलना होता है। तो जब आपको मदद करने वाली पिच मिले तो आपको उसका पूरा लाभ लेना होता है। यह ज़रूरी है कि आप ऐसी परिस्थितियों का लाभ लें और बड़ा स्कोर बनाएं। मैं बहुत ख़ुश हूं कि टीम में सारे लोग सज़ग थे और उन्होंने रन बनाने का मौक़ा नहीं गंवाया।"
मध्य प्रदेश के ख़िलाफ़ मिली हार के बाद कर्नाटक की टीम में बदलाव हुए और पड़िक्कल को सीज़न के बीच में ही मयंक अग्रवाल की जगह कर्नाटक का रणजी कप्तान बनाया गया। करुण नायर और केएल राहुल जैसे सीनियर दिग्गजों के मौज़ूद होने के बीच युवा पड़िक्कल को कप्तान बनाए जाने का फैसला काफ़ी बड़ा था।
यह जद्दोजहद हमेशा रही है और सबको पता है कि वर्तमान समय में जिस तरह की क्रिकेट खेली जा रही है, प्रतिस्पर्धा काफ़ी कड़ी हो चुकी है। आपको लगातार प्रदर्शन करते रहना होता है। आपका जाहिर तौर पर लक्ष्य भारत के लिए खेलना है और मैं इस सपने को हमेशा जिंदा रखता हूं। हालांकि इस बीच में मेरी कोशिश होती है कि जब मैं मैच खेलने जाऊं तो रन बनाऊं और अपनी टीम को मैच जिताऊं।
देवदत्त पड़िक्कल
कप्तानी मिलने और सीनियर खिलाड़ियों के साथ काम करने को लेकर पड़िक्कल ने कहा, "यह हमेशा शानदार होता है, जब आपके पास स्थाई और अनुभवी क्रिकेटर्स साथ खेल रहे होते हैं। इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि मैं कप्तान हूं या नहीं लेकिन इन खिलाड़ियों के साथ होने का मुझे लाभ मिलता है। जब भी मुझे दिक्कत होती है तो मैं उनके पास चला जाता हूं और वे मेरी मदद करते हैं। शुरुआती कुछ मैचों में उनका साथ होना मेरे लिए कप्तान के तौर पर किसी आशीर्वाद से कम नहीं है।"
पड़िक्कल लगातार भारतीय टीम सेटअप का हिस्सा हैं और टीम के साथ बने हुए हैं। हालांकि, साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ हुई पिछले घरेलू टेस्ट सीरीज़ में उन्हें मौक़ा नहीं मिला और वह बेंच पर ही बैठे रहे। पड़िक्कल को भी एहसास है कि अब भारतीय टीम सेटअप में बने रहना और प्लेइंग 11 में जगह बना पाना आसान नहीं रहा है।
उन्होंने कहा, "यह जद्दोजहद हमेशा रही है और सबको पता है कि वर्तमान समय में जिस तरह की क्रिकेट खेली जा रही है, प्रतिस्पर्धा काफ़ी कड़ी हो चुकी है। आपको लगातार प्रदर्शन करते रहना होता है। आपका जाहिर तौर पर लक्ष्य भारत के लिए खेलना है और मैं इस सपने को हमेशा जिंदा रखता हूं। हालांकि इस बीच में मेरी कोशिश होती है कि जब मैं मैच खेलने जाऊं तो रन बनाऊं और अपनी टीम को मैच जिताऊं।"
कप्तानी का भार पड़ने और ख़ास तौर पर कर्नाटक जैसी दिग्गज टीम का कप्तान बनने के बाद खिलाड़ी के ऊपर दबाव जरूर पड़ता है। हालांकि, पड़िक्कल ने स्वीकार किया है कि एक बल्लेबाज़ के तौर पर उनके खेल में कोई बदलाव नहीं आया है।
उन्होंने बताया, "मुझे नहीं लगता कि कप्तानी से मेरे खेल में कोई बदलाव नहीं आया है। हालांकि, इससे आपके ऊपर एक जिम्मेदारी जरूर आ जाती है। ऐसे समय पर यह ज़रूरी होता है कि आप अपने खेलने के तरीके पर प्रभाव नहीं पड़ने दें और मैं वही करने की कोशिश कर रहा हूं। "

नीरज पाण्डेय ESPNcricinfo हिंदी में एसोसिएट सब-एडिटर हैं। @Messikafan