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हॉन्‍ग कॉन्‍ग टीम की कहानी : कोई डिली‍वरी ब्‍वाॅय तो कोई स्‍कूल में शिक्षक

हाल में पिता बनने वाले हॉन्‍ग कॉन्‍ग के तीन खिलाड़ी अपने बच्‍चों तक से नहीं मिल पाए

अपने निजी जीवन में संघर्ष कर रहे हैं हॉन्‍ग कॉन्‍ग के खिलाड़ी  •  Getty Images

अपने निजी जीवन में संघर्ष कर रहे हैं हॉन्‍ग कॉन्‍ग के खिलाड़ी  •  Getty Images

पिछले तीन महीनों में हॉन्ग कॉन्ग क्रिकेट टीम का कार्यक्रम बहुत व्यस्त रहा है। टीम ने इन तीन महीनों में नामीबिया, यूगांडा, साउथ अफ़्रीका, ज़िम्बाब्वे, इंग्लैंड, जर्सी और ओमान का दौरा किया है। अब वह एशिया कप के मुख्य दौर में खेलने के लिए यूएई में हैं।
खिलाड़ियों को पता है कि इन दौरों से ना उन्हें कोई आर्थिक सुरक्षा आर्थिक मिलेगी या ना ही वैसी प्रसिद्धि। लेकिन फिर भी वे अपने खेल के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं। उनके तीन खिलाड़ी बाबर हयात, एहसान ख़ान और यासिम मुर्तज़ा हाल ही में पिता बने हैं और उन्होंने अपने बच्चों को देखा नहीं है। हां, वे वीडियो कॉल पर ज़रूर उनकी अठखेलियों को देखकर भावुक हो जाते हैं। अगर वे किसी 'बड़े टीम' के खिलाड़ी रहते तो कुछ दिन या सप्ताह के लिए क्रिकेट से ब्रेक भी ले लेते या दौरों के बीच जाकर अपने परिवार से मिल आते लेकिन ऐसा नहीं है।
ओमान में हुए एशिया कप क्वालीफ़ायर में अपने तीनों मैच जीतकर हॉन्ग कॉन्ग ने एशिया कप के लिए क्वालीफ़ाई किया और वे, भारत और पाकिस्तान के साथ ग्रुप-ए में हैं। पिछले चार साल साल में यह टीम, भारत और पाकिस्तान के साथ कभी नहीं खेली है और ना उन्हें पता है कि उनका इन 'बड़ी टीमों' के साथ अगला मैच कब होगा। हां, उन्हें यह ज़रूर पता है कि जब 2018 के एशिया कप में उन्होंने भारत को कड़ी टक्कर दी थी और वे बुधवार को भी ऐसा दोहरा सकते हैं।
उनके मुख्य कोच ट्रेंट जॉन्स्टन के सामने चुनौती यह है कि पिछले तीन महीने के 'अत्यधिक क्रिकेट' से खिलाड़ी थक ना जाएं। वह कहते हैं, "हॉन्ग कॉन्ग में कोरोना के दौरान छह बार लॉकडाउन लगा। खिलाड़ियों को लगभग एक साल तक अभ्यास नहीं मिल पाया। वे अपने घरों, पार्क और कार पार्किंग से ज़ूम कॉल के द्वारा मेंटल और कंडिशनिंग सेशन ले पाते थे। लेकिन जिस तरह से उन्होंने अपना जुझारूपन दिखाया है वह क़ाबिल-ए-तारीफ़ है। हमें एशिया कप क्वालीफ़ायर में तीन अच्छे मैच मिले और अब हमें भारत और पाकिस्तान से खेलना है।"
कोरोना का समय खिलाड़ियों के लिए सबसे मुश्किल था। हॉन्ग कॉन्ग जैसे देशों में क्रिकेट, खिलाड़ियों के लिए उनका पैशन है और उन्हें अपना घर चलाने के लिए कुछ और भी काम करना पड़ता है। वे लगातार इसमें ही संतुलन बनाने के लिए जूझते रहते हैं। कोरोना लॉकडाउन ने इन मुश्किलों को और बढ़ाया ही है।
आयरलैंड के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ जॉन्स्टन कहते हैं, "तीन या चार खिलाड़ी अपना निजी क्रिकेट कोचिंग एकेडमी चलाते हैं। अधिकतर खिलाड़ी फ़ूडपांडा और डिलीवरू कंपनियों में डिलीवरी ब्वॉय हैं। उपकप्तान किंचित शाह आभूषण कारोबार में हैं, युवा आकाश शुक्ला विश्वविद्यालय में पढ़ता है और कुछ लड़के सरकारी नौकरियों में प्रशासन का काम देखते हैं। सभी खिलाड़ियों ने पिछले तीन महीनों में बहुत त्याग किया है। मैं इनके परिवार का भी शुक्रिया करता हूं, जो इनकी अनुपस्थिति में घर चला रहे हैं। इनकी पत्नियों और बच्चों को इनके वापस आने का इंतज़ार है, लेकिन इन तीन महीनों में किसी भी खिलाड़ी ने नहीं कहा कि उन्हें घर जाना है।"
इस टीम का निर्माण करना भी बहुत मुश्किल रहा है। कई खिलाड़ी अच्छा खेलते हैं लेकिन उन्हें एक समय के बाद क्रिकेट को छोड़कर अपनी पढ़ाई या अन्य किसी व्यवसाय में लगना होता है क्योंकि क्रिकेट वहां कोई करियर नहीं है। पिछली बार जिस टीम ने एशिया कप खेला था उसके कई खिलाड़ी पहले ही क्रिकेट को छोड़ चुके हैं। उस समय के विकेटकीपर बल्लेबाज़ क्रिस कार्टर ऑस्ट्रेलिया में पायलट की पढ़ाई करने चले गए और अब वह किसी कंपनी में पायलट हैं।
ठीक इसी तरह उनके पूर्व कप्तान जेमी एटकिंसन अब किसी प्राइवेट स्कूल में शारीरिक शिक्षा के अध्यापक हैं। उस टूर्नामेंट में टीम के कप्तान रहे अंशुमन रथ अब भारत लौट चुके हैं और भारतीय पासपोर्ट प्राप्त कर भारत के लिए घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में खेलना चाहते हैं।
मार्क चैपमैन अब न्यूज़ीलैंड के लिए खेलते हैं क्योंकि उनके पिता न्यूज़ीलैंड से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने स्कूल और एज़ ग्रुप क्रिकेट हॉन्ग कॉन्ग में खेला लेकिन फिर ऑकलैंड पढ़ाई के लिए निकल गए और अब कीवी टीम के संभावितों में रहते हैं। वह फ़िलहाल न्यूज़ीलैंड ए टीम के साथ भारत के दौरे पर हैं।
जॉन्स्टन ने कहा कि हॉन्ग कॉन्ग के क्रिकेट के साथ ये चुनौतियां तो हैं लेकिन यही सच्चाई भी है। वह कहते हैं, "पिछले दो साल में कोई क्रिकेट ना होने के बावजूद भी क्रिकेट हॉन्ग कॉन्ग बहुत सपोर्टिव रही है, लेकिन उनकी भी एक सीमा है। खिलाड़ी भी सीमित संसाधनों में अपना और अपने परिवार का गुजारा करते हैं। कई खिलाड़ी पाकिस्तानी मूल के हैं और उन्हें अपने परिवार को चलाने के लिए पाकिस्तान पैसा भेजना होता है। मैं भी अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करता हूं कि इन्हें अपने परिवार को चलाने में कोई दिक्कत ना आए।"
जॉन्स्टन अब हॉन्ग कॉन्ग में ही रहते हैं। जब राष्ट्रीय टीम दौरे पर नहीं होती है तब जॉनसन युवा खिलाड़ियों के लिए अभ्यास कैंप चलाते हैं। वहां के अंडर-16 और अंडर-19 क्रिकेट के लिए जॉनसन के पास विशेष कार्यक्रम और संरचना है।
वह कहते हैं, "यहां पर पांच या छह टीमों की लीग चलती है। हमारे प्रीमियर लीग में अब पांच टीमें हैं, जो पहले सिर्फ़ तीन हुआ करती थी। हम 20 खिलाड़ियों का एक पूल बना रहे हैं जो हमेशा चयन के लिए उपलब्ध हों। हमारे पास अधिक खिलाड़ी नहीं हैं लेकिन इसका अपना फ़ायदा और नुक़सान दोनों है। हम खिलाड़ियों को बना नहीं सकते, उन पर बस काम कर सकते हैं।"
वह आगे कहते हैं, "हमारे पास एहसान ख़ान और यसिम मुर्तज़ा जैसे स्पिनर हैं, जो हमें 30 की उम्र की बाद मिले। हमारे दो तेज़ गेंदबाज़ 19 और 22 साल के हैं, जबकि बल्लेबाज़ी क्रम अनुभवी है। इसी तरह महिलाओं की टीम भी बन रही है, जिसमें कई स्थानीय खिलाड़ी तो कई अप्रवासी भी हैं।"
एशिया कप में टीम की उम्मीदों और संभावनाओं को लेकर जॉन्स्टन बहुत ईमानदार हैं। उन्हें पता है कि टीम यहां पर बहुत कुछ नहीं कर सकती लेकिन अगर एक या दो उलटफेर कर दे तो बहुत बड़ी बात होगी। भारत के ख़िलाफ़ पहले मैच में उनका यही लक्ष्य होगा।

शशांक किशोर ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सब एडिटर दया सागर ने किया है।