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इंग्लैंड के पास अच्छे गेंदबाज़ तो हैं लेकिन अच्छा कप्तान नहीं है: इयन चैपल

आर्चर, वुड, स्टोन और स्टोक्स बढ़िया गेंदबाज़ी क्रम को और मजबूत बनाते हैं लेकिन जो रूट में कप्तानी का कौशल नहीं है।

Jofra Archer chats to Joe Root, New Zealand v England, 1st Test, Mount Maunganui, 3rd day, November 23, 2019

अगर इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ों के पास मजबूत नेतृत्व और पर्याप्त रन नहीं होगा तो इंग्लैंड के लिए सीरीज़ जीतना काफी मुश्किल है।  •  Getty Images

इंग्लैंड को इस समर सीज़न में कुछ कठिन टेस्ट टीमों का सामना करना पड़ेगा। पहले तो वह न्यूजीलैंड के साथ टेस्ट सीरीज़ खेल रही है, जो मौजूदा समय में टेस्ट रैंकिंग में नंबर 2 की टीम है। इसके ठीक बाद उन्हें भारत के खिलाफ 5 टेस्ट मैच खेलने हैं।
इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि ये दोनों टीमें इंग्लैंड के ख़िलाफ़ एक बड़ी चुनौती पेश करने वाली हैं। इसके बाद इंग्लैंड को एशेज के लिए ऑस्ट्रेलिया जाना है, जो अभी से ही इंग्लैंड में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। इंग्लैंड एक अच्छी टीम है। टेस्ट रैंकिंग में वह वर्तमान में नंबर 3 पर काबिज़ है। लेकिन क्या उनके पास ऑस्ट्रेलिया में जीतने के लिए सही टीम बैलेंस है?
अगर ऑस्ट्रेलिया के ज्यादा उछाल वाली पिच पर सफलता पाना है तो इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया में खेले गए भारत के पिछले दो दौरों को ध्यान में रखना होगा। उन्हें भारतीय तेज़ गेंदबाज़ी के आक्रमण के जैसे ही अपनी टीम के बोलिंग लाइन-अप को तैयार करना होगा।
यदि इंग्लैंड की टीम को इस बात की और पुष्टि की आवश्यकता पड़ती है कि सफलता कैसे प्राप्त की जाए तो उन्हें अपनी टीम के पिछले इतिहास को समझना होगा। ऑस्ट्रेलिया में इंग्लैंड का तीन दौरा ऐसा है जो सबसे अलग हैं; 1932-33 का बॉडीलाइन दौरा, 1954-55 और 1970-71 का दौरा जिसमें उन्हें जीत मिली थी। उन तीनों दौरों में इंग्लैंड के द्वारा शानदार गेंदबाज़ी का मुज़ाहिरा किया गया था और साथ ही साथ बढ़िया कप्तानी भी दिखाई गई थी।
1932-33 में इंग्लैंड की तरफ से हेरॉल्ड लारवूड ने बेहतरीन गेंदबाज़ी करते हुए 19.51 की औसत से 33 विकेट लिए थे। उन्हें "नॉट्स एक्सप्रेस" के नाम से भी जाना जाता है। इस सीरीज़ में बिल वोस और गब्बी एलन की सहायता से उन्होंने डॉन ब्रैडमैन की बल्लेबाज़ी पर काफी अंकुश लगाया था। डगलस जॉर्डन ने उस वक्त ऑन-साइड फील्ड को पूरी तरह से पैक कर दिया था। हालांकि बाद में इस नीति की आलोचना भी हुई थी।
वहीं अगर 1954-55 की सीरीज़ को देखा जाए तो इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच का अंतर तेज़ गेंदबाज़ फ्रैंक "टाइफून" टायसन ने पैदा किया था। टायसन ने 20.82 की औसत से 28 विकेट लिए थे। इंग्लैंड की गेंदबाज़ी आक्रमण में ब्रायन स्टैथम और ट्रेवर बेली उनके सहयोगी थे। इंग्लैंड का नेतृत्व यॉर्कशायरमैन लेन हटन ने सफलतापूर्वक किया था, उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को परेशान करने के लिए ओवर रेट को धीमा कर दिया। उस श्रृंखला में उन्होंने टायसन की गेंदबाज़ी का बढ़िया प्रयोग किया था।
1970-71 में, जॉन स्नो ने 22.83 की औसत से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 31 विकेट लिया था और टीम को जीत दिलाने में अहम योगदान दिया था। तेज़ गेंदबाज़ी विभाग में उनके सहयोगी के तौर पर पीटर लीवर और बॉब विलिस थे। यॉर्कशायरमैन रे इलिंगवर्थ ने "डेडली" डेरेक अंडरवुड की किफायती स्पिन गेंदबाज़ी के साथ-साथ स्नो के स्पेल को काफी बढ़िया तरीके से मैनेज किया था।
उन तीनों सीरीज़ में इंग्लैंड ने एक पैटर्न के तहत सीरीज़ को जीता था, जिसमें अच्छी तेज़ गेंदबाज़ी के साथ-साथ सूझ-बूझ भरी कप्तानी शामिल था। आने वाली सीरीज़ में इंग्लैंड को उसी ओर ध्यान देना चाहिए।
जोफ्रा आर्चर, मार्क वुड और ओली स्टोन के रूप में इंग्लैंड के पास एक मजबूत तेज़़ गेंदबाज़ी की तिकड़ी है। जिमी एंडरसन दिन-रात्रि टेस्ट में काफी प्रभावशाली रहेंगे और समय-समय पर वे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ो के खिलाफ एक बढ़िया स्पेल डाल कर उन्हें परेशान कर सकते हैं। अगर किसी गेंदबाज़ को चोट लगती है तो स्टुअर्ट ब्रॉड भी काम आ सकते हैं।
ऑलराउंडर बेन स्टोक्स की प्रतिभा को अगर जोड़ दिया जाए तो इंग्लैंड के पास अपनी टीम के चयन के लिए कई अच्छे खिलाड़ी उपलब्ध हैं। बॉयो बबल की कठिनाइयों से निपटने के लिए इंग्लैंड के पास एक बड़ी टीम होगी। भारतीय टीम ने भी ऑस्ट्रेलिया के पिछले दौरे पर पर्याप्त तेज़ गेंदबाज़ो का बेंच स्ट्रेंथ तैयार रखा था, जिसके कारण उन्हें सफलता भी मिली।
इंग्लैंड के पास तेज़ गेंदबाज़ों का समूह है जो सीरीज़ जीतने में मदद कर सकता है। हालांकि उनके लिए शीर्ष क्रम की बल्लेबाजी और जो रूट की कप्तानी चिंता का विषय होनी चाहिए।
डोमिनिक सिबली और रोरी बर्न्स का ओपनिंग कॉम्बिनेशन काफी कमजोर है। अगर ये दोनों नाम गाबा में खेले जाने वाली टीम लिस्ट में दिखाई देते हैं तो पैट कमिंस, मिशेल स्टार्क और जोश हेजलवुड को खुश होना चाहिए।ऑस्ट्रेलिया की पेस तिकड़ी के कौशल को देखते हुए खराब शुरुआत इंग्लैंड के लिए काफी घातक साबित हो सकती है।
रूट की कप्तानी में अक्सर कल्पना और तर्क की कमी होती है। वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ लंबी चर्चा करने की उनकी प्रवृत्ति एलिस्टेयर कुक की सबसे खराब स्थिति की याद दिलाती है। ऑस्ट्रेलिया में कई बार ऐसा होता है जब एक कप्तान को सफलता प्राप्त करने के लिए कल्पनाशील होना पड़ता है और यह रूट में नहीं है। इंग्लैंड के पास निश्चित रूप से 1932-33, 1954-55 और 1970-71 की सफलताओं को दोहराने के लिए तेज़ गेंदबाज़ों का बढ़िया विकल्प है। हालांकि अगर तेज़ गेंदबाज़ों के साथ मजबूत नेतृत्व और पर्याप्त रन नहीं होंगे तो वे जीत नहीं पाएंगे।

इयन चैपल Espncricinfo के स्तंभकार हैं। अनुवाद Espncricinfo के सब एडिटर राजन राज ने किया है।