यॉर्कशायर नस्लवाद कांड में फंसने के बाद पहली बार इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने अज़ीम रफ़ीक़ से माफ़ी मांगी है। उन्होंने कहा कि अज़ीम जिस चीज़ से गुज़रे हैं, इसके लिए उन्हें खेद है।

रफ़ीक ने यह दावा किया था कि एक बार यॉर्कशायर में चार एशियाई खिलाड़ियों के एक समूह से वॉन ने कहा था, "आप जैसे खिलाड़ियों की संख्या यहां कुछ ज़्यादा ही हो गई है। इस बार में हमें कुछ करने की ज़रूरत है।"

अज़ीम के इस बयान के बाद बाद वॉन को आगामी ऐशेज़ के लिए बीबीसी टेस्ट मैच स्पेशल की कॉमेंट्री टीम से हटा दिया गया था।

हालांकि बीबीसी के डैन वॉकर से बात करते हुए वॉन ने एक बार फिर ज़ोर देकर कहा कि उन्हें इस तरह के शब्दों का उपयोग करने की किसी भी घटना के बारे में याद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि 2009 में ट्रेंट ब्रिज़ में रफ़ीक, आदिल रशीद और अजमल शहज़ाद जैसे खिलाड़ियों के साथ मैदान पर उतरते हुए उन्हें गर्व महसूस हुआ था। साथ ही साथ उस टीम में पाकिस्तानी खिलाड़ी राणा नावेद उल हसन भी थे।

वॉन ने कहा, "मुझे वह घटना याद नहीं है। मैं 18 साल तक यॉर्कशायर का खिलाड़ी था। मैं उस क्लब के लिए साइन करने वाला पहला खिलाड़ी था, जो उस काउंटी में पैदा नहीं हुआ था। ये मेरे आख़िरी कुछ मैच थे और मुझे यह स्पष्ट रूप से याद है कि हमारे पास यॉर्कशायर क्रिकेट क्लब का प्रतिनिधित्व करने वाले चार एशियाई खिलाड़ी थे। वहीं सचिन तेंदुलकर पहले विदेशी खिलाड़ी थे, जिन्होंने इस क्लब से खेलने के लिए हस्ताक्षर किया था।"

पिछले हफ्ते वेस्टमिंस्टर में डीसीएमएस की सुनवाई में बोलते हुए रफ़ीक़ ने संसदीय चयन समिति से कहा था कि माइकल को अपमानजनक टिप्पणी करना याद नहीं होगा क्योंकि यह उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं है।

वॉन ने स्वीकार किया कि ऐसी टिप्पणी 'आहत' करती है और अपने दावे को दोहराया कि उन्होंने कभी भी नस्लवादी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया था।