PSL में ऐतिहासिक बदलाव, अब खिलाड़ियों का चयन ऑक्शन मॉडल से होगा
दो नई टीमों के जुड़ने को ध्यान में रखते हुए रिटेंशन नियमों में भी बदलाव हुए हैं
दन्याल रसूल
19-Jan-2026 • 6 hrs ago
लाहौर क़लंदर्स मौजूदा चैंपियन हैं • AFP/Getty Images
पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) में अब ड्राफ़्ट का दौर इतिहास बनने जा रहा है। पिछले दस वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को ख़त्म कर लीग अब खिलाड़ियों को चुनने के लिए पूरी तरह 'ऑक्शन' (नीलामी) मॉडल की राह पर चलेगी। टीमों और लीग मैनेजमेंट के बीच लंबे समय तक चली खींचतान के बाद आख़िरकार इस आमूल-चूल बदलाव पर मुहर लग गई है।
PCB में इससे पहले एक बीच का रास्ता निकालने पर भी चर्चा हुई थी, जिसे ड्राफ़्ट और ऑक्शन का मिला-जुला रूप यानी 'ड्रॉफ़्शन' कहा जा रहा था। हालांकि, गहन विचार-विमर्श के बाद बोर्ड ने पुरानी व्यवस्था को जड़ से बदलने का ही फ़ैसला किया। PCB के मुताबिक़, इस क़दम का मक़सद टीमों के बीच संतुलन बनाए रखना, नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और खिलाड़ियों के लिए कमाई के ज़्यादा मौक़े देना है।
खिलाड़ियों को रिटेन करने के नियमों में भी अब बड़े फेरबदल की तैयारी है। अब तक चली आ रही व्यवस्था के मुताबिक़, सभी छह फ्रेंचाइज़ियां पिछले सीज़न के अपने अधिकतम आठ खिलाड़ियों को साथ रख सकती थीं। हालांकि, लीग में हैदराबाद और सियालकोट के रूप में दो नए क्लबों के जुड़ने से अब पुराने समीकरण काम नहीं आ रहे थे। शुक्रवार को आयोजित जनरल काउंसिल की बैठक में इसी मसले पर जमकर बहस हुई। जहां पुरानी टीमें अपने स्टार खिलाड़ियों के कोर ग्रुप को बचाने की ज़िद पर अड़ी थीं, वहीं नई फ्रेंचाइज़ियों की मांग थी कि नीलामी में अच्छे खिलाड़ियों का एक बड़ा पूल मौजूद होना चाहिए ताकि उन्हें भी बराबरी का मौक़ा मिले।
इस गुत्थी को सुलझाने के लिए PSL ने अब बीच का रास्ता तलाशा है। रिटेंशन की सीमा को घटाकर महज़ चार कर दिया गया है, जिसमें हर कैटेगरी से सिर्फ़ एक खिलाड़ी को साथ रखने की मंज़ूरी होगी। इसे ऐसे समझें कि अगर लाहौर क़लंदर्स शाहीन अफ़रीदी और हारिस रऊफ़ की अपनी मशहूर जोड़ी को बरकरार रखना चाहती है, तो यह तभी मुमकिन होगा जब दोनों सबसे ऊंची 'प्लैटिनम कैटेगरी' का हिस्सा न हों। नियमों के मुताबिक़, इन चार रिटेंशन में प्लैटिनम से सिर्फ़ एक खिलाड़ी चुनने की इजाज़त होगी और यही सख़्त फ़ॉर्मूला डायमंड, गोल्ड और सिल्वर कैटेगरी पर भी लागू होगा। फ़िलहाल यह साफ़ नहीं है कि बोर्ड ने किस खिलाड़ी को किस कैटेगरी में जगह दी है, इसका आधिकारिक ऐलान होना अभी बाक़ी है।
जो खिलाड़ी रिटेन नहीं किए जाएंगे, वे ओपन पूल में चले जाएंगे और वहां से हैदराबाद और सियालकोट उन्हें चुन सकेंगी। ऑक्शन से पहले इन दोनों नई फ्रेंचाइज़ियों को चार-चार खिलाड़ियों को साइन करने की इजाज़त होगी, ताकि वे मौजूदा छह फ्रेंचाइज़ियों के बराबर स्थिति में आ सकें। यह साफ़ नहीं किया गया है कि इन खिलाड़ियों का चयन टर्न-बाय-टर्न ड्राफ़्ट सिस्टम के ज़रिये होगा या किसी और प्रक्रिया से।
लीग के नए नियमों के तहत हर टीम को नीलामी की प्रक्रिया से इतर सीधे एक खिलाड़ी को अपने साथ जोड़ने (डायरेक्ट साइनिंग) की छूट भी दी जाएगी। इसके साथ ही टीम के बजट यानी 'पर्स' की रक़म में भी बड़ा इज़ाफ़ा किया गया है। इसे 11 लाख डॉलर से बढ़ाकर अब 16 लाख अमेरिकी डॉलर कर दिया गया है। हालांकि, डायरेक्ट साइनिंग का विकल्प सिर्फ़ उन्हीं विदेशी या नए सितारों के लिए खुला रहेगा जो पिछले सीज़न PSL का हिस्सा नहीं थे।
इन सुधारों को PSL के इतिहास में खिलाड़ियों की भर्ती के लिहाज़ से अब तक का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। रिटेंशन की संख्या में कटौती और नियमों में इस तब्दीली के बाद खिलाड़ियों की भारी अदला-बदली देखने को मिल सकती है। अतीत में PCB अफ़सरों और फ्रेंचाइज़ियों के बीच इन बदलावों को लेकर तीखी बहस और विरोध भी हुआ था, यही वजह है कि इस अंतिम फ़ैसले तक पहुंचने में उम्मीद से ज़्यादा वक़्त लगा।
फिलहाल ऑक्शन की सटीक तारीख़ का इंतज़ार है, लेकिन मुल्तान सुल्तान के मालिकाना हक़ को लेकर अभी भी धुंध छाई हुई है। PCB ने पहले संकेत दिए थे कि पिछले मालिक अली तरीन लीज़ का नवीनीकरण नहीं करेंगे और बोर्ड खुद इस सीज़न टीम की कमान संभालेगा। लेकिन हैदराबाद और सियालकोट की टीमों की बिक्री से मिली उम्मीद से ज़्यादा रक़म ने बोर्ड का इरादा बदल दिया है और अब मुल्तान सुल्तान्स को भी नीलामी की मेज़ पर रखने का फ़ैसला किया गया है। इस प्रक्रिया के लिए टेक्निकल बिड जमा करने की आख़िरी तारीख़ 30 जनवरी तय की गई है।
दन्याल रसूल ESPNcricinfo के पाकिस्तानी संवाददाता हैं. @Danny61000
