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रणजी में डेब्यू कर रहे सुवेद पारकर के शतक में दिखी रहाणे की झलक

अरमान जाफ़र और सरफ़राज़ ख़ान ने भी पारकर का बखूबी साथ दिया

दिन का खेल समाप्त होने पर पारकर नाबाद ही पवेलियन की तरफ़ लौटे  •  ESPNcricinfo Ltd

दिन का खेल समाप्त होने पर पारकर नाबाद ही पवेलियन की तरफ़ लौटे  •  ESPNcricinfo Ltd

अजिंक्य रहाणे की याद दिलाने से पहले आपको केवल सुवेद पारकर को देखना होगा।
एल्बॉ गार्ड है और फिर गेंदबाज़ को दौड़ते हुए देखते समय ठुड्डी उठे हुए बाएं कंधे को कुरेद रही है और सोमवार को, समानता शायद और भी अधिक लग रही थी क्योंकि यह रहाणे का जन्मदिन था।
लेकिन व्यवहार से परे यह प्रमुख साझा विशेषता थी - मुंबई के लिए उत्तराखंड के ख़िलाफ़ प्रथम श्रेणी शतक तक पहुंचने के बाद पारकर ने बस अपना हेलमेट उतार दिया और ड्रेसिंग रूम में अपने साथियों के लिए अपना बल्ला उठा दिया, जैसे कि उपलब्धि शायद ही मायने रखती हो।
पारकर जब बल्लेबाज़ी के लिए आए तब मुंबई 64 रन पर दो विकेट गंवा चुकी थी। दोनों सलामी बल्लेबाज़ एक अच्छी शुरुआत करने के बावजूद पवेलियन लौट चुके थे। उनके सामने सबसे पहली चुनौती लंच से पहले अपने विकेट को बचाना था और उन्होंने आठ गेंदों का सामना करते हुए सफलतापूर्वक अपने विकेट को बचा भी लिया। पृथ्वी शॉ और यशस्वी जायसवाल के आउट होने के बाद पारकर के पास साथ देने के लिए अनुभवहीन अरमान जाफ़र थे। लिहाज़ा दोनों ही बल्लेबाज़ों ने पहले मुंबई की पारी को स्थिरता प्रदान करने की योजना के अनुसार खेलते हुए अपनी साझेदारी के दौरान पहली 32 गेंदों पर सिर्फ़ 16 रन जोड़े।
इसे देखते हुए पारी में 20 ओवर गुज़र जाने के बाद उत्तराखंड के कप्तान जय बिस्ता आकाश मधवाल को आक्रमण पर लेकर आए और छोटी गेंदों की रणनीति के साथ गेंदबाज़ी करने की योजना बनाई गई। दोनों दाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के लिए आकाश मधवाल को राउंड द विकेट गेंदबाज़ी करने के लिए कहा गया, इसके साथ ही लेग गली, फ़ाइन लेग, बैकवर्ड शॉर्ट लेग और एक डीप स्क्वायर लेग के साथ फ़ील्ड सजाई गई।
मधवाल ने फ़ील्ड और रणनीति के अनुरूप शॉर्ट गेंदबाज़ी करना शुरु की लेकिन दोनों ही बल्लेबाज़ों ने सफलतापूर्वक मधवाल की छोटी गेंदों का सामना किया। पारी के 23वें ओवर में जाफ़र ने मधवाल की शॉर्ट गेंद को डीप स्क्वायर लेग की दिशा में पुल कर दिया जिसके बाद छोटी गेंदों की रणनीति पर ब्रेक लग गया। इसी के साथ काम भी पूरा हो गया था।
24 ओवरों की समाप्त के बाद पहली बार स्पिन गेंदबाज़ी को आक्रमण पर लाया गया। बाएं हाथ के गेंदबाज़ स्वप्निल सिंह ने जैसे ही राउंड द विकेट गेंदबाज़ी करते हुए छोटी गेंद फेंकी जाफ़र ने उसे छक्के के लिए पुल कर दिया।
हालांकि जाफ़र और पारकर दोनों पर क़िस्मत भी मेहरबान दिखी। 35 के निजी स्कोर पर खेल रहे जाफ़र ने शरीर से दूर ड्राइव किया और गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेती हुई पहली स्लिप के काफ़ी दूर चौके के लिए चली गई। इसके अगले ही और मुंबई की पारी के 36वें ओवर में स्वप्निल ने अपने ही फ़ॉलो थ्रू में पारकर का कैच टपका दिया। पारकर उस समय 18 के निजी स्कोर पर खेल रहे थे। इस मुक़ाबले से पहले तक सिर्फ़ छह प्रथम श्रेणी मुक़ाबले खेलने वाले जाफ़र और एक भी मुक़ाबला ना खेलने वाले पारकर को क़िस्मत की ऐसी मेहरबानी चाहिए थी।
43 वें ओवर के आरंभ में जब दोनों की साझेदारी 164 गेंदों में 75 रनों पर पहुंच गई तब जाफ़र और पारकर दोनों ने अपने गियर बदल लिए। दीक्षांशु नेगी और मयंक मिश्रा द्वारा किए अगले तीन ओवरों में दोनों ने 31 रन बटोरे। एक तरफ़ जहां जाफ़र ने पुल, लॉफ़्ट और ड्राइव किए तो वहीं पारकर ने दो बार गेंदबाज़ के सिर के ऊपर से शॉट खेलते हुए गेंद को सीमारेखा के पार पहुंचाया। इसी प्रक्रिया में जाफ़र ने अपना अर्धशतक भी पूरा कर लिया। वह ग्रुप स्टेज़ में मुंबई के लिए ओडिशा के ख़िलाफ़ 125 रनों की पारी भी खेल चुके थे। हालांकि जाफ़र अर्धशतक पूरा करने के बाद क्रीज़ पर ज़्यादा समय व्यतीत नहीं कर पाए और 60 के निजी स्कोर पर दीपक धपोला की गेंद पर दूसरी स्लिप में कैच थमा बैठे। जाफ़र ने पारकर के साथ मिलकर 37.2 ओवरों में कुल 117 रन जोड़ दिए थे। लेकिन अभी और भी बहुत कुछ होना बाक़ी था क्योंकि अब मैदान में सरफ़राज़ ख़ान की एंट्री होने वाली थी।
सरफ़राज़ ने अपनी पहली सात गेंदों पर ही तीन चौके जड़ दिए और 17 के निजी स्कोर पर पहुंच गए। हालांकि इसके बाद उत्तराखंड की अनुशासित गेंदबाज़ी ने सरफ़राज़ को ख़ामोश रखा लेकिन आप कब तक सरफ़राज़ की बल्ले की आवाज़ को दबा कर रख सकते थे। पहली 50 गेंदों में 24 रन बनाने वाले सरफ़राज़ ने अगले 26 रन बनाने के लिए 23 गेंदों का सामना किया। 24 गेंदों में ही अपना अर्धशतक पूरा कर लिया।
दूसरे छोर पर पारकर अपने शतक की ओर बढ़ रहे थे लेकिन वह किसी प्रकार की हड़बड़ी में नहीं थे। पारकर जब 94 के निजी स्कोर पर थे तब मधवाल की एक छोटी और वाइड गेंद को आता देख पारकर ने डीप बैकवर्ड प्वाइंट को उसके बाईं ओर बीट करते हुए अपने पंच शॉट से चौका जड़ दिया। तीन गेंदों के बाद मधवाल ने स्टंप्स की लाइन में फ़ुल गेंद फेंकी जिसे पारकर ने एक बार फिर रहाणे की झलक दिखाते हुए वाइड मिडऑन की तरफ़ खेल दिया। मिडऑन ने गेंद का बाउंड्री लाइन तक पीछा किया लेकिन तब तक पारकर का बल्ला लहराने का वक़्त आ गया था। चार ओवरों के बाद जब दिन के खेल की समाप्ति पर पारकर नाबाद रहते हुए पवेलियन की ओर गए तब वह 218 गेंदों में 104 रनों के स्कोर पर पहुंच गए थे। सरफ़राज़ भी 104 गेंदों में 69 के स्कोर पर नाबाद ही पवेलियन की ओर लौटे। दोनों बल्लेबाज़ों की नाबाद और जाफ़र की अर्धशतकीय पारी ने मुंबई को 3 विकेट के नुकसान पर 304 के स्कोर पर पहुंचा दिया था।
जाफ़र अपने चाचा वसीम जाफ़र के भतीजे के तौर पर जाने जाते हैं लेकिन जैसा कि उन्होंने सन् 2010 में 13 वर्ष की उम्र में किया था, उन्होंने जिस टेम्परामेंट के साथ उत्तराखंड के ख़िलाफ़ बल्लेबाज़ी की, वह अपनी कुशलता के बलबूते कई रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं।
इस मुक़ाबले में आने से पहले सरफ़राज़ रणजी के इस सत्र में 275, 63, 48 और 165 रनों की पारियां खेल कर आए थे। दिन की समाप्ति के बाद इस सत्र में उनके खाते में 155 के औसत से 620 रन हो गए और इस सीज़न सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ चेतन बिष्ट से वह सिर्फ़ चार रन ही पीछे थे।
अपने प्रथम श्रेणी के पदार्पण मुक़ाबले में शतक जड़कर पारकर ने वह उपलब्धि हासिल कर ली है जो रहाणे ने 14 वर्ष पहले हासिल की थी। रहाणे के अलावा पारकर ने अपने कप्तान पृथ्वी शॉ, सचिन तेंदुलकर और अपने कोच अमोल मजूमदार के क्लब को जॉइन कर लिया है।
पारकर सिर्फ़ 21 वर्ष के हैं, जाफ़र 23 और सरफ़राज़ 24 वर्ष के हैं। क्या पता भविष्य के गर्भ में क्या छुपा हुआ है?

हिमांशु अग्रवाल ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में एडिटोरियल फ़्रीलांसर नवनीत झा ने किया है।