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शम्स मुलानी - घरेलू क्रिकेट का जांबाज़ स्पिन गेंदबाज़

शम्स भारतीय टीम में जगह बनाना चाहते हैं लेकिन इसके लिए वह किसी भी जल्दबाज़ी में नहीं हैं

मुलानी को हाल ही में इंडिया ए की टीम में भी शामिल किया गया था  •  ESPNcricinfo Ltd

मुलानी को हाल ही में इंडिया ए की टीम में भी शामिल किया गया था  •  ESPNcricinfo Ltd

2022 की शुरुआत के बाद से मुंबई के बाएं हाथ के बल्लेबाज़ शम्स मुलानी ने घरेलू प्रथम श्रेणी मैचों में 140 विकेट लिए हैं। इस अवधि के दौरान कम से कम 500 ओवर फेंकने वाले गेंदबाज़ों में यह सबसे अधिक है और यह तीसरे सबसे अच्छे स्ट्राइक रेट पर आया है।
इनमें से एक तिहाई विकेट 2021-22 के संक्षिप्त रणजी ट्रॉफ़ी सीज़न में केवल छह मैचों में आए, जो फ़रवरी 2022 में शुरू हुआ और जून में उसका दूसरा चरण था। मुलानी को उस सीज़न में अग्रणी विकेट लेने वाले गेंदबाज़ होने के लिए माधवराव सिंधिया पुरस्कार मिला था।
उस बेहतरीन टूर्नामेंट से पहले 2018-19 में अपने पदार्पण के बाद से मुलानी ने दस प्रथम श्रेणी मैच में 34.46 की औसत से 28 विकेट मिले थे। लेकिन इसके बाद के सीज़न ने अपने करियर में काफ़ी बेहतरीन औसत से गेंदबाज़ी की है। पहले सीज़न के बाद उनका औसत 16.74 का रहा है।
इस तरह के प्रदर्शन का मुख्य कारण क्या था ?
इस साल असम के ख़िलाफ़ मुंबई के अंतिम ग्रुप-स्टेज रणजी मैच से पहले मुलानी का कहना था कि फ़िटनेस इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष रही है। "तीन साल से मैं मुंबई के स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग [एस एंड सी] कोच विशाल चित्रकार के साथ मिलकर काम कर रहा हूं। मुझे IPL के दौरान भी एस एंड सी कोचों से बहुत मदद मिली।"
मुलानी को ऐसा लगा कि अगर उन्हें किसी लंबे सीज़न में सभी मैच खेलना है तो उनकी बॉडी भी उसी हिसाब से फ़िट होनी चाहिए। वह कहते हैं,"मैं पूरी कोशिश करता हूं कि मैं पूरे सीज़न में एक भी मैच न चूकूं। साथ ही अच्छे फ़िटनेस के बिना एक लंबे सीज़न में निरंतरता के साथ प्रदर्शन करना भी काफ़ी कठिन है।"
"लेकिन विशाल मेरे शरीर को अच्छी तरह से जानते हैं। उन्हें पता है कि मेरी रिकवरी कितने समय में होती है या फिर मेरे फ़िटनेस के लिए कौन सा प्लान सबसे ज़्यादा कारगर होता है। मैंने यह फ़ैसला कर लिया था कि अगर मुझे अपने खेल को एक अलग स्तर तक लेकर जाना है तो मुझे खु़द में कई बदलाव लेकर आने होंगे। विशाल ने वास्तव में इस पूरी प्रक्रिया में काफ़ी मदद की है। इसके अलावा दीपक पार्टेकी (जो राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में भी काम करते हैं) जैसे अन्य कोच भी मददगार रहे हैं।"
2022 से पहले मुलानी ने 15 पारियों में केवल दो बार 30 या उससे अधिक ओवर फेंके थे। लेकिन 2021-22 के उस रणजी सीज़न के दौरान, उन्होंने 11 पारियों में तीन बार 30 से अधिक ओवर डाले।
इसमें उस सीज़न के रणजी फ़ाइनल की पहली पारी में उन्होंने 63.2 ओवर की गेंदबाज़ी की थी।
मुलानी कहते हैं, "अपने पदार्पण सीज़न के दौरान मैं दूसरी पारी में थकान महसूस करता था। मुझे एहसास हुआ कि मुझे अपने शरीर की रिकवरी पर ज़ोर देना होगा क्योंकि चार दिवसीय खेल में यह बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आपने पहली पारी में बहुत अधिक गेंदबाज़ी की है और दूसरी पारी में उस प्रयास को दोहराना चाहते हैं, तो उस समय तक आपकी फ़िटनेस भी वैसी ही होनी चाहिए। इसके लिए आपको अभ्यास के दौरान काफ़ी समय देना होगा और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर भी काफ़ी ध्यान देना होगा।
"यह ऐसी चीज़ है जिस पर मैंने अपने फ़िजियो, ट्रेनर और मालिश करने वाले की मदद से बहुत काम किया है। जब भी मुझे कुछ समय मिलता है तो मैं कुछ रिहैब करता हूं। इससे मुझे लंबे स्पेल में गेंदबाज़ी करने के बाद रिकवरी करने में मदद मिलती है।"
जिस तरह से मुलानी ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपने लिए जगह बनाई है, उसके लिए उन्हें ख़ुद पर गर्व है। उन्हें लंबे स्पेल में गेंदबाज़ी करना भी पसंद है। उनका कहना है कि वह अपने रास्ते में आने वाले किसी भी अवसर के लिए तैयार रहना चाहते हैं।
वह कहते हैं, "घरेलू क्रिकेट खेलना और अनुभव करना मेरे लिए वास्तव में महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है कि भारतीय घरेलू सर्किट में जो प्रतिस्पर्धा है, वह कहीं और नहीं मिल सकती है। लोगों की यह भी धारणा है कि यहां की पिचों पर हमेशा स्पिनरों के लिए टर्न होता है, और इसलिए वे बहुत सारे विकेट हासिल करते हैं। लेकिन कुछ पिचें ऐसी भी होती हैं, जो स्पिनरों के लिए मददगार नहीं होती हैं। अगर आप वहां पर पिच से मदद चाहते हैं तो आपको लगातार गेंदबाज़ी करनी होती है। इसलिए लंबे स्पेल में गेंदबाज़ी करना और कभी-कभी एक पारी में 30 या 40 ओवर करना मेरे लिए वास्तव में महत्वपूर्ण है।"
मुंबई के पूर्व बल्लेबाज़ अमोल मुजुमदार ने जून 2021 में टीम के कोच का पद संभाला था। उनका कार्यकाल मुलानी के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। उन्होंने मुलानी के अंदर आत्मविश्वास की भावना को बनाए रखने में काफ़ी मदद की।
वे कहते हैं, ''अमोल सर के साथ मेरा पहला सीज़न काफ़ी शानदार रहा। जब उन्होंने मेरी गेंदबाज़ी के बारे में कुछ चीज़ें देखीं और मुझे बताया तो वह मेरे लिए काफ़ी बहुत मददगार रहा। उन्होंने मुझे तक़नीकी सुझाव दिए और मेरे मानसिकता में भी कई बदलाव किए, जो मेरे लिए काफ़ी अहम था। इसका मेरे ऊपर काफ़ी बड़ा फर्क पड़ा। उदाहरण के लिए उन्होंने मुझसे कहा कि अगर मुझे एक बेहतर गेंदबाज बनना है, तो मुझे बस कोशिश करनी होगी कि मैं बल्लेबाज़ों के ख़िलाफ़ अधिक आक्रामक होते हुए, गेंदबाज़ी करूं।
"उनसे बात करने से ही मुझे बहुत आत्मविश्वास मिलता था। वह हमेशा चाहते थे कि मैं अपने कौशल से बल्लेबाज़ों को आउट करूं। जैसे कि पिच से मदद लेते हुए बल्लेबाज़ों को आउट करने के बजाय सपाट ट्रैक पर भी अच्छी गेंदबाज़ी करूं। अमोल सर ही थे जिसने कहा कि मुझे बस बेहतर करना है। जिन्होंने मुझसे कहा था कि मुझे प्रथम श्रेणी क्रिकेट में दबदबा बनाना है।"
मुजुमदार की सलाह और प्रोत्साहन के परिणामस्वरूप मुलानी ने फरवरी 2022 में ग्रुप-स्टेज गेम में अहमदाबाद में गोवा के ख़िलाफ़ पिछले दो वर्षों में अपना सबसे यादगार प्रदर्शन किया। मुंबई पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 163 रन पर आउट हो गई थी और गोवा ने अपनी पारी में दुगना स्कोर बनाया। मुलानी ने दूसरी पारी में 107 रन देकर 6 विकेट लिए, लेकिन वह अपने चौथी पारी के प्रदर्शन को बेहतर मानते हैं। उस वक़्त मुंबई 231 रन का बचाव कर रही थी और जीत के लिए गोवा को "अंतिम दिन मुश्किल से लगभग 60 ओवर" में आउट करना था। उस पारी में मुलानी ने 60 रन देकर 5 विकेट लिए।
मुलानी उस पांच विकेट के बारे में कहते हैं, "यह सबसे अलग था। मेरे लिए वह हमेशा सबसे विशेष रहेगा। हमने एक गेंदबाज़ी इकाई के रूप में शानदार प्रदर्शन किया था और मैं योगदान देने में सक्षम था।"
मुलानी मानते हैं कि उनके करियर में प्रवीण आमरे का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मुलानी का कहना है कि आमरे ने अपने शुरुआती दिनों में उनकी बल्लेबाज़ी पर काफ़ी काम किया। उसी का फ़ायदा उठाते हुए मुलानी ने 2021-22 के बाद से 37 प्रथम श्रेणी पारियों में आठ अर्धशतक लगाए हैं।
मुलानी कहते हैं, ''आमरे सर के साथ मेरा काफ़ी पुराना नाता रहा है। मैं नौ साल की उम्र से ही शिवाजी पार्क जिमखाना में उनके साथ अभ्यास कर रहा था। उन्होंने मुझे खेल के बारे में बहुत सी बातें बताई हैं, जिसमें मानसिक रूप से तैयार होने का तरीक़ा भी शामिल है। हालांकि अब क्रिकेट सीज़न लंबा होने के कारण, मुझे (आमरे के साथ बिताने के लिए) उतना समय नहीं मिलता है।"
रवींद्र जाडेजा की तरह ही मुलानी भी नंबर सात पर बल्लेबाज़ी करते हैं और बाएं हाथ से गेंदबाज़ी करते हैं। ऐसे में यह सोचना ज़्यादा मुश्किल नहीं है कि वह जाडेजा को पसंद करते हैं।
मुलानी कहते हैं, "जिस तरह से वह मैदान पर प्रदर्शन करते हैं। मैं अगर उसका 10 फ़ीसदी प्रदर्शन भी कर सकूं तो काफ़ी है। अगर मैं भारतीय टीम में ठीक उसी काम को कर सकूं, जो वह करते हैं, तो यह मेरे लिए बड़ी बात होगी।"
"लेकिन अगर आप मुझसे विशेष रूप से केवल गेंदबाज़ी के बारे में पूछते हैं, तो मुझे [आर] अश्विन भाई और नेथन लायन को देखने में मज़ा आता है। उनके बारे में जो बात सबसे अलग है, वह है उनकी विविधता और नियंत्रण। जब भी टीवी पर कोई टेस्ट आता है, जिसमें वे शामिल होते हैं, तो मैं उसे देखते हुए काफ़ी कुछ सीखने का प्रयास करता हूं। मैं देखता हूं कि वे किस तरह से अपनी गति बदल रहे हैं, वे किस लेंथ पर गेंदबाज़ी कर रहे हैं और उन्होंने अपने लिए क्या फ़ील्ड रखी है।"
इसी महीने की शुरुआत में उन्होंने इंडिया ए के लिए अपना पहला मैच खेला था। इसमें उन्होंने दूसरी पारी में 60 रन देकर पांच विकेट लिया था।
मुलानी कहते हैं, ''जब मुझे भारत ए के लिए अपनी जर्सी मिली, तो मैं समझ नहीं पाया कि मेरे दिमाग़ में क्या चल रहा था। यह जर्सी भारतीय टीम की जर्सी से काफ़ी मिलती-जुलती थी।"
भारतीय टीम में मौक़ा मिलने के बारे में बात करते हुए मुलानी कहते हैं कि उन्हें कोई जल्दी नहीं है, हालांकि वह अगले महीने 27 साल के हो जाएंगे। लेकिन अभी भी वह ज़्यादा दूर के बारे में नहीं सोचना चाहते हैं।
वह कहते हैं, "मेरा काम सिर्फ प्रदर्शन करना है। चयन में मेरी कोई भूमिका नहीं है। मैं यह नहीं सोचता कि मुझे कभी भारतीय टीम के लिए कॉल आएगा या नहीं। यह मेरे लिए अनावश्यक तनाव है। मैं जानता हूं कि अगर मैं अच्छा प्रदर्शन करता रहा तो मैं सुर्खियों में रहूंगा और मुझे मौक़ा मिलेगा।"

हिमांशु अग्रवाल ESPNcricinfo के सब एडिटर हैं