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क्या है नेट रन रेट? कैसे होती है इसकी गणना?

बड़े टूर्नामेंट में नेट रन रेट की होती है अहम भूमिका

Virat Kohli talks to Kane Williamson at the toss, India vs New Zealand, T20 World Cup, Group 2, Dubai, October 31, 2021

अगर अफ़ग़ानिस्तान, न्यूज़ीलैंड को हरा देता है, तो भारत के लिए नेट रन रेट काफ़ी अहम हो जाएगा  •  ICC via Getty

इस टी20 विश्व कप में नेट रन रेट (एनआरआर) का महत्व काफ़ी बढ़ गया है। जहां ग्रुप 1 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के साथ समान अंक होने के बावज़ूद कम नेट रन रेट के कारण साउथ अफ़्रीका को बाहर होना पड़ा, वहीं ग्रुप 2 में भी अगर अफ़ग़ानिस्तान, न्यूज़ीलैंड को हरा देता है तो नेट रन रेट की भूमिका अहम होगी। तो चलिए समझते हैं क्या है नेट रन रेट और अलग-अलग परिस्थितियों में कैसे इसकी गणना होती है?
नेट रन रेट का मतलब है कि एक टीम कितनी आसानी या कठिनाई से कोई जीत दर्ज करती है। अगर कोई टीम बल्लेबाज़ी करते हुए 20 ओवर में 9 के रन रेट से 180 रन बनाती है और फिर गेंदबाज़ी करते हुए 20 ओवर में 7 के इकॉनमी से सिर्फ़ 140 रन देती है, तो नेट रन रेट 2 होगा। (बल्लेबाज़ी रन रेट 9-गेंदबाज़ी रन रेट 7 = 2)
अगर कोई टीम निर्धारित ओवरों से पहले ही आउट हो जाती है, तो भी नेट रन रेट की गणना निर्धारित ओवरों के आधार पर होगी। उदाहरण के लिए 4 नवंबर को ऑस्ट्रेला और बांग्लादेश के मैच में बांग्लादेश 15 ओवर में 4.87 के रन रेट से सिर्फ़ 73 रन बनाकर आलआउट हो गया, लेकिन नेट रन रेट की गणना के समय बांग्लादेश का बल्लेबाज़ी रन रेट 3.65 माना जाएगा। (73 रन/20 ओवर=3.65)
अगर किसी मैच में बारिश या किसी अन्य वज़हों से बाधा पहुंचती है, तो नेट रन रेट का निर्धारण वास्तविक स्कोर की बजाय, पार स्कोर (डीएलएस लगने के बाद निर्धारित स्कोर) के आधार पर होगा। उदाहरण के लिए अगर टीम ए 20 ओवर में 180 रन बनाती है और बारिश होने के कारण टीम बी का लक्ष्य 15 ओवर में 150 रन कर दिया जाता है, तो नेट रन रेट का निर्धारण भी 15 ओवर में बनाए गए रनों के आधार पर होगा।
अगर कोई टीम अपना नेट रन रेट बढ़ाना चाहती है, तो वह पहले बल्लेबाज़ी करे या गेंदबाज़ी? इसका ज़वाब देना मुश्किल है। ऐसा भी हो सकता है कि कोई टीम पहले बल्लेबाज़ी करते हुए निर्धारित ओवरों में तेज़ गति से रन बनाते हुए एक बड़ा स्कोर खड़ा करे और अपना रन रेट बढ़ाए, वहीं दूसरे तौर पर कोई टीम एक बड़े लक्ष्य का निर्धारित ओवरों से कम गेंदों में उसका पीछा कर ले।
उदाहरण के तौर पर भारत और स्कॉटलैंड के बीच हुए मैच से पहले भारत का नेट रन रेट 0.073 था। उन्होंने स्कॉटलैंड द्वारा दिए गए लक्ष्य को सिर्फ़ 6.3 ओवर में ही प्राप्त कर लिया और भारत का नेट रन रेट बढ़कर 1.619 हो गया।
अगर भारत पहले बल्लेबाज़ी करता तो उसे इसी 1.619 के नेट रन रेट की प्राप्ति के लिए कम से कम 203 का स्कोर खड़ा करना होता और फिर स्कॉटलैंड को 85 के स्कोर पर आउट करना होता।
नेट रन रेट की गणना में विकेट का महत्व नहीं होता है, इसलिए देखा गया कि स्कॉटलैंड के विरुद्ध भारत ने 6 ओवर में ही 2 विकेट गंवा दिए, लेकिन बेहतर रन गति के कारण उनका नेट रन रेट बढ़ गया।
एक उदाहण और लेते हैं। 2015 वन डे विश्व कप में न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए मैच में न्यूज़ीलैंड ने ऑस्ट्रेलिया को 32.2 ओवर में 151 रन पर आलआउट कर 152 रन के लक्ष्य को 23.1 ओवर में ही हासिल कर लिया। हालांकि इस दौरान उन्होंने अपने नौ विकेट गंवा दिए, लेकिन इसका कोई ख़ास फर्क नेट रन रेट पर नहीं पड़ा। न्यूज़ीलैंड हार से बस एक कदम (एक गेंद, एक विकेट) दूर था लेकिन उनका इस मैच में नेट रन रेट 3.54 (6.56-3.02) रहा, क्योंकि उन्होंने 6.56 की रन गति से रन बनाए और सिर्फ़ 3.02 की रन गति से रन दिया।

एस राजेश ESPNcricinfo के सांख़्यिकी विभाग के संपादक हैं, अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के दया सागर ने किया है