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आंकड़े झूठ नहीं बोलते : रोहित का बल्ला चला तो मानो अफ़ग़ानिस्तान की छुट्टी

पावरप्ले में भारत ने टॉप 10 टीमों में पिछले दो सालों में सबसे ख़राब गेंदबाज़ी की है और इसमें लाना होगा सुधार

रोहि के आंकड़े हैं काफी बेहतर  •  ICC via Getty

रोहि के आंकड़े हैं काफी बेहतर  •  ICC via Getty

भारत के लिए अब इस विश्व कप में सेमीफ़ाइनल तक की राह बंद होने चली है। बुधवार को अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ अबू धाबी में मुक़ाबला विराट कोहली की टीम को एक आख़िरी मौक़ा देगा टूर्नामेंट में जीवित रहने का। भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ दो ही टी20 अंतर्राष्ट्रीय खेले हैं और दोनों विश्व कप में थे। 2010 में आशीष नेहरा ने और दो साल बाद विराट ने ख़ुद प्लेयर ऑफ़ द मैच ख़िताब के साथ भारत को जीत दिलाई। आइए देखें इस मैच से जुड़े कुछ आंकड़े।

पहले बल्लेबाज़ी करते हुए ख़राब रिकॉर्ड

इस विश्व कप में भारत दोनों मैच पहले बल्लेबाज़ी करते हुए हारा है और इसमें कोई नई बात नहीं। भारत 2018 के बाद पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 32 में सिर्फ़ 17 मैच सीधा जीता है (एक टाई के बाद सुपर ओवर से जीत उनकी 18वीं जीत थी) जबकि दूसरी पारी में बल्लेबाज़ी करते हुए उन्होंने 24 में सिर्फ़ चार मैच हारे हैं (यहां भी एक जीत सुपर ओवर के माध्यम से मिली)। इस दौरान पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 200 से अधिक बनाने पर भारत ने सारे मैच जीते हैं और 160 से कम के स्कोर पर हमेशा हार का सामना किया है। हालांकि इस विश्व कप में सूपर 12 में 16 मैच तक पहले बल्लेबाज़ी करते हुए औसतन विनिंग स्कोर रहा है 164 जिस आंकड़े को भारत भेद नहीं पाया है। एक राहत की बात है कि अफ़ग़ानिस्तान पहले बल्लेबाज़ी करना पसंद करता है। तो शायद भारत को टॉस के नतीजतन गेंदबाज़ी ही करने का मौक़ा मिलेगा।

पावरप्ले में गेंद के साथ ख़राब शुरुआत

चलिए टॉस जीत गए या अफ़ग़ानिस्तान ने बल्लेबाज़ी का फ़ैसला किया तो भी क्या? 2020 के बाद से विश्व की टॉप 10 टीमों में भारत की पावरप्ले में गेंदबाज़ी सबसे कमज़ोर रही है। भारत ने इस दौरान 20 पारियों में केवल 21 विकेट लिए हैं। उनकी औसत प्रति विकेट है 45 और औसतन गेंद प्रति विकेट 34.3। मज़े की बात है इस सूची में सबसे बेहतरीन आंकड़े हैं अफ़ग़ानिस्तान के (औसत 19.5 और 15.4 गेंदें प्रति विकेट)। विपक्षी टीमें अलग रहीं हों लेकिन भारतीय दल में किसी भी गेंदबाज़ के पिछले दो वर्षों में पावरप्ले के आंकड़े विश्वास नहीं जताते। किसी भी भारतीय गेंदबाज़ ने पांच विकेट तक नहीं लिए खेल के इस भाग में और वरुण चक्रवर्ती और मोहम्मद शमी ने तो पांच-पांच पारियों में एक भी विकेट नहीं लिया है।

फिरकी से लेंगे भारतीय बल्लेबाज़ों की परीक्षा

अफ़ग़ानिस्तान के डाले जाने वाले 20 ओवर में आठ तो तय हैं कि राशिद ख़ान और मोहम्मद नबी के होंगे। अगर पिछले मैच में चोटिल रहे मुजीब उर रहमान भी टीम में शामिल हुए तो मान लीजिए उच्च कोटी स्पिन के 12 ओवर होंगे। ऐसे में मौजूदा भारतीय टीम में स्पिन के ख़िलाफ़ साधारण रिकॉर्ड एक चिंता का विषय है। 2020 के बाद अगर आईपीएल और टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैच जोड़े जाएं तो सूर्यकुमार यादव के अलावा किसी भारतीय बल्लेबाज़ का स्ट्राइक रेट स्पिन के ख़िलाफ़ 130 से अधिक का नहीं है। सूर्या 143 की स्ट्राइक रेट से खेलते हैं और इशान किशन और रोहित शर्मा 127 और 126 से। केएल राहुल, ऋषभ पंत, हार्दिक पंड्या और विराट का स्ट्राइक रेट 104 से 112 के बीच है जबकि रवींद्र जाडेजा केवल 69 के स्ट्राइक रेट से रन बटोरते हैं। यानी अफ़ग़ानिस्तान के पास भारतीय रन गति पर अंकुश लगाने के लिए पर्याप्त संसाधन होंगे।

रोहित को अपना विराट रूप दिखाना होगा

रोहित शर्मा उन छह खिलाड़ियों में हैं जो 2007 से अब तक सारे विश्व कप मैच खेल चुके हैं। उनकी सफ़ेद गेंद क्रिकेट में महानता पर कोई सवालिया निशान नहीं लगा सकता लेकिन टी20 विश्व कप में अब तक वह 10 लगातार मैच बिना अर्धशतकीय पारी के खेल चुके हैं। मेज़बान बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मार्च 2014 में 56 उनका पिछला पचासा था। रोहित ऐसे बल्लेबाज़ हैं जो स्पिन के विरुद्ध धीमी शुरुआत करते हैं (2019 के बाद पहले 10 गेंदों पर 20.8 का औसत और 111 का स्ट्राइक रेट) लेकिन एक बार जम गए तो विपक्षी गेंदबाज़ों की तुड़ाई कर सकते हैं (पहले 10 गेंदों के बाद 58.8 का औसत और 162 का स्ट्राइक रेट)। 2018 के बाद जब रोहित 50 का आंकड़ा पार करते हैं तो भारत औसतन 198 का स्कोर खड़ा करता है। ज़ाहिर सी बात है अगर कल रोहित चल गए तो भारत को रोकना मुश्किल होगा।

देबायन सेन ESPNcricinfo में सीनियर असिस्‍टेंट एडिटर और स्‍थानीय भाषा प्रमुख हैं।