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यह महिला आईपीएल के लिए सही समय है लेकिन क्या बीसीसीआई इसके लिए राज़ी होगा?

महिला क्रिकेट को प्रायोजकों और दर्शकों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है

Player of the Match Harmanpreet Kaur has a light moment with her India team-mates Radha Yadav (L) and Jemimah Rodrigues (R), Sydney Sixers vs Melbourne Renegades, Launceston, October 24, 2021

विदेशी लीग में भारतीय महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा है  •  Sarah Reed/Getty Images

हरमनप्रीत कौर, जेमिमाह रॉड्रिग्स और पूनम यादव का करियर निकट भविष्य में कैसा होता अगर हंड्रेड और महिला बिग बैश लीग (डब्ल्यूबीबीएल) में वे नहीं खेलते? उभरती प्रतिभाओं से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलने के बाद रॉड्रिग्स और पूनम काफ़ी दिनों तक भारत की शुरुआती एकादश से बाहर थे और हरमनप्रीत की टीम में जगह पर भी कई सवाल उठाए गए थे। लेकिन दो विदेशी फ्रेंचाइज़ी लीग ने इन खिलाड़ियों को फिर से फ़ॉर्म में आने का एक बेहतरीन मौक़ा दिया है।
इसके बाद यह सवाल उठना तो लाज़मी है कि ऐसा क्या है जो विश्व क्रिकेट के सबसे अमीर बोर्ड को महिला आईपीएल आयोजित करने से रोक रहा है। आईपीएल फ्रेंचाइज़ी कोलकाता नाइट राइडर्स के सीईओ वेंकी मैसूर कहते हैं, "कभी-कभी, आपको बस एक विचार को स्वीकार कर के उसके साथ आगे बढ़ना होता है। मैंने व्यक्तिगत रूप से, कई मौक़ों पर महिला आईपीएल करवाने के बारे में बीसीसीआई से बात की है।"
उनका कहना है कि भारतीय बोर्ड को सबसे पहले आईपीएल के बाद महिला फ्रेंचाइज़ी प्रतियोगिता शुरू करनी चाहिए थी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। वहीं इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ने महिला बिग बैश लीग और किआ सुपर लीग करवाया जो काफ़ी सफल रहा।
"यह उचित समय है कि हम महिला आईपीएल को शुरू करें। इसके व्यावसायिक पक्ष जैसे अन्य सभी पहलुओं को छोड़ दें तो महिला खिलाड़ियों की प्रतिभा को पूरे दिल से समर्थन करने की आवश्यकता है।"
भारतीय महिला टीम 2017 वनडे विश्व कप और 2020 टी20 विश्व कप में उपविजेता टीम थी लेकिन बीसीसीआई अभी भी घरेलू स्तर पर "पर्याप्त और उचित खिलाड़ियों की कमी" कहकर महिला आईपीएल को शुरू नहीं करने के लिए अपनी अनिच्छा की व्याख्या करता है।
चेन्नई सुपर किंग्स के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है, "जिस तरह से भारत की महिला खिलाड़ियों ने पिछले विश्व कप के दौरान और उसके बाद की सीरीज़ में [इस साल की शुरुआत में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़] प्रदर्शन किया है, वह बहुत उत्साहजनक रहा है। मुझे अब भी लगता है कि टी20 प्रारूप में महिला क्रिकेट को अभी और विकसित होना है। उन्हें एक उचित मंच पर आने में कम से कम दो से तीन साल लगेंगे जहां हम महिला आईपीएल के बारे में सोच सकते हैं।"
महिला टी20 चैलेंज 2018 में शुरू किया गया था और बाद के दो वर्षों में भी इसका आयोजिन हुआ। आधिकारिक टी20 मैच के दर्जे के साथ इसमें तीन टीमों के बीच मैच भी कराए गए। कई लोगों को उम्मीद थी कि इस आयोजन के आकार को बढ़ा कर, एक टूर्नामेंट का रूप दिया जाएगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ।
सीएसके के अधिकारी का कहना है, "मुझे लगता है कि बीसीसीआई इस नतीजे पर पहुंचा है कि आईपीएल के दौरान हर साल तीन टीमों या चार महिला टीमों की स्पर्धा होगी। और समय के साथ जब उनके मानकों पर दर्शक और खिलाड़ी एक उचित स्तर पर पहुंच जाएंगे तब महिला आईपीएल की शुरआत कराई जाएगी। इस समय मुझे नहीं लगता आठ टीमों का महिला आईपीएल होना संभव होगा, क्योंकि प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट होने के लिए आपके पास पर्याप्त गुणवत्ता वाले खिलाड़ी होने चाहिए।" दूसरी ओर वेंकी मैसूर सोचते हैं कि इस समय दुनिया भर में महिला आईपीएल शुरू करने के लिए पर्याप्त प्रतिभा है। इसमें शायद आठ या 10 टीमों को शामिल किया जा सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उस टूर्नामेंट के आकार को कैसे प्लान करते हैं।
अगर इन दोनों विचारों के साथ आगे बढ़ते हुए एक संतुलित फ़ैसले पर पहुंचा जाए तो छह महिला टीमों की प्रतियोगिता यथार्थवादी प्रतीत होती है। यदि छह टीमों में से प्रत्येक को पुरुषों के आईपीएल की तरह लगभग 25 खिलाड़ियों की आवश्यकता होती है, तो इसका मतलब होगा कि महिला लीग में कुल 150 खिलाड़ी होंगे। प्रत्येक शुरुआती एकादश में चार विदेशी खिलाड़ी रखे जाएं। साथ ही दो रिज़र्व खिलाड़ियों के साथ अगर सभी टीमों के कुल खिलाड़ियों को देखा जाए तो 150 में से हमें 114 भारतीय खिलाड़ियों की ज़रूरत पड़ेगी।
इस साल साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ घरेलू सीरीज़, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरे के लिए भारत की टीम में कुल 32 खिलाड़ी थे। मान लें कि खिलाड़ियों का यह समूह, अंतर्राष्ट्रीय विपक्ष के ख़िलाफ़ देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए पर्याप्त समझा जाता है तो महिला आईपीएल में 114 खिलाड़ियों की आवश्यकता के लिए 30 खिलाड़ी साफ़ तौर पर अभी भारतीय टीम में दिख रहे हैं।
फिर भारत के अंतर्राष्ट्रीय और इंडिया ए के खिलाड़ियों का समूह है, जिनमें से कई ने हाल के घरेलू सत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया है, इनकी संख्या 25 तक है। इसमें से अगर 10 खिलाड़ियों को भी चुना जाता है तो यह महिला आईपीएल में और 74 भारतीय खिलाड़ियों की ज़रूरत है जिन्हें भारतीय घरेलू टीमों से चुनना पड़ेगा।
भारत में एक पूर्ण महिला घरेलू सत्र में, सीनियर, अंडर-19 और अंडर -23 श्रेणियों में सीमित ओवरों की प्रतियोगिताओं के साथ, कम से कम 1100 पंजीकृत खिलाड़ी हैं। बीसीसीआई से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 37 राज्य संघों में 2020-21 की वरिष्ठ महिला वनडे और टी20 प्रतियोगिताओं के लिए 1021 खिलाड़ी पंजीकृत थे। इस सीज़न में अकेले 50 ओवर की प्रतियोगिता (फ़रवरी-मार्च 2022 के लिए) के लिए 982 खिलाड़ी पंजीकृत थे।
क्या बीसीसीआई इतने खिलाड़ियों के समूह में से 74 खिलाड़ियों का चयन नहीं कर सकता है?
भारत की वर्तमान घरेलू टीमों में पर्याप्त कौशल और प्रतिभा के साथ कुछ उभरते हुए खिलाड़ी सामने आ रहे हैं। रॉड्रिग्स, पूजा वस्त्रकर, शेफ़ाली वर्मा, यास्तिका भाटिया, ऋचा घोष और राधा यादव उन 18 क्रिकेटरों में शामिल हैं, जिन्होंने घरेलू टूर्नामेंटों में प्रभावशाली प्रदर्शन के दम पर 2018 के बाद से भारतीय टीम में पदार्पण किया है। न केवल वे कई मौक़ो पर भारत के लिए मैच विजेता रहे हैं बल्कि विभिन्न परिस्थितियों में कई खिलाड़ियों ने द हंड्रेड और डब्ल्यूबीबीएल में भी धूम मचाई है।
घरेलू क्रिकेट में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। उदाहरण के लिए, इस वर्ष की सीनियर महिला वनडे ट्रॉफ़ी में, 27 शतक लगाए गए थे। उनमें से केवल चार मणिपुर, असम, पुदुचेरी और मिज़ोरम जैसे कमज़ोर माने जाने पक्षों के ख़िलाफ़ आए थे। उनमें से कई शतक लगाने वाले खिलाड़ियों की उम्र 21 या उससे कम थी। इसके विपरीत 2020-21 सत्र में 22 शतक, 2019-20 में 11, 2018-19 में 23 और 2017-18 में तीन शतक बनाए गए थे।
वेंकी मैसूर के अनुसार, नाइट राइडर्स महिला क्रिकेट और विशेष रूप से भारतीय महिला क्रिकेट में जिस तरीक़े की "खेल की शैली, जिस तरह की प्रतिभा आप देख रहे हैं वह रोमांचक है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि इस तरह की क्रिकेट लीग आकर्षक और नवीन रुचि पैदा कर सकती है।"
वेंकी मैसूर आगे कहते हैं कि "जब हम ईडन गार्डन में खेलते हैं, तब मैदान पूरी तरह भरा हुआ होता है। मैच देखने वाले समूह के भीतर दर्शकों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा महिलाओं और बच्चों का है। यह एक ऐसा समूह है जो महिला आईपीएल को भी बड़े पैमाने पर समर्थन देगा। इसलिए अब यह हमारे ऊपर है कि हम इसे कैसे लें, यह पता लगाएं कि हम इसे कैसे स्थापित कर सकते हैं, और आगे कैसे इसकी मार्केटिंग कर सकते हैं।"
"भारतीयों के बीच महिला क्रिकेट खपत के रुझान पर जो आंकड़ें सामने आ रहे हैं, वह वेंकी मैसूर की आशावाद को दर्शाता है। आईसीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 महिला टी20 विश्व कप में भारत की सफलता ने इस आयोजन में दर्शकों की रुचि को बढ़ाया है। यह इतिहास में सबसे अधिक देखा जाने वाला आईसीसी महिला टी20 इवेंट था।"
जयपुर में 2019 महिला टी20 चैलेंज में 13,000 से अधिक प्रशंसकों ने भाग लिया था। वहीं लगभग सात करोड़ दर्शकों ने इसे टीवी पर देखा था। ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया और स्टार इंडिया, बीसीसीआई के मीडिया-अधिकार धारकों के आंकड़ों के अनुसार 2020 में प्रतियोगिता के चार मैचों को कुल 10 करोड़ दर्शकों ने देखा था।
2020 में प्रायोजकों ने टूर्नामेंट के तीन साल के इतिहास में पहली बार विशेष रूप से इस T20 चैलेंज के लिए बीसीसीआई के साथ हस्ताक्षर किए। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के स्वामित्व वाली जियो, जो मुंबई इंडियंस फ्रेंचाइज़ी की मालिक है, शीर्षक प्रायोजक के रूप में आई थी। टाटा मोटर्स, अनएकेडमी, पेटीएस, सीएट और ड्रीम 11 ने भी आधिकारिक प्रायोजकों के रूप में हस्ताक्षर किए हैं।
क्या यह सभी आंकड़ें महिला आईपीएल करवाने के लिए काफ़ी नहीं हैं?

ऑन्नेशा घोष ESPNcricinfo के सब एडिटर हैं, अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।