दिल्ली कैपिटल्स 159/4 (शॉ 53, पंत 37, कॉल 2-31) और सनराइज़र्स हैदराबाद 159/7 (विलियमसन 66*, बेयरस्टो 38, आवेश 3-34) के बीच मुक़ाबला रहा टाई। दिल्ली कैपिटल्स ने एक-ओवर का एलिमिनेटर जीता।

केन विलियमसन ने एक बार फिर सनराइज़र्स हैदराबाद की मिडिल ऑर्डर की ख़ामियों को ढकने का काम किया और टीम को सुपर ओवर तक ले गए। लेकिन आख़िरी पड़ाव हैदराबाद की पहुंच से दूर रह गया।

दिलली कैपिटल्स के अक्षर पटेल हाल ही कोविड-19 से ठीक होकर लौटे हैं और उन्हें सुपर ओवर विशेषज्ञ कगिसो रबाडा के ऊपर तरजीह दी गई। अक्षर ने बेहद कठिन परिस्तिथि में अपने वैरिएशन और कोण से बल्लेबाज़ों को जगह नहीं दी और हैदराबाद को सुपर ओवर में 7 रन पर ही सीमित रखा। हालांकि ये 8 रन भी हो सकता था लेकिन तीसरे अंपायर की बारीक नज़र से ये बात साफ़ हुई कि डेविड वॉर्नर ने शॉर्ट रन लिया था।

अब भले ही हर तरफ़ से इस पर चर्चा हो कि जॉनी बेयरस्टो को सुपर ओवर में क्यों नहीं भेजा गया, जिनका इस मैच में स्ट्राइक रेट 211 का था। लेकिन ये बात ऋषभ पंत के उस प्रदर्शन से फीकी पड़ जाएगी जिस अंदाज़ में पंत ने राशिद ख़ान का सामना किया, पंत ने राशिद को चार रनों के लिए रिवर्स स्वैट किया और फिर अपनी टीम और महामारी का दंश झेल रहे इस शहर को ख़ुशी का मौक़ा दिया।

शॉ की ताबड़तोड़ पारी
चेन्नई की पिच पर शुरुआत में खेलना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि जैसे जैसे खेल आगे बढ़ता है तो पिच धीमी होती जाती है, और हर एक गेंद के साथ रन बनाना मुश्किल होता जाता है।

लिहाज़ा पृथ्वी शॉ बतौर ओपनर फ़ायदा उठाते हुए पहली तीन गेंदों को सीमा रेखा के पार पहुंचाया। उनका सबसे बेहतरीन शॉट तीसरे ओवर में देखने को मिला जब शॉ ने सिद्धार्थ कौल की गेंदबाज़ी पर लॉफ़्टेड कवर ड्राइव से छक्का जड़ा था।

तभी कैमरा पंत की ओर जाता है और वह वहां बेहद शांत नज़र आ रहे थे, अपनी ठुड्डी पर हाथ रखते हुए बड़े आराम से बैठे थे। पंत ही अगले बल्लेबाज़ थे जिन्हें आना था, शायद वह ख़ुद को तैयार कर रहे थे, तभी शॉ का ये शॉट आया और वह ख़ुद को इस शॉट की तारीफ़ करने से नहीं रोक पाए, और सिर हिलाते हुए उन्होंने सराहना की।

हैदराबाद बनाम पंत
पहले 6 ओवर में दिल्ली ने 51/0 रन बना लिए थे, और अब फ़ील्ड फैल चुकी थी, आक्रमण पर स्पिनर्स आ गए थे, यहां लाइन के साथ हिट करना बेहद मुश्किल था। यहां तक कि पावरप्ले में बड़ी ही आसानी के साथ 23 गेंदों पर 39 रन बनाने वाले शॉ भी अगली 16 गेंदों पर 14 रन ही बना पाए थे और फिर रन आउट हो गए।

हैदराबाद ने अब पूरी कोशिश की कि गेंद से रफ़्तार कम कर दी जाए, हालांकि इसके बाद उन्हें ज़्यादा सफलता हाथ नहीं लगी। मौक़े 16वें और 17वें ओवर में ही बने जब पंत और स्टीव स्मिथ ने क्रमश: शॉर्ट फ़ाइन लेग (ख़लील अहमद) और शॉर्ट थर्ड मैन (सिद्धार्थ कौल) पर कैच दे बैठे थे, लेकिन ये दौनों ही मौक़ों को लपका नहीं गया।

वॉर्नर के चेहरे पर इस समय झुंझलाहट साफ़ दिख रही थी, क्योंकि उनके गेंदबाज़ सबकुछ ठीक कर रहे थे लेकिन फ़ील्डर्स साथ नहीं दे रहे थे। नतीजा ये हुआ कि पावर हिटिंग विशेषज्ञ पंत अभी भी क्रीज़ पर मौजूद थे।

पंत ने 27 गेंदों पर 37 रन बनाए, उन्होंने धीमी गेंद पर छक्का लगाया, तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ उन्होंने रिवर्स स्कूप करते हुए चौका बटोरा। राशिद के ख़िलाफ़ तो पंत बेहद सहज नज़र आ रहे थे, इस दिग्गज लेग स्पिनर पर उन्होंने 8 गेंदों पर 18 रन बनाए। स्मिथ के साथ उनकी 58 रनों की साझेदारी की बदौलत दिल्ली ने 159/4 रन स्कोर बोर्ड पर खड़े कर दिए थे।

बेयरस्टो और विलियमसन ने कसी कमर
दिल्ली ने गेंद थमाई स्पिनर्स के हाथों में - स्पिनर भी आर अश्विन और अमित मिश्रा जैसे अनुभवी - अब तो लग रहा था मानो गेंद घूम रही है, उछल रही है और बल्लेबाज़ों के इम्तिहान ले रही हो।

बेयरस्टो ने इन तमाम चीज़ों का असर अपने दिमाग़ पर नहीं पड़ने दिया और स्पिनर्स के ख़िलाफ़ जमकर प्रहार किया। फ़्लाइट गेंदों पर ताक़तवर शॉट खेल रहे बेयरस्टो के ख़िलाफ़ अब स्पिनर्स को रणनीति बदलनी पड़ी और वे तेज़ और फ़्लैट गेंद करने लगे, इसके बाद भी बेयरस्टो ताबड़तोड़ पारी खेल रहे थे। हैदराबाद के इस ओपनर ने 18 गेंदों पर 38 रन बनाए। हालांकि वह सिर्फ़ 1 रन पर आउट हो सकते थे जब शिमरॉन हेटमायर ने मिडविकेट बाउंड्री पर उनका एक कैच छोड़ दिया था।

दूसरी ओर विलियमसन एक अलग अंदाज़ में खेल रहे थे। वह जानते थे कि विपक्षी गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ ताबड़तोड़ या ताक़तवर शॉट इतना जल्दी खेलना सही नहीं, लेकिन वह धीरे-धीरे रनगति बढ़ा रहे थे और पिच पर नज़रें जमा रहे थे। दिल्ली के स्पिनर्स के ख़िलाफ़ विलियमसन ने स्वीप और रिवर्स स्वीप का बख़ूबी इस्तेमाल किया और इस दौरान हमेशा ध्यान रखा कि वह गेंद को ज़मीन के सहारे ही खेलें ताकि ऊपरी किनारा लगने का ख़तरा कम रहे। उन्हें फ़ील्ड पोजीशन का भी बारीक ध्यान था, जैसे ही कगिसो रबाडा मिड ऑफ़ अंदर रखते हुए गेंदबाज़ी करने आए, विलियमसन ने मिड ऑफ़ के ऊपर से लॉफ़्टेड शॉट से चौका बटोरा। वह बख़ूबी जानते थे कि जितनी देर तक वह बल्लेबाज़ी करेंगे टीम लक्ष्य के क़रीब पहुंचती जाएगी। इसलिए वह क्रीज़ का भी अच्छा इस्तेमाल कर रहे थे, बल्ले का मुंह खोलते हुए रन बना रहे थे और विकेट के बीच भी लाजवाब दौड़ लगा रहे थे।

एक आश्चर्यचकित कैमियो
इन सबके बावजूद, हैदराबाद को आख़िरी 30 गेंदों पर 50 रनों की दरकार थी। जब किसी T20 टीम में कोई बड़ा मैन फ़िनिशर न हो तो 10 रन प्रति ओवर के हिसाब से रनों का पीछा करना कैसे मुमकिन होता है ?

लेकिन ये मदद मिली एक अनजान खिलाड़ी से, उनका नाम है जगदीश सुचित। जो इस मैच में इसलिए खेल रहे थे क्योंकि भुवनेश्वर कुमार चोटिल थे। खेल अब दिल्ली की ओर जा रहा था, तभी सुचित ने 19वें ओवर में आवेश ख़ान के ओवर में दो चौके जड़े और फिर 20वें ओवर में कगिसो रबाडा के ख़िलाफ़ भी सुचिन ने छक्का लगाते हुए मैच को सुपर ओवर तक पहुंचाया।

अलगप्पन मुथु ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट सैयद हुसैन ने किया है।