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मुझे साउथ अफ़्रीका और आरसीबी के लिए अहम भूमिका निभानी है : एबी डीविलियर्स

पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ ने महामारी में सामना की गई कठिनाइयों का खुलासा भी किया

एबी डीविलियर्स फ़िलहाल प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों को सलाह दे रहे हैं  •  BCCI

एबी डीविलियर्स फ़िलहाल प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों को सलाह दे रहे हैं  •  BCCI

हम सब की तरह सुपरमैन एबी डीविलियर्स भी नहीं जानते हैं कि भविष्य में क्या होने वाला है। लेकिन पूर्व साउथ अफ़्रीकी कप्तान को भरोसा है कि उन्हें राष्ट्रीय टीम के साथ-साथ आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। विश्व क्रिकेट के महान बल्लेबाज़ों में से एक डीविलियर्स ने पिछले साल नवंबर में सभी तरह के क्रिकेट से संन्यास लिया था।
टाइम्स लाइव से बातचीत के दौरान डीविलियर्स ने कहा, "मैं मानता हूं कि मुझे साउथ अफ़्रीकी क्रिकेट और आईपीएल में रॉयल चैंलेंजर्स बेंगलुरु के लिए अहम भूमिका निभानी है। मैं नहीं जानता कि भविष्य में क्या होगा।"
20,014 अंतर्राष्ट्रीय रन बनाने के अलावा डीविलियर्स के नाम वनडे में सबसे तेज़ अर्धशतक, शतक और 150 रन बनाने का रिकॉर्ड है। रॉयल चैलेंजर्स के लिए उन्होंने 157 मैचों में 4522 रन बनाए हैं।
37 वर्षीय डीविलियर्स ने कहा कि वह प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों को सलाह दे रहे हैं और भविष्य के लिए उन्हें तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "इस बारे में कोई नहीं जानता है। मुझे उम्मीद है कि आगे चलकर एक दिन मैं कह सकूंगा कि मैंने कुछ खिलाड़ियों के जीवन को बदलने में अपना योगदान दिया।"
2018 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके डीविलियर्स ने बताया कि उन्हें कोरोना महामारी में कई व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा, "पिछले साल दो बार आईपीएल के लिए जाना, यात्रा प्रतिबंधों, कोरोना टेस्ट, रद्द उड़ानों से जूझना और बच्चों की पढ़ाई का प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण था। पिछले कुछ वर्षों में मैंने अपने बच्चों को दौरे पर नहीं ले जाने का निर्णय लिया था। मेरे लिए ख़ुद को प्रेरित करना और सचेत रहना सबसे बड़ी चुनौती थी।" वह आगे कहते हैं कि उन्हें कोविड भी हो गया था और वह 10-12 दिन तक बीमार रहे।
मई 2020 में आईपीएल को स्थगित कर दिया गया था जब भारत में टीमों के बायो-बबल में कई खिलाड़ी कोरोना संक्रमित पाए गए थे। साल के अंतिम भाग में टूर्नामेंट के बचे हुए मैच यूएई में खेले गए।
डीविलियर्स ने बताया कि उसी ऊर्जा के साथ सबसे बड़े मंच पर ख़ुद को साबित करना कठिन हो रहा था। उनके लिए यह खेल हमेशा से "आनंद लेने" का माध्यम था।
उन्होंने बताया, "जैसे ही मुझे यात्रा करने और बायो-बबल में रहने में दिक़्क़त होने लगी, उसने मेरे खेल और उससे मिलने वाले आनंद को प्रभावित किया। मुझे समझ आया कि मैदान पर रन बनाने से ज़्यादा मेरा ध्यान मैदान के बाहर की गतिविधियों पर था और तब मेरे मन में अलविदा कहने का विचार उत्पन्न हुआ।"
जब उन्हें पता चला कि खेल से मिलने वाला आनंद समाप्त हो गया, वह आगे बढ़ गए।