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महमूद : श्रीलंका में तो मुझे कोई गेंदबाज़ नज़र ही नहीं आता

श्रीलंकाई कप्तान शनका के बयान के बाद श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच वाक युद्ध की शुरुआत हो चुकी है

श्रीलंका के ख़िलाफ़ होने वाले करो या मरो वाले मैच से पहले बांग्लादेश टीम निदेशक ख़ालिद महमूद ने अपने बल्लेबाज़ों की काफ़ी आलोचना की है। अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ मिली सात विकेट से हार के बाद ख़ालिद अपनी टीम से काफ़ी नाराज़ हैं। हालांकि बांग्लादेश के गेंदबाज़ों पर श्रीलंकाई कप्तान दसुन शनका की टिपण्णी के बाद उन्होंने श्रीलंकाई टीम पर ज़ोरदार निशाना साधा है।
अफ़ग़ानिस्तान से टूर्नामेंट का पहला मैच हारने के बाद शनका ने कहा था कि बांग्लादेश के गेंदबाज़ अफ़ग़ानिस्तान के गेंदबाजों से भी ज़्यादा कमज़ोर हैं। उन्होंने कहा था, "अफ़ग़ानिस्तान के पास विश्व स्तरीय गेंदबाज़ी आक्रमण है। हम जानते हैं कि फ़िज़ [मुस्तफ़िज़ुर रहमान] एक अच्छे गेंदबाज़ हैं। इसके अलावा शाकिब (अल हसन) भी एक विश्व स्तरीय गेंदबाज़ हैं। हालांकि इसके बाद उनकी टीम में कोई विश्व स्तरीय गेंदबाज़ नहीं है। इसलिए अफ़ग़ानिस्तान तुलना की में बांग्लादेश एक आसान प्रतिद्वंद्वी है।"
शनका की टिप्पणी के बाद श्रीलंका के सहायक कोच नवीद नवाज़ ने उनसे असहमति जताई थी। वहीं बांग्लादेश के ऑफ़ स्पिनर मेहदी हसन ने ज़ुबानी जंग में शामिल होने से इनकार कर दिया। हालांकि महमूद एक ऐसे व्यक्ति हैं जो अपनी राय व्यक्त करने से नहीं कतराते।
उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि शनका ने यह टिप्पणी क्यों की। निश्चित रूप से अफ़ग़ानिस्तान के पास एक बेहतर टीम है। उन्होंने कहा कि हमारे लाइन-अप में केवल दो गेंदबाज़ हैं, लेकिन मुझे श्रीलंका में कोई गेंदबाज़ नहीं दिख रहा है। कम से कम बांग्लादेश में मुस्तफ़िज़ुर और शाकिब जैसे विश्व स्तरीय गेंदबाज़ हैं।"
महमूद ने सुझाव दिया कि शीर्ष पर आने के लिए दोनों पक्षों को दबाव को अच्छी तरह से संभालना होगा। अफ़ग़ानिस्तान ने श्रीलंका और बांग्लादेश दोनों को आराम से हरा दिया है, जिससे ग्रुप बी की दो और स्थापित टीमें सुपर 4 के बचे हुए स्थान के लिए लड़ेंगी।
मैच के पूर्वसंध्या पर महमूद ने कहा, "सिर्फ़ हम ही नहीं श्रीलंका भी दबाव में है। मुझे उम्मीद है कि दुबई की परिस्थितियों हमें बेहतर रास आएंगी। कल एक तनावपूर्ण मैच होगा। जो टीम दबाव को बेहतर ढंग से संभालती है, उसके जीतने की अधिक संभावना होगी। जो कोई भी मानसिक लड़ाई जीतेगा, वह मैच जीतेगा।" हालांकि अफ़ग़ानिस्तान से मिली हार के बाद ख़ालिद अपनी टीम के बल्लेबाज़ों से काफ़ी नाराज़ हैं। उनके अनुसार उनकी टीम के खिलाड़ियों में आक्रामक इरादे की काफ़ी कमी है।
आपको निडर होकर क्रिकेट खेलना होगा। इसका मतलब है कि आप टीम में अपना स्थान खोने से नहीं डर सकते। आपको इरादा दिखाना होगा। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपके पास है टीम में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।"
खालिद महमूद
ख़ालिद ने कहा, "मोसद्देक [हुसैन] ही ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने एक सिक्सर मारा। हालांकि उस शॉट में उन्हें भाग्य का भी सहारा मिला था क्योंकि सीमा रेखा पर खड़े क्षेत्ररक्षक ने गेंद को पकड़ लिया था लेकिन उनका पैर सीमा रेखा को छू रहा था। हालांकि मैं उस शॉट के लिए उसे कभी दोषी नहीं ठहराऊंगा। उनका इरादा सीधा सिक्सर मारने का था। मैं दूसरे खिलाड़ियों को कम से कम बड़े शॉट लगाने की कोशिश करते हुए देखना चाहता हूं।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं यह कभी नहीं देखना चाहता हूं कि कोई बल्लेबाज़ पहले 15-20 गेंदों पर रक्षात्मक शॉट खेले और फिर आउट हो जाए। यह देख कर काफ़ी बुरा लगता है। ऐसा हो सकता है कि 50 के स्कोर पर तीन विकेट गिर जाए या पावरप्ले में आप बिना कोई विकेट गंवाए 40 रन बना लें लेकिन पिच पर उपस्थित बल्लेबाज़ों को दबाव में नहीं खेलना चाहिए।"
ख़ालिद ने यहां तक ​​सवाल किया कि क्या बल्लेबाज़ों में आक्रमण करने के इरादे की कमी, इस कारण से उभरी है कि वे टीम में अपनी जगह पक्की कर सकें? ख़ालिद ने इसी महीने की शुरुआत में टी20 सीरीज़ में ज़िम्बाब्वे से मिली हार के बाद, कुछ इसी तरह का दावा किया था।
उन्होंने कहा, "जब तक आप टीम के लिए खेल रहे हैं, तब तक सब कुछ ठीक रहेगा। यदि आप अपनी जगह खोने से डरते हैं तो आप अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़िया प्रदर्शन नहीं करेंगे। आप एक टेस्ट मैच में स्वार्थी हो सकते हैं। वहां अगर आप 300 गेंदों में शतक बनाते हैं तो कोई भी कुछ नहीं कहेगा। लेकिन आप इस प्रारूप में ऐसा नहीं कर सकते। आपको निडर होकर क्रिकेट खेलना होगा। इसका मतलब है कि आप टीम में अपना स्थान खोने से नहीं डर सकते। आपको इरादा दिखाना होगा। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपके पास है टीम में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।"
ख़ालिद ने कहा कि बीसीबी बल्लेबाज़ो के लिए सर्वोत्तम प्रशिक्षण सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए सब कुछ कर रहा है। तीन लेग स्पिनरों को भी अभ्यास करने के लिए उपबल्ध कराया गया था।
महमूद ने कहा, "यह पता लगाना मुश्किल है कि क्या वास्तव में हमारे बल्लेबाज़ों में अफ़ग़ानिस्तान के स्पिनरों को लेकर डर था। हम टीम में तीन लेगस्पिनर लेकर आए, जिनमें से एक ने आईपीएल में भी खेला है। हमारे पास नेट्स में ऋषद (हुसैन) भी थे। हमने बीसीबी की ओर से टीम की यथासंभव मदद करने की कोशिश की।" उन्होंने आगे कहा, "ऐसा लगता है कि हम मैच में आने वाले दबाव को संभालने में असमर्थ हैं। खिलाड़ियों को इस स्थिति से बाहर निकलने के तरीक़े खोजने होंगे। टी 20 में अच्छा खेलने के लिए हम इस तरह की शैली से बल्लेबाज़ी नहीं कर सकते हैं।"

मोहम्मद इसाम ESPNcricinfo के बांग्लादेशी संवाददाता हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।