"कुछ नया सामना करने का मतलब डर या उत्साह हो सकता है। इस बार मैं उत्साह के साथ जा रहा हूं।"

डेविड वार्नर अपने बल्ले के प्रायोजक को प्रमोट कर रहे थे, लेकिन यह उनका आंतरिक विचार हो सकता था क्योंकि वह सनराइज़र्स हैदराबाद के साथ एक बार फिर इंडियन प्रीमियर लीग में नज़र आएंगे और इस बार वह सिर्फ़ एक खिलाड़ी के तौर पर सफ़र को शुरू कर रहे हैं।

वॉर्नर का आईपीएल से ख़ास रिश्ता है। यह दुनिया की एकमात्र टी 20 लीग है जिसमें वह नियमित रूप से शामिल होते हैं। उनके बॉल टैंपरिंग प्रतिबंध के कारण 2018 सीज़न से चूकने के बाद जब वह 2019 में टूर्नामेंट में वापस लौटे तो सनराइज़र्स के कोच टॉम मूडी ने कहा, "वार्नर खेलने के लिए काफ़ी बेताब थे। "

2020 में वार्नर को सनराइज़र्स के कप्तान के रूप में फिर से बहाल किया गया और सनराइजर्स को उन्होंने लगातार पांचवें सीज़न में प्ले-ऑफ में पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

लेकिन आईपीएल में भावनाओं के लिए बहुत कम जगह होती है, और खिलाड़ियों का मूल्यांकन अक्सर नंबरों के आधार पर किया जाता है। 2021 मे जब वॉर्नर ने छह मैचों में 110.28 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए तो सनराइज़र्स के टीम मेनेजमेंट ने उन्हें टीम से बाहर रखने का निर्णय लिया।

कई बार ऐसा भी होता है जब बल्लेबाज़ के पास रनों की कमी होती है लेकिन वह आउट ऑफ फ़ॉर्म नहीं होता। वॉर्नर के लिए यह विपरीत था। वह रन बना रहे थे लेकिन चेन्नई की धीमी पिचों पर वह खुलकर नहीं खेल पा रहे थे। सनराइज़र्स ने अपने पहले पांच मैच चेन्नई में खेले; उनमें से अंतिम तीन में वॉर्नर का स्कोर 34,36, और 37 था। सनराइज़र्स की टीम जब दिल्ली की पिचों पर खेलने गई तब भी वॉर्नर का संघर्ष ख़त्म नहीं हुआ। चेन्नई सुपर किंग्स के ख़िलाफ़ उन्होंने 57 रन बनाने के लिए 55 गेंदों का सामना किया और फिर चेन्नई ने 18.3 ओवर में 172 रनों का पीछा कर लिया। वॉर्नर जानते थे कि उनकी पारी ने उनकी टीम के लिए भलाई से ज़्यादा नुकसान किया है। खेल के बाद, उन्होंने हार की "पूरी ज़िम्मेदारी" ली।

सनराइजर्स के छह मैचों में से केवल एक जीत दर्ज कर पाने के बाद टीम प्रबंधन को कोई ना कोई फ़ैसला लेना था। टीम प्रबंधन ने अपने चार विदेशी खिलीड़ियों में दो बल्लेबाज़, एक ऑलराउंडर और राशिद ख़ान को टीम में रखने का फ़ैसला किया। जॉनी बेयरस्टो और केन विलियमसन काफ़ी बेहतर प्रदर्शन कर रहे थे, इसलिए वॉर्नर ही थे जिनके स्थान पर एक ऑलराउंडर को टीम में शामिल किया जा सकता था।

वॉर्नर हैदराबाद के दत्तक पुत्र हैं। जबकि आईपीएल में अधिकांश फ्रेंचाइजी के पास एक भारतीय सुपरस्टार है, वार्नर आधे दशक से अधिक समय से सनराइज़र्स का चेहरा, दिल और आत्मा रहे हैं। साथ ही, वह उनके सबसे सफल कप्तान और अब तक के सबसे शानदार बल्लेबाज़ रहे हैं। सनराइज़र्स के लिए अपने छह सत्रों में, वार्नर ने हर बार 500 रन का आंकड़ा पार किया है। टूर्नामेंट में कोई अन्य बल्लेबाज़ ऐसा करने में सक्षम नहीं रहा है।

जब वार्नर गेम नहीं जीत रहे होते हैं तो वह सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसकों का दिल जीतने का काम करते हैं। 2020 की पहली छमाही में जब कोविड-19 की संक्रमण ने पूरी दुनिया पर विराम सा लगा दिया था, तब वॉर्नर और उनके परिवार को कई बार दक्षिण भारतीय गानों पर थिरकते देखा गया। ऐसा लगा जैसे वह आईपीएल स्थगित होने के बाद सनराइज़र्स के प्रशंसकों को ख़ुश करने के लिए कुछ ना कुछ कर रहे थे।

कोई आश्चर्य नहीं कि टीम प्रबंधन के निर्णय से वॉर्नर शुरूआत में काफ़ी "हैरान" और "निराश" थे लेकिन ज़ाहिर तौर पर एक बार जब वह इसके पीछे के तर्क को समझ गए, तो उन्होंने इसे खेल भावना के रूप में लिया।

सनराइज़र्स के अगले गेम में, राजस्थान रॉयल्स के ख़िलाफ़ वॉर्नर को 12वें खिलाड़ी के रूप में मैदान पर ड्रिंक्स ले जाते देखा गया था। लेकिन उनकी टीम एक बार फिर हार गई। मैच के बाद, कोच ट्रेवर बेलिस ने कहा कि वॉर्नर के बिना यह मैच खेलना "बहुत चुनौतीपूर्ण" था, लेकिन चूंकि कोविड -19 ने जल्द ही टूर्नामेंट को रोक दिया, इसलिए यह आंकना मुश्किल है कि इसके बाद सनराइज़र्स की टीम मेनेजमेंट इस फ़ैसले को कैसे देखती है।

उसके बाद से बहुत कुछ बदल गया है। आईपीएल का कारवां यूएई में शिफ़्ट हो गया है। कई विदेशी खिलाड़ियों ने विभिन्न कारणों से नाम वापस लिया है। लेकिन उन चार महीनों में वॉर्नर ने कोई क्रिकेट नहीं खेला है. उन्होंने वेस्टइंडीज़ और बांग्लादेश के दौरे पर भी टीम में नहीं शामिल हुए।

ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि वॉर्नर की हालिया फ़ॉर्म कैसा है। हालांकि, बेयरस्टो के बाहर होने के साथ, एक विदेशी बल्लेबाज़ी स्लॉट ख़ाली हो गया है। ऐसे में वॉर्नर का टीम में कप्तान के तौर पर ना सही तो कम से कम एक खिलाड़ी के रूप में लौटने की पूरी संभावना है।

लेकिन क्या वह सिर्फ़ एक खिलाड़ी के रूप में टीम में आ रहे हैं? हमने देखा है कि आईपीएल सीज़न के बीच में कप्तान के बदलाव ने शायद ही कभी टीमों के लिए कुछ अच्छा काम किया हो। जबकि वॉर्नर 2019 सीज़न में एक बल्लेबाज़ के रूप में खेले थे, वह पहले से इस बारे में जानते थे और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके पीछे का कारण पूरी तरह से अलग था।

यह निश्चित है कि वॉर्नर एक बार फिर अपने खेलने को लेकर उत्सुक होंगे। कम से कम यह साबित करने के लिए कि वह अभी भी वही बल्लेबाज़ हैं जिसने सनराइज़र्स के लिए लगभग हर सीज़न में काफ़ी रन बनाए हैं।

आईपीएल के ठीक बाद यूएई की उन्हीं पिचों पर टी 20 विश्व कप खेला जाएगा।आईपीएल के दौरान पिच में बिताया गया समय भी वॉर्नर को वाहं की परिस्थितियों के अनुकूल होने में मदद करेगा।

अगले साल आईपीएल में मेगा ऑक्शन भी है। इसलिए वॉर्नर और फ्रैंचाइज़ी दोनों के दृष्टिकोण से, यह महत्वपूर्ण है कि वह अपने पुराने लय में बल्लेबाज़ी करें।

हेमंत बराड़ ESPNcricinfo के सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।