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पिच पर टिके रहना था लक्ष्य : रोहित शर्मा

सलामी बल्लेबाज़ ने विदेश में अपने पहले टेस्ट शतक के बाद अपनी 'प्रक्रिया' पर भरोसा करने की बात की

रोहित शर्मा निःसंदेह इस बात से सहमत होंगे कि उनका पहले विदेशी टेस्ट शतक बहुत मूल्यवान है। हालांकि चौथे टेस्ट में उनके के लिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पटौदी ट्रॉफ़ी के लिए चल रही इस सीरीज़ में अब तक उन्होंने सबसे अधिक गेंदें खेली है और सबसे ज़्यादा समय तक बल्लेबाज़ी की है। रोहित ने कहा कि एक सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर यही उनकी सफलता का आधार है। साल 2019 में रोहित ने टेस्ट क्रिकेट में ओपनिंग करने का सफ़र शुरू किया था।
रोहित ने ओवल टेस्ट की दूसरी पारी में कुल 256 गेंदों का सामना किया। यह 21वीं सदी में किसी भी भारतीय बल्लेबाज़ द्वारा इंग्लैंड में खेलते हुए एक पारी में खेली गई तीसरी सबसे अधिक गेंदें है। सीरीज़ में एक और टेस्ट खेला जाना है, जहां रोहित इंग्लैंड की टेस्ट सीरीज़ में भारतीय सलामी बल्लेबाज़ द्वारा खेली गई सबसे अधिक गेंदों का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं। फ़िलहाल इस सूची में सुनील गावस्कर (1979) और मुरली विजय (2014) उनसे आगे हैं।
शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान रोहित ने कहा, "सबसे सुखद बात यह थी कि मैंने 250 गेंदों का सामना किया। अगर आप (इस सीरीज़ के) सभी टेस्ट मैचों को देखें तो मैंने लगभग हर पारी में 100 गेंदों का सामना किया है। यह मेरा एक लक्ष्य था। मैं लंबे समय तक टिकना चाहता था क्योंकि जब आप क्रीज़ पर समय बिताते हो तब चीज़ें आसान होने लगती है। पिच पर समय बिताना मेरे लिए इन चार टेस्ट मैचों की सबसे बड़ी उपलब्धि है।"
जून में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फ़ाइनल के साथ शुरू हुए इंग्लैंड दौरे पर रोहित भारत के सबसे व्यवस्थित बल्लेबाज़ नज़र आए हैं। उन्होंने हमेशा अपनी शुरुआत को एक लंबे स्कोर में तब्दील करने की कोशिश की हैं। रोहित इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सात पारियों में दो अर्धशतक पहले ही लगा चुके थे। उन्होंने लॉर्ड्स में 83 रन बनाए थे, जहां उनके सलामी जोड़ीदार केएल राहुल ने शानदार शतक लगाकर भारत की एक यादगार जीत की नींव रखी थी।
ओवल में रोहित ने छक्का लगाकर अपना शतक पूरा किया। उनका जश्न मौन और केवल हवा में बल्ला लहराने तक ही सीमित था। रोहित ने स्वीकार किया कि यह एक विशेष पारी थी। उन्होंने कहा, "यह बहुत महत्वपूर्ण थी। आप मुश्किल परिस्थितियों में गुणवत्ता वाली गेंदबाज़ी आक्रमण के ख़िलाफ़ खेल रहे हैं। ज़ाहिर है कि जब आप उनके ख़िलाफ़ अच्छा प्रदर्शन करते हैं तब आपको ख़ुशी महसूस होती हैं। डब्ल्यूटीसी फ़ाइनल के बाद मैं जानता था कि जो भी हो, मुझे बल्ले के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना होगा। मुझे टीम के लिए योगदान देने से फ़र्क पड़ता है, अपने बल्लेबाज़ी करने के अंदाज़ से नहीं।"
रोहित ने आगे कहा, "ऐसा नहीं है कि आप यहां आएंगे और आसानी से शतक लगाएंगे। यह लंबे समय तक चलने वाली एक प्रक्रिया है। जब आप विदेश में खेलते हैं तब चीज़ें आसान नहीं होती। जब मैंने ओपनिंग शुरू की तब मुझे पता था कि बड़े स्कोर ऐसे ही नहीं बन जाएंगे। मैं जानता था कि मुझे एक प्रक्रिया का पालन करना होगा और तकनीकी रूप से मज़बूत होना पड़ेगा। ओपनिंग की शुरुआत करने के बाद मैंने वही किया।"
साल 2019 में भारत के वेस्टइंडीज़ दौरे पर टीम प्रबंधन ने पहली बार रोहित से ओपन करवाने की बात की थी। मध्यक्रम में निरंतरता पाने के लिए संघर्ष करने के बाद रोहित ने साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ घरेलू सीरीज़ में पहली बार टेस्ट क्रिकेट में ओपन किया। ओपनर के रूप में अपने पहले ही टेस्ट मैच में रोहित ने दोनों पारियों में शतक जड़े। रोहित ने बाद में एक दोहरा शतक लगाते हुए उस सीरीज़ को और यादगार बनाया दिया। उन्होंने बताया कि वह उस सीरीज़ को अपने "आख़िरी मौक़े" के तौर पर देख रहे थे।
उस सीरीज़ के बारे में बात करते हुए रोहित ने कहा, "उस समय मै सोचता था कि मुझे इस अवसर का सदुपयोग करना है और इसके लिए जो कुछ भी करना पड़े, मैं करूंगा। वैसे तो आपको अपनी बल्लेबाज़ी में बहुत कुछ बदलाव लाने की ज़रूरत है पर सबसे महत्वपूर्ण बात है अनुशासन। यह ऐसी चीज़ है जिस पर मैंने मैदान पर और मैदान के बाहर भी काफ़ी ध्यान दिया हैं। मैं नेट्स में अभ्यास के दौरान अपनी बल्लेबाज़ी में अनुशासन लाने पर काम कर रहा था फिर चाहे वह गेंदों को छोड़ने के बारे में हो या अपनी डिफ़ेंस को सॉलिड रखने के बारे में। मुश्किल परिस्थितियों में यह सभी चीज़ें मायने रखती है।"
धैर्य और अनुशासन के कारण ही रोहित के मन में 47 पारियों के बाद भी विदेशी सरज़मीं पर शतक लगाने की भूख ज़िंदा थी। रोहित ने कहा, "शतक बनाने के बाद हमेशा ख़ुशी होती है, फिर चाहे वह विदेश हो या घर। बल्लेबाज़ हमेशा बड़ी पारी खेलकर टीम को एक मज़बूत स्थिति में पहुंचाने का प्रयास करते हैं। विदेश में शतक बनाने का ख़्याल मेरे दिमाग में नहीं था। मेरा ध्यान प्रक्रिया पर केंद्रित था। जब चीज़ें आसान नहीं होती है, तब आपको मेहनत करनी पड़ती है। मैं जानता हूं कि अगर मैं प्रक्रिया पर ध्यान देते हुए अपने अभ्यास पर भरोसा रखूंगा तो मुझे मेहनत का फल ज़रूर मिलेगा।"

नागराज गोलापुड़ी ESPNcricinfo में न्यूज़ ए़डिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।