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मैं कभी भी असाधारण रूप से प्रतिभाशाली नहीं था : हर्षल

हर्षल ने अपनी हर कमी पर काफ़ी सूक्ष्मता से काम करते हुए ख़ुद को इस स्तर पर पहुंचाया है

हर्षल पटेल को नहीं लगता कि वह बहुत प्रतिभाशाली हैं। उनके गेंदबाज़ी एक्शन के अध्ययन ने उन्हें इस निष्कर्ष पर लाया है कि यह तकनीकी रूप से अपूर्ण है। उनकी गेंदों को कम उछाल प्राप्त होता और उनके एक्शन से चोट का ख़तरा भी बढ़ जाता है। वह इस बात को भी स्वीकार करते हैं कि भले ही वह एक 'तेज़' गेंदबाज़ हैं, लेकिन वह नियमित रूप से 140 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से गेंदबाज़ी नहीं कर सकते हैं।
अपने बारे में इन सारी बातों को जानने के बावजूद, हर्षल एक ऐसा आईपीएल का सीज़न खेल कर आ रहे हैं, जहां उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में सबसे अधिक विकेट लिए और 'प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट' रहे। उसके कारण उन्हें शुक्रवार को भारतीय टीम की तरफ़ से डेब्यू करने का मौक़ा मिला और उस मौक़े को भुनाते हुए, उन्होंने अपने पहले ही मैच में प्लेयर ऑफ़ द मैच का ख़िताब जीता। भारत के लिए अपने डेब्यू मैच में प्लेयर ऑफ़ द मैच का ख़िताब जीतने वाले वह सिर्फ़ आठवें खिलाड़ी हैं।
कौशल के दृष्टिकोण से हर्षल में जो भी कमी है, उस पर उन्होंने काफ़ी सूक्ष्मता से काम किया है। उनके पास गति में जो कमी है, वह उसे धैर्य के साथ पूरा करते हैं। हर्षल ने अपनी हर कमी को पहचानते हुए, कड़ी मेहनत से उन्हें दूर करने का प्रयास किया है। सीनीयर लेवल के 238 मैचों में उन्होंने 446 विकेट लिए हैं।
हर्षल ने डेब्यू पर प्लेयर ऑफ़ द मैच का पुरस्कार जीतने के बाद मेज़बान ब्रॉडकास्टर स्टार से कहा, "मैं असाधारण रूप से प्रतिभाशाली नहीं था, मुझे अपने खेल पर शुरुआती दिनों से काम करना पड़ा।"
"मेरे लिए यह मेरे कौशल और उन चीज़ों के बीच अंतर करने की क्षमता थी जो मैं नहीं कर सकता था, ऐसी चीज़ें जो मेरी प्रतिभा मुझे करने की इजाज़त नहीं देती। आपको उस पर काम करते रहना होगा और इसे इतना अच्छा बनाना होगा कि सीमित कौशल या सीमित विकल्प के साथ आप बढ़िया प्रदर्शन कर सकते हैं और लगातार उस पर अमल कर सकते हैं।"
शीर्ष स्तर का हर खिलाड़ी जानता है कि उनकी सीमाएं क्या हैं, लेकिन कुछ इसे खुले तौर पर स्वीकार करते हैं जैसे हर्षल ने किया। वह ऐसा इसलिए कर सकें क्योंकि उनके लिए गति की कमी, अपूर्ण एक्शन आकस्मिक हैं। जो कोशल उनके पास नहीं है, वह उस पर ज़्यादा ध्यान देते ही नहीं हैं। उनके पास जो क्षमताएं हैं, वह उसी के साथ बढ़िया प्रदर्शन करने का तरीक़ा ढूंढ लेते हैं।
यदि आप बल्लेबाजों को तेज गति से आउट नहीं कर सकते तो आप क्या करते हैं? आप निपुणता और निरंतरता विकसित करते हैं।
हर्षल के पास दो तरह की धीमी गेंदें हैं, ऑफ़-कटर और एक हाथ के पिछले हिस्से से (बैक ऑफ़ द हैंड)। जब उन्हें बताया गया कि वह रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरु के लिए अंतिम ओवरों में गेंदबाज़ी करेंगें, उसके बाद उन्होंने अपनी यॉर्कर पर काम करते हुए, ख़ुद को इतना निपुण बनाया कि वह उच्च दबाव वाली परिस्थितियों में आत्मविश्वास के साथ उन्हें फेंक सकते हैं। वह स्टंप के क़रीब या क्रीज़ के कोने से गेंदबाज़ी करते हैं। न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ दूसरे टी20 मैच मे हर्षल क्रीज़ के इतने कोने से गेंदबाज़ी कर रहे थे कि अपंयारों को नो बॉल की पुष्टि करने के लिए तीसरे अंपायर के पास जाना पड़ा। हालांकि हर्षल ने पूरे निपुणता के साथ क्रीज़ के कोने से उनदोनों गेंदों को फेंका था और वह नो बॉल नहीं थे।
अत्याधिक ओस का मतलब था कि हर्षल अपने यॉर्कर गेंदों पर ज़्यादा भरोसा नहीं कर सकते थे। उन्होंने इसके बाद गेंदों की गति में लगातार परिवर्तन किया और कुछ बढ़िया कटर गेंदों के साथ गेंदबाज़ी की। साथ ही अपनी गेंदबाज़ी के कोण में भी कई तरह के बदलाव किए।
जब उनसे धैर्य और निरंतरता के बारे में पूछा गया तो हर्षल ने कहा, " यह कुछ ऐसा है जो मैं नहीं कहूंगा कि यह मुझमें जन्मजात था, लेकिन मैंने अनुभवों के माध्यम से धैर्य और निरंतरता के बारे में सीखा है। मैं एक बहुत अधीर व्यक्ति था। जीवन आपको ये चीज़ें सिखाता है। घरेलू क्रिकेट के इन दस वर्षों में मैंने जितनी भी असफलताओं का सामना किया है, उन्होंने मुझे सिखाया है कि आपको धैर्य रखने की आवश्यकता है।"
"लोग धैर्य के बारे में पर्याप्त बात नहीं करते हैं। मुझे लगता है कि प्रगति रातोंरात नहीं होती है। यह एक धीमी प्रक्रिया है, एक क्रमिक प्रक्रिया है। यदि आप बदलाव करना चाहते हैं, यदि आप किसी चीज़ में बेहतर होना चाहते हैं, तो आपको ख़ुद को अनुमति देने की, ख़ुद को समय देने की आवश्यकता है। यदि आप अपनी मानसिकता में एक स्थान से दूसरे स्थान पर कूदते रहते हैं, तो यह आपके काम नहीं आने वाला है।"

सौरभ सोमानी ESPNcricinfo के अस्सिटेंट एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।