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फ़ीचर्स

एक नए और अपिरिचत जाडेजा

पहले वह छोटी-मोटी पारियां खेलते थे और अब अपने दम पर मैच का परिणाम बदल रहे हैं

वह शानदार तरीके से अपने पारी की शुरुआत करते हैं। पहले समय लेते हैं, गेंद को देखते हैं, परिस्थितियों के प्रति अनुकुलित होने का प्रयास करते हैं, फिर उनके पैर चलते हैं। उनके हाथ क्रिकेटीय तकनीक के अनुसार बिल्कुल वैसे ही चलते हैं, जैसा चलना चाहिए। वह गेंदों को छोड़ते हैं, रोकते हैं, कभी-कभी गेंदों से छेड़खानी भी करते हैं। फ़ुलर लेंथ की गेंदों पर वह आगे पैर निकाल कर खेलते हैं। अपने शॉट्स को थोड़ा लेट खेलते हैं, अपनी आंखों के नीचे, हल्के हाथों से, कभी बल्ले का मुंह खोल कर…. पता ही होगा आपको, इन सारी चीज़ों के बारे में।
और, क्योंकि वह ये सारी चाज़ें कर सकते हैं, उसी कारणवश वह अपने बल्लेबाज़ी के सबसे बेहतरीन दिनों से गुज़र रहे हैं। साथ ही उनकी बल्लेबाज़ी के क्षमता में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है। एक बल्लेबाज़ जो आगे निकल कर आता है और गेंदबाज़ों के सर के ऊपर से ताकतवर शॉट्स लगाते हैं। एक बल्लेबाज़ जो गेंदों को शानदार तरीके से स्लैश करता है।
कुल मिला कर मोहाली टेस्ट के दूसरे दिन रवींद्र जाडेजा अकल्पनीय तरीके से बल्लेबाज़ी कर रहे थे।
वह लंबे समय से बल्ले के साथ बढ़िया प्रदर्शन कर रहे हैं। आइए उनके कुछ पुराने दिनों को याद किया जाए। उन्होंने भारतीय टीम में प्रवेश पाने के लिए रणजी ट्रॉफ़ी में शानदार तिहरे शतक से सबको अपनी क्षमता से परिचय करवाया था। हालांकि घरेलू क्रिकेट के बढ़िया प्रदर्शन को अंतर्राष्टीय स्तर पर तब्दील करने के लिए उन्हें थोड़ा समय लगा। पहली 30 पारियों में उन्होंने दो अर्धशतक लगाए, दोनों तेज़ गति से, लॉर्ड्स में 57 गेंदों में से 68 रनों की पारी उनके यादगार पारियों में से एक है।
इसके अलावा ऑकलैंड में 21 गेंदों में 26 रनों की पारी भी याद रखी जाएगी। उस वक़्त भारत भले ही वह मैच हार गया था लेकिन उनकी वह पारी एक उम्मीद की तरह थी। इसके अलावा नॉटिंघम में 24 गेंदों में 25 रन की पारी, वेलिंगटन में 24 गेंदों में 26 रन की पारी, उन पारियों में से थी, जहां फ़ैंस को उनकी बल्लेबाज़ी को देख कर मजा तो आ रहा था लेकिन वह अपर्याप्त थी।
क्या एक शानदार बल्लेबाज़ के तौर पर मोहाली में खेली गई पारी उनके बल्लेबाज़ी की बदलते स्वरूप की एक झलक थी? इस पारी के पहले 40 गेंदों में उन्होंने मात्र एक चौका लगाया। साथ ही ऋषभ पंत के साथ किए गए 104 रन की साझेदारी में उन्होंने 67 गेंदो में 35 रन बनाए और वहीं पंत ने 51 गेंदों में 68 रन बनाए।
जाडेजा पुछल्ले बल्लेबाज़ों के साथ भी काफ़ी कारगर तरीके से बल्लेबाज़ी करते हैं। ऐसा लगता है कि एक नंबर सात का बल्लेबाज़ नंबर चार के बल्लेबाज़ की तरह बल्लेबाज़ी कर रहा है। जाडेजा और नंबर 10 के बल्लेबाज़ मोहम्मद शमी ने 94 गेंदों का सामना किया। इसमें से जाडेजा ने 60 गेंदों का सामना करते हुए 71 रन बनाए। एक नए जाडेजा के बाद पुराने और आक्रामक जाडेजा सामने उभर कर आता है और वह अपने शतक के बाद तेज़ी से 175 रनोंं तक पहुंच जाता है। अब उनका टेस्ट बल्लेबाज़ी औसत 36.46 है, जो अब तक का सबसे अधिक है।
गेंदबाज़ी में देखें तो वह दिन के अंतिम गेंदबाज़ थे, उन्हें सबसे देरी से गेंदबाज़ी दी गई। हालांकि जाडेजा के साथ 'देर आए, दुरुस्त आए' वाला मामला बन रहा था। उन्होंने अपने पहले ओवर के दूसरी ही गेंद पर श्रीलंका के सबसे महत्वपूर्ण बल्लेबाज़ दिमुथ करूणारत्ने को आउट कर दिया। जिस गेंद पर करूणारत्ने आउट हुए, उसे काफ़ी ज़्यादा साइड स्पिन मिला था। उतना टर्न इस पिच पर किसी अन्य गेंदबाज़ को नहीं मिला था। जाडेजा की गेंदें अदभुत तरीके से नीची रह रही थी। बाक़ी सभी गेंदबाज़ को लगभग सही उछाल प्राप्त हो रहा था।
हालांकि इस जाडेजा को हम सभी जानते हैं। अगर वह 30 रन देकर एक विकेट लेता है और साथ ही 40-45 रन बना कर आउट हो जाता है तो ऐसा लगता है कि इस जाडेजा को हम जानते है।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि यह सब एक मेहमान पक्ष के लिए कितना अनुचित लगता होगा, विशेष रूप से श्रीलंका के लिए जिसके पास सीमित क्षमता वाले खिलाड़ी है। आपने पहले पांच विकेट जल्दी से हासिल कर लिए हैं, लेकिन विपक्षी टीम का नंबर 7, आपके नंबर 7 (निरोशन डिकवेला) जैसा नहीं है। वह कुछ रन ज़रूर बटोर कर टीम को दे सकता है लेकिन आप शायद उससे 175 रन बनाने के लिए भरोसा नहीं कर सकते हैं। आर अश्विन नंबर 8 पर कितने अच्छे हैं, मेरा मतलब है कि अगर आप एक गेंदबाज़ के रूप में टीम में खेल रहे हैं, तो बस गेंदबाजी में अच्छा हो, नहीं?
लेकिन जाडेजा भारत की टेस्ट प्रगति में सबसे आगे रहने वाले खिलाड़ियों में से एक हैं। बल्ले के साथ अगर रोहित शर्मा आपको रन बना कर नहीं देते हैं, तो विराट कोहली या पंत या नए लोगों में से एक या फिर जाडेजा हैं। इसके अलावा नंबर आठ पर आर अश्विन को भी आप हल्के में नहीं ले सकते। गेंद के साथ जसप्रीत बुमराह फिर मोहम्मद शमी, फिर जाडेजा और अश्विन। किसी तरह का कोई भी ढीलापन नहीं।
एक बात जो आप जाडेजा के लिए कह सकते हैं, वह यह कि उनके ऊपर जितने भी नाम हैं, उनमें से कोई भी क्रिकेट को इतना सहज नहीं बनाता है। किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में कहना अजीब बात है जिसका टीम में मुख्य काम बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स गेंदबाज़ी करना रहा है।
लेकिन चीजें बदल जाती हैं। और आप उस तरह के खिलाड़ी बन जाते हैं जो अकेले विपक्षी दल को बैकफ़ुट पर धकेल सकते हैं।

ऐंड्रयू फ़िडेल फर्नांडो ESPNcricinfo के श्रीलंकाई संवाददाता हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।