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कृष्णस्वामी : प्रक्रिया पर भारत और बुमराह का विश्वास आख़िरकार रंग लाया

इस पूरे दौरे पर मेहमान टीम अपनी योजनाओं पर टिकी रही है

वह एक ऐसा दृश्य था जो केपटाउन टेस्ट के दूसरे दिन मैदान पर भारतीय टीम की कहानी बयां कर रहा था।
पहली स्लिप पर तैनात चेतेश्वर पुजारा अपने पेट के बल ज़मीन पर लेटे हुए दूसरी स्लिप में मौजूद कप्तान विराट कोहली को गेंद को विकेटकीपर ऋषभ पंत के पीछे रखे हेल्मेट पर लगने से बचाते हुए देख रहे थे। तेम्बा बवूमा ने शार्दुल ठाकुर की गेंद को ऑफ़ स्टंप के बाहर से खेलने का प्रयास किया था और बल्ले का बाहरी किनारा लेकर गेंद कीपर और पहली स्लिप के बीच जा रही थी। वह अच्छी ऊंचाई पर पुजारा तक पहुंची लेकिन वह अपनी बायीं तरफ़ जाकर उसे लपक नहीं पाए।
कैच तो छूटा है और जले पर नमक छिड़कते हुए विपक्षी टीम को पांच अतिरिक्त पेनल्टी रन भी मिल गए।
भारतीय गेंदबाज़ों ने पूरे दिन अनिश्चितता के गलियारे में गेंदबाज़ी करते हुए साउथ अफ़्रीकी बल्लेबाज़ों पर दबाव बनाया था। साथ ही उन्होंने गेंद को दोनों तरफ़ हिलाया लेकिन या तो गेंद बल्ले को बीट कर गई या फिर जब किनारा लगा भी तो गेंद फ़ील्डरों से दूर जा रही थी और इस बार तो हाथ आकर भी कैच टपक गया। और तो और अगर पगबाधा की कोई अपील होती तो पिच का अतिरिक्त उछाल मेज़बान बल्लेबाज़ों को बचा जाता।
गेंदबाज़ी करते हुए यह लगातार दूसरी पारी थी जब सब कुछ सही करते हुए भी सफलता भारतीय टीम से मुंह फेरे हुए थी। पिछला मौक़ा जौहैनेसबर्ग की चौथी पारी में था जब भारतीय गेंदबाज़ों ने 62 बार ग़लत शॉट खेलने पर मजबूर किया लेकिन वह तीन ही विकेट झटक पाए। बारिश के कारण चौथे दिन बल्लेबाज़ी का आसान होना और ऊंचे कद के साउथ अफ़्रीकी गेंदबाज़ों द्वारा अतिरिक्त उछाल प्राप्त करना वह अन्य कारक थे जिन्होंने भारत की हार में अपना योगदान दिया। इन सबके बावजूद आप भाग्य को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हैं।
ऐसा लग रहा था कि किसी फ़िल्म की तरह यह सब कुछ फिर से हो रहा है। भारत 223 पर सिमट गया था और उस कैच के छूटने के बाद साउथ अफ़्रीका का स्कोर चार विकेट के नुक़सान पर 143 रन था।
पहले दिन भारत की पहली पारी में साउथ अफ़्रीकी गेंदबाज़ों ने अपनी सटीक गेंदबाज़ी से 64 ग़लत शॉट खेलने पर मजबूर किया और 77.3 ओवरों में 10 विकेट अपने नाम किए। वहीं भारत ने साउथ अफ़्रीकी पारी के 56वें ओवर में ही 64वां ग़लत शॉट निकाला। इस बार मोहम्मद शमी ने पांचवें स्टंप की लेंथ गेंद पर बल्ले का बाहरी किनारा निकाला। गेंद भले ही दूसरी स्लिप तक पहुंची नहीं, कोहली ने अपनी बायीं ओर डाइव लगाते हुए एक लाजवाब कैच लपका। यह भारतीय कप्तान के टेस्ट करियर का 100वां कैच था और अब साउथ अफ़्रीका का स्कोर था पांच विकेट के नुक़सान पर 155 रन।
भारतीय गेंदबाज़ों ने साउथ अफ़्रीकी गेंदबाज़ों की तरह 64 ग़लत शॉट खिलवाए थे लेकिन उनकी तुलना में उन्हें केवल आधी सफलताएं मिली थी।
हालांकि अब भाग्य बदलने वाला था। मात्र दो गेंदों बाद शमी की एक फ़ुल गेंद पड़कर सीधी रही और उसे धकेल रहे काइल वेरेन अपने बल्ले के बाहरी किनारे से विकेटकीपर पंत तक ही पहुंचा पाए। एक और लो कैच और इस बार पंत ने दायीं तरफ़ डाइव लगाकर कैच को पूरा किया।
प्रक्रिया : आप प्रत्येक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में यह शब्द सुनेंगे, और आप इसे इतनी बार सुनेंगे कि आप ख़ुद से पूछेंगे कि क्या इस स्थिति से परे इसका कोई अर्थ है और क्या खिलाड़ी इसका हिस्सा बनना चाहता भी हैं या नहीं। हालांकि सच तो यह है कि प्रक्रिया किसी भी खिलाड़ी के जीवन की रोज़ी-रोटी है और सब कुछ इसी पर निर्भर करता है।
इस पूरी सीरीज़ में भारतीय गेंदबाज़ अपनी प्रक्रिया का पालन करते नज़र आए हैं, फिर चाहे सफलता उनके हाथ लगे या ना लगे। यहां तक कि जब डीन एल्गर साउथ अफ़्रीका को दूसरे टेस्ट में जीत की ओर ले जा रहे थे तो कुछ क्षणों को छोड़कर बाक़ी समय भारतीय गेंदबाज़ अपनी योजनाओं पर टिके रहे। गेंद एल्गर के बल्ले के पास से जाती रही और वह लगातार बाहरी किनारा खोजते रहे।
केपटाउन के पहले दिन जसप्रीत बुमराह ने एल्गर के बल्ले का बाहरी किनारा निकाला और उन्हें तीन रन के स्कोर पर बाहर का रास्ता दिखाया। यह ठीक उसी प्रकार की गेंद थी जो उन्होंने जौहैनेसबर्ग में कई बार डाली थी लेकिन इस बार परिणाम उनके पक्ष में रहा। बुमराह और एल्गर दोनों जानते हैं कि एल्गर का 96 पर नाबाद रहना और तीन पर आउट होना उसी प्रक्रिया के दो विपरित परिणाम हैं।
अंत में सफलता उन्हीं टीमों के हाथ लगती है जो निरंतरता के साथ अपनी प्रक्रियाओं का पालन करती है। केपटाउन में दूसरे दिन भारत को अपनी सटीक गेंदबाज़ी का फल मिला। उन्हें एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण बढ़त भी मिली जो साउथ अफ़्रीका में उनकी पहली टेस्ट सीरीज़ जीत में अहम साबित हो सकती है। साथ ही सबसे उपयुक्त बात यह रही कि जौहैनेसबर्ग में 38 ओवर डालने के बाद केवल एक विकेट चटकाने वाले बुमराह ने केपटाउन की पहली पारी में पांच शिकार किए। अनिवार्य रूप से, दिन के खेल के अंत में बुमराह की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में प्रक्रिया पर भारी ज़ोर दिया गया।
जब उनसे पूछा गया कि इस विशेष अवसर के लिए क्या उन्होंने कुछ अलग किया था, बुमराह ने कहा, "मैंने कुछ भी असाधारण नहीं किया। मैं बस अपनी दिनचर्या और प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा था। मैं वह सब कुछ किया जो मैं हमेशा एक टेस्ट मैच से पहले करता हूं। मैं क्रोधित नहीं था और ना ही मैंने कुछ अतिरिक्त किया। मैं बस वर्तमान में रहने की कोशिश कर रहा था।"
इस मैच से पहले बुमराह के हालिया फ़ॉर्म पर बातें की जा रही थी। उनकी लाइन और लेंथ पर सवालिया निशान उठ रहे थे और हमने भी उनकी छोटी गेंदों पर धार की कमी का वर्णन किया।
उन सभी आलोचनाओं में योग्यता हो सकती है लेकिन पिछले कुछ महीनों में बुमराह ने बिना विकेट लिए भी अच्छी गेंदबाज़ी करने पर ज़ोर दिया है। और वह जानते हैं कि परिणाम और प्रक्रिया के बीच का रिश्ता कितना मज़बूत हो सकता है।
उन्होंने कहा, "देखिए, सफलता निरंतरता के साथ प्रक्रिया का पालन करने और एक गेंदबाज़ी दल के रूप में दबाव बनाने का फल है। किसी दिन मुझे विकेट मिलेगी तो कभी कोई और गेंदबाज़ विकेट चटकाएगा, लेकिन एक आक्रमण के तौर पर हम अपनी योजनाओं पर टिके रहने और मैच की स्थिति के अनुसार ख़ुद को ढालने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।"
"आपकी प्रशंसा भी होगी और कुछ लोग आपकी आलोचना भी करेंगे। मैं बस अपने कार्य पर ध्यान देता हूं। अगर मैं बाहर से हो रहे शोर पर ग़ौर करूंगा तो इससे मुझे कोई लाभ नहीं होगा। इसलिए जब मैं गेंदबाज़ी करता हूं, मैं चीज़ों को नियंत्रित करने की कोशिश करता हूं [जो मैं नियंत्रित कर सकता हूं], और गेंदबाजी के प्रति मेरा दृष्टिकोण रखता हूं। साथ ही मैं दुनिया भर में जो कुछ भी हो रहा है उसपर ध्यान नहीं देता हूं।"
उन्होंने आगे कहा, "कुछ लोगों को मेरी गेंदबाज़ी पसंद आती है और कुछ लोगों को नहीं। लेकिन मेरा ध्यान हमेशा अपनी प्रक्रिया का पालन करने और देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने पर केंद्रित होता है।"
मंगलवार और बुधवार को बुमराह अपने उच्च मानकों पर खरे उतरे। और हमेशा कि तरह उन्होंने ऐसे क्षण दिए जो हम लंबे समय तक याद रखेंगे। दिन की पहली गेंद ऑफ़ स्टंप के बाहर से एडन मारक्रम को छोड़ती हुई चली गई और इसने उन्हें अगली गेंद को छोड़ने के लिए प्रेरित किया। लेकिन अगली गेंद उसी स्थान से तेज़ी से अंदर आई और उनका ऑफ़ स्टंप उड़ा ले गई।
आपको वह गेंद याद रहेगी और बुमराह का मार्को यानसन को बोल्ड करने के बाद वह घूरना याद रहेगा। इन पलों को याद अवश्य करना चाहिए लेकिन बुमराह की उत्कृष्टता और भारत के इस गेंदबाज़ी आक्रमण को समझने के लिए हमें उन सभी गेंदों पर भी ग़ौर करना चाहिए जिन पर विकेट नहीं मिली लेकिन बुमराह ने विपक्षी बल्लेबाज़ों में बेचैनी पैदा की।

कार्तिक कृष्णस्वामी ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।