सूर्यकुमार यादव ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अभी केवल पांच पारी खेले हैं, लेकिन उन्हें देखकर ऐसा लगता नहीं है। उनके स्ट्रोक-प्ले में आत्मविश्वास दिखता है, साथ ही वह शांत और निर्णायक भी हैं।

30 साल की उम्र पार करने के बाद डेब्यू करने का मतलब है कि सूर्यकुमार के पास पृथ्वी शॉ और ईशान किशन की तरह लंबा करियर नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह भी है कि वह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अधिक समझ और अनुभव के साथ आए हैं। उन्होंने मार्च में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टी20 डेब्यू करते हुए तत्काल प्रभावित किया और फिर वनडे टीम में आते हुए श्रीलंका के ख़िलाफ़ प्लेयर ऑफ द सीरीज़ का ख़िताब जीता।

भारत तीसरा वनडे मैच हार गया, लेकिन सीरीज़ में 2-1 से जीत दर्ज की। यादव ने तीनों मैचों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तीसरे वनडे के बाद उन्होंने कहा, "जाहिर है हर किसी का भारत के लिए खेलने का सपना होता है। इसके पीछे काफी प्रयास, कड़ी मेहनत और धैर्य होता है। हालांकि यह इंतज़ार अब उचित साबित हो रहा है। मैं वास्तव में बहुत खुश हूं। यहां से, मैं इसे कैसे आगे ले जाता हूं, यह सब मेरे हाथ में है। लेकिन मैं आगे की यात्रा के लिए निश्चित रूप से उत्साहित हूं।"

सूर्यकुमार हमेशा से ही दमदार बल्लेबाज़ रहे हैं। हालांकि उन्होंने 2018 में मुंबई इंडियंस में वापसी को अपने करियर का टर्निंग पॉइंट बताया। इसके बाद उनका खेल एक नए स्तर पर चला गया। यह आंकड़ों से भी पता चलता है। 2018-19 सीज़न के बाद से सूर्यकुमार लिस्ट ए क्रिकेट में 131.88 के स्ट्राइक रेट और 55.56 के औसत से रन बना रहे हैं। वहीं, टी20 क्रिकेट में उनका औसत 37.60 और स्ट्राइक रेट 147.30 रहा है।

सूर्यकुमार ने कहा, "मैं हमेशा से उसी तरह से बल्लेबाज़ी करता रहा हूं, जैसा मैं अभी कर रहा हूं। लेकिन 2018 में मुंबई इंडियंस में आने के बाद चीजें थोड़ी बदली हैं। मुझे पता चला कि मेरी जिम्मेदारी क्या है और मैं अपने खेल को एक कदम आगे कैसे ले जा सकता हूं। मैं अब और भी अधिक अभ्यास करता हूं। मैं उन सभी खिलाड़ियों से बात करता हूं, जो पिछले पांच-छह वर्षों में मुझे वास्तव में अच्छी तरह से जानते हैं।"

सूर्यकुमार ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ वनडे सीरीज़ में क्रमशः 31*, 53 और 40 के स्कोर बनाए। हालांकि दूसरे और तीसरे वनडे में अपनी पारी को आगे नहीं बढ़ा पाने पर उन्होंने निराशा भी व्यक्त की। टीम के आधे खिलाड़ियों के आउट हो जाने के बावजूद वह दूसरे मैच में अच्छा दिख रहे थे और उन्हें टीम को जीत तक ले जाना चाहिए था। दीपक चाहर की पारी की बदौलत भारत ने इस मैच में जीत दर्ज की थी। तीसरे वनडे में यादव के विकेट गिरने का यह मतलब था कि भारत अब बड़ा स्कोर नहीं खड़ा कर सकता, उसकी संभावना कम हो गई।

सूर्यकुमार ने कहा, "मैं इससे निराश हूं। जिस तरह से मैंने पहले मैच में मैंने शुरुआत की थी, उससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा हुआ था। दूसरे मैच में भी मैं टीम को जीत तक ले जा सकता था, लेकिन मैं आउट हो गया। इससे वास्तव में बहुत निराशा हुई। तीसरे मैच में भी एक अच्छा मौका था कि मैं एक छोर पकड़ कर अंत तक खेलने की कोशिश करूं, लेकिन ऐसा नहीं कर सका। यह कुछ चीजें हैं, जिसका मैं वास्तव में ध्यान रख रहा हूं, खासकर अच्छी शुरूआत को कैसे लंबी या निर्णायक पारी में बदलें। आप इसी तरह सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं।"

सूर्यकुमार इस समय जबरदस्त फ़ॉर्म में हैं। वह लेग साइड में संतुलित रैंप शॉट, पैडल-स्कूप, ड्राइव और फ़्लिक बेहद आसानी से खेलते हैं। उन्होंने कहा, "मैं मुंबई का लड़का हूं। मुंबई में क्लब मैचों और घरेलू क्रिकेट के दौरान आपको जिस तरह की पिच मिलती है, वह बहुत चुनौतीपूर्ण होती है। इसलिए वहां आप स्वचालित रूप से सोचते हैं कि आपको उस तरह के विकेटों पर कौन से स्ट्रोक खेलने हैं। वे अनुभव अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी काम आ रहे हैं। मैं बस अपनी दिनचर्या का पालन करते हुए चीजों को सरल रखने की कोशिश कर रहा हूं।"

उन्होंने आगे कहा, "खेल वही रहता है। खेल में कोई बदलाव नहीं होता है। आप किसी भी स्तर पर किसी भी टीम के ख़िलाफ़ खेलते हैं, आपको मैदान में जाकर वही काम करना होता है। जो मैं घरेलू क्रिकेट और नेट्स में करता हूं, वहीं मैं आईपीएल और अब अंतर्राष्ट्रीय मैचों में भी करने की कोशिश करता हूं। मैं मैदान में जाकर एन्जॉय करना पसंद करता हूं। आपने देखा होगा, जब मुझे बल्लेबाज़ी करने का मौका मिलता है तो मैं दौड़ कर बल्लेबाज़ी के लिए जाता हूं। मैं वास्तव में उस पल का आनंद लेता हूं।"

फ़िलहाल सूर्यकुमार यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जब भारत अपनी पूरी स्ट्रेंथ के साथ मैदान में उतरे, तब भी वह इसका हिस्सा रहें। जैसा कि उन्होंने कहा, वह अपना करियर कैसे बनाते हैं, यह उनके हाथ में है और अब तक उन हाथों ने बहुत अच्छा काम किया है।

सौरभ सोमानी ESPNcricinfo में असिस्टेंट एडिटर हैं, अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के दया सागर ने किया है