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जांबाज़ जिमी ने कर दिया कमाल

न्यूज़ीलैंड के लिए सालों के निराशा को नीशम की आतिशी पारी ने भुला दिया

Jimmy Neesham aims for the midwicket boundary, England vs New Zealand, T20 World Cup, 1st semi-final, Abu Dhabi, November 10, 2021

डीप मिडविकेट की ओर बॉउंड्री लगाते नीशम  •  Getty Images

जिमी नीशम का पहला छक्का डीप मिडविकेट बाउंड्री के ऊपर एक साधारण संपर्क के बावजूद आया। वह जब क्रीज़ पर आए तो न्यूज़ीलैंड को 25 गेंदों पर 59 रनों की ज़रूरत थी। लियम लिविंग्स्टन के विरुद्ध उनके खेले पहली दो गेंदों में एक वाइड और एक मिडविकेट की ओर खेला सिंगल शामिल था, तब तक आवश्यक रन रेट 14 से ऊपर चला गया था।
लेकिन उनके अगले ओवर की पहली गेंद एक उम्मीद की किरण बन बैठी। यह कोई लिविंग्स्टन की शैली में गगनचुंबी छक्का नहीं था, ना ही आसिफ़ अली की धमाकेदार हिट। क्रिस जॉर्डन लंबाई में चुके और नीशम को छह रन सिर्फ़ इसी कारण मिले कि उन्होंने बैटस्विंग में मानो अपनी पूरी ताक़त झोंक दी। न्यूज़ीलैंड को अभी भी 23 गेंदों पर 51 रन चाहिए थे और शायद यह अकेला हिट उसके लिए पर्याप्त नहीं था।
क्रिस केर्न्स के पिता लांस एक हाथ से छक्के मारते थे। ब्रेंडन मैक्कलम की आदत थी प्वाइंट की ओर सरकते हुए फ़ाइन लेग के ऊपर छक्के स्कूप करने की। लेकिन न्यूज़ीलैंड के आधुनिक क्रिकेट इतिहास का सबसे यादगार छक्का शायद 2015 के सेमीफ़ाइनल में लगा था। क्रिकेट के महानतम गेंदबाज़ों में एक डेल स्टेन को आख़िर में दो गेंदों पर पांच रन बचाना था, जब ग्रांट एलियट ने उन्हें सीधे स्टैंड्स में भेजा था।
एलियट ख़ुद उस टूर्नामेंट में नीशम के आगे चुने जाने में थोड़े भाग्यशाली थे। लेकिन जब एलियट ने छक्का लगाया तो नीशम की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। उन्होंने ट्वीट किया कि यह उनके जीवन का सबसे यादगार लम्हा है।
एक प्रतिभाशाली ऑलराउंडर होने के बावजूद उस विश्व कप में नीशम की ज़रूरत नहीं पड़ी थी। उन्होंने टेस्ट में अच्छा खेल दिखाया था, लेकिन उनके नाम कोरी एंडरसन की तरह विश्व रिकॉर्ड वन डे सैकड़ा जैसा कुछ नहीं था।
नीशम का दूसरा बड़ा शॉट लांग ऑन और मिडविकेट के बीच में था। आपको बेन स्टोक्स का लॉर्ड्स में लगाया गया एक छक्का तो याद होगा? उन्होंने वाइड लांग ऑन पर बड़ा शॉट लगाया और फ़ील्डर ट्रेंट बोल्ट ने कैच लपका ज़रूर लेकिन बाउंड्री रोप पर पैर डाल बैठे
यहां पर भी ऐसा कुछ घटा। नीशम के शॉट को जॉनी बेयरस्टो ने रोक तो लिया लेकिन टीवी रिप्ले से ज़ाहिर था कि उस वक़्त उनका घुटना बाउंड्री छू चूका था। इसके बावजूद न्यूज़ीलैंड अभी तक इस मैच में फिसल रहा था क्योंकि इंग्लैंड की इस टीम को डेथ ओवर्स में ख़ास महारथ हासिल है। शायद यह भी पर्याप्त नहीं था।
नीशम के लिए मिडविकेट के क्षेत्र में बड़े शॉट लगाना कोई नई बात नहीं है। इतिहास के सबसे रोमांचक सीमित ओवर के अंतर्राष्ट्रीय मैच के आख़िर में भी उन्होंने जोफ़्रा आर्चर को मैदान के उसी भाग में मारा था। सुपर ओवर के उस प्रहार के बाद टीम को सात रन चाहिए थे।
उन्होंने फिर लेग साइड पर दो रन चुराए। अगली गेंद पर एक ही रन मिला। आख़िरी गेंद पर मार्टिन गप्टिल दूसरे रन को पूरा करने में असफल रहे और जॉस बटलर ने बेल्स गिराते हुए इतिहास रच दिया था।
उस मैच में नीशम ने अपनी टीम के लिए सर्वश्रेष्ठ 43 रन पर तीन विकेट लिए थे। उन पर सुपर ओवर में भरोसा जताया गया और उन्होंने पांच गेंदों पर 13 रन बनाए। न्यूज़ीलैंड को विश्व कप दिलाने में जो कुछ नीशम से बन सकता था, उन्होंने वह कर दिखाया था। लेकिन यह भी पर्याप्त नहीं था।
नीशम का तीसरा छक्का शायद सबसे भद्दा था। आदिल रशीद के लेग स्पिन के ख़िलाफ़ मिडविकेट के ऊपर स्लॉग शायद उनके लिए सबसे कारगर सिद्ध होता और उन्होंने ऐसा ही किया। गेंद बल्ले से लगे और छह रन मिले। इस शॉट में कुछ भी आकर्षक नहीं था लेकिन काम तो आया ना?
यह नीशम का आख़िरी बड़ा शॉट साबित हुआ। ओवर की अंतिम गेंद को कवर की दिशा में चौका मारने के प्रयास में उन्होंने कैच थमा दिया। अगर समय नीशम के नियंत्रण में होता तो वह ज़रूर और बड़े शॉट लगाना चाहते और शायद विनिंग रन भी। लेकिन क्रीज़ में रहते हुए 11 गेंदें खेल कर उन्होंने असंभव को संभव में बदल डाला।
सोशल मीडिया पर उनकी दो तस्वीरें आप देख सकते हैं। एक में पूरी टीम विनिंग रन का जश्न मना रहा है और नीशम बिना किसी ख़ास भाव के एक प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठे हैं। दूसरे में स्टेडियम खाली हो चुका है और उनके साथी भी चले गए हैं लेकिन नीशम उसी कुर्सी पर उसी मुद्रा में बैठे सामने देख रहे हैं।
उनको कैसा लग रहा था और वह क्या सोच रहे थे शायद हमें कभी पता भी नहीं चलेगा।
लेकिन 11 गेंदों पर तीन छक्कों और एक चौके के सहारे 27 रन - क्या यह पर्याप्त था?

ऐंड्रयू फ़िडेल फ़र्नांडो ESPNcricinfo के श्रीलंका संवाददाता हैं, अनुवाद ESPNcricinfo के सीनियर असिस्टेंट एडिटर और स्थानीय भाषाओं के प्रमुख देबायन सेन ने किया है