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विश्‍व कप फ़ाइनल की वेन्यू एमसीजी में भारत ने अपने अनुभव को बेहतर किया

उनके पास इस मैदान पर अच्‍छा स्‍कोर बनाने का अनुभव है और पाकिस्‍तान वाले मैच से वह जानते हैं कि चेज़ कैसे किया जाए

इस विश्व कप में अब तक जैसे उलटफेर हुए हैं, कुछ भी भविष्यवाणी करना ख़तरे से खाली नहीं है। लेकिन अगर भारत फ़ाइनल में प्रवेश करता है तो निश्चित रूप से उन्हें मेलबर्न में फ़ायदा होगा।
इस विश्‍व कप में मौसम की वजह से मेलबर्न में केवल दो ही मैच पूरे हो पाए हैं और भारत इन दोनों ही मैचों को खेला और जीता है। एक अन्‍य जिस मुक़ाबले का यहां परिणाम निकला है उसमें इंग्‍लैंड को आयरलैंड के हाथों डीएलएस पद्धति के तहत हार का सामना करना पड़ा।
इससे भी ज्‍़यादा उनके पास एमसीजी में हर परिस्थिति में खेलने का अनुभव है। रोहित शर्मा ने यहां दोनों बार टॉस जीते, पहले में उन्होंने पाकिस्‍तान के ख़‍िलाफ़ लक्ष्‍य का पीछा किया तो ज़‍िम्‍बाब्‍वे के ख़‍िलाफ़ पहले बल्‍लेबाज़ी की और लक्ष्‍य का बचाव किया।
भारतीय कोच राहुल द्रविड़ ने मैच के बाद कहा, "हम बस यह अनुभव लेना चाहते थे कि इन परिस्थितियों में क्‍या एक सही स्‍कोर हो सकता है। साथ ही हमने यह महसूस किया कि अगर हम पहले बल्‍लेबाज़ी करते तो इससे हमें 20 ओवर पूरे खेलने का मौक़ा मिलता और देखते कि हम अनुमानित स्‍कोर या उससे ज्‍़यादा बना पाते हैं या नहीं।"
उन्‍होंने ऐसा ही किया। एमसीजी की फ़्रेश पिच पर उन्‍होंने शीर्ष क्रम को ढहता देखा। रोहित शर्मा आउट हुए और उसके बाद केएल राहुल और विराट कोहली पर पहले दस ओवरों में सेटअप करने का मौक़ा था।
सूर्यकुमार यादव की बेहतरीन पारी की वजह से भारत आख़‍िरी दस ओवरों में 107 रन बनाने में क़ामयाब रहा और अनुमानित स्‍कोर से ज्‍़यादा पांच विकेट पर 186 रन बनाए। उन्होंने मैदान पर ज़‍िम्बाब्वे की अनुभवहीनता का भी शिकार किया। राहुल का शानदार अर्धशतक 30 रन पर ख़त्‍म हो सकता था अगर वेलिंगटन मसाकाद्जा को पता होता कि डीप मिडविकेट पर कहां खड़ा होना है।
एमसीजी की स्क्वेयर बाउंड्री बड़ी हैं जहां आसानी से डीप में दो रन मिल जाते हैं, लेकिन क्षेत्ररक्षकों को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि बाउंड्री ना हो। दो रन ना हो जाएं इसी वजह से मसाकाद्जा बहुत आगे खड़े थे और एक कैच होने वाली गेंद उनके सिर के ऊपर से निकलकर चौके के लिए निकल गई। यह ज़‍िम्‍बाब्‍वे के लिए एक बड़ी सीख थी, जहां उन्‍होंने अभ्‍यास मैच में ही इस मैदान पर खेला था।
ज़‍िम्‍बाब्‍वे के कप्‍तान क्रेग एर्विन ने कहा, "हमने विश्‍व कप से पहले यहां पर श्रीलंका के ख़‍िलाफ़ अभ्‍यास मैच खेला था और तब के एमसीजी में और आज के एमसीजी में बहुत अंतर है। ऐसे माहौल में क्षेत्ररक्षण करना मुश्किल होता है क्‍योंकि आप किसी पर चिल्‍ला भी नहीं सकते हैं चाहे वह आपके पास हो क्‍योंकि वह आपको सुन ही नहीं सकता। एक चीज़ जो हमने सीखी है कि आपको कीपर पर नज़र बनाए रखनी होती है और मैं पूरे समय बस यही समझ रहा था कि कहां जाना है।"
और यह एक और फ़ायदा है भारत के लिए। उनको इस बार विश्‍व कप में अब तक बहुत समर्थन मिला है और अगर वे फ़ाइनल में पहुंचते हैं तो उन्‍होंने इस शोर का दोहरा अनुभव है जबकि पाकिस्‍तान के पास एक बार का अनुभव है।
भारतीय गेंदबाज़ों के लिए भी यह अच्‍छा मैच रहा, इस बार वह तब लक्ष्‍य का बचाव कर रहे थे जब रात में बल्‍लेबाज़ी आसान हो जाती है। स्पिन ज़रूर एमसीजी पर एक अच्‍छा हथियार होती है जब बीबीएल में जनवरी में पिचें सूखी होती हैं, लेकिन अक्‍तूबर और नवंबर में यह सख्‍़त हैं। अक्षर पटेल एक बार दोबारा महंगे साबित हुए लेकिन रविचंद्रन अश्विन ने 22 रन देकर तीन विकेट चटकाए।
अश्विन ने मैच के बाद कहा, "स्पिनरों के लिए मुझे लगता है कि आपको गति को समझने की ज़रूरत है और कैसे आप एक गति या एक लेंथ पर गेंदबाज़ी नहीं कर सकते। और आपको इसमें लगातार बदलाव करने की क्षमता होने की ज़रूरत है, क्‍योंकि इस पिच पर कई अच्‍छे शॉट खेले जा रहे हैं क्‍योंकि बल्‍लेबाज़ जानते हैं कि एक बार अगर उन्‍हें अच्‍छी शुरुआत मिल गई तो उन्‍हें स्पिनरों पर आक्रमण करना होगा। "
साउथ अफ़्रीका की हार के बाद भारत स्‍वत: सेमीफ़ाइनल में पहुंच गया और इससे उन्‍हें नंबर पांच पर दिनेश कार्तिक की जगह ऋषभ पंत को खिलाने का मौक़ा मिल गया।
बिल्‍कुल भारत इस टूर्नामेंट में बचे स्पिन आक्रमण से अवगत है। आदिल रशीद से मिचेल सैंटनर, ईश सोढ़ी, मोहम्‍मद नवाज़ और शादाब ख़ान और ये सभी भारत के दायें हाथ के बल्‍लेबाज़ों से गेंद को हिटिंग क्षेत्र से दूर रख सकते हैं। एमसीजी में पाकिस्‍तान के ख़‍िलाफ़ भारत ने अक्षर को प्रमोट किया लेकिन यह सफल नहीं रहा। ज़‍िम्‍बाब्‍वे के ख़‍िलाफ़ एक अच्‍छे कैच की वजह से पंत बड़ा स्‍कोर नहीं बना सके, लेकिन यह एक अच्‍छा अभ्‍यास रहा कि चीज़ें कैसी दिख सकती हैं।
हालांकि द्रविड़ ने कहा कि यह किसी भी चीज़ की ओर इशारा नहीं है। उन्‍होंने कहा, "हर कोई चयन के लिए उपलब्‍ध है, अगर कोई मैच नहीं खेलता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम उसके साथ दोबारा नहीं जा सकते हैं।"
अगले रविवार को होने वाले फ़ाइनल में एमसीजी में कौन खेलेगा यह तय होने में अभी भी बहुत सारे अगर-मगर हैं। लेकिन भारत ने एमसीजी में खेलना का अनुभव जुटा लिया है और अप्रत्याशित रहने वाले इस टूर्नामेंट में यह बहुत काम आ सकता है।

ऐंड्रयू मक्ग्लैशन ESPNcricinfo में डिप्टी एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।