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साई सुदर्शन : मां के सामने पहला शतक लगाना एक अलग ही एहसास

तमिलनाडु के बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने छत्तीसगढ़ के ख़िलाफ़ विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी मैच में 121 रन बनाए

साई सुदर्शन ने छत्तीसगढ़ के विरुद्ध अपने लिस्ट-ए करियर का पहला शतक जड़ा  •  ESPNcricinfo

साई सुदर्शन ने छत्तीसगढ़ के विरुद्ध अपने लिस्ट-ए करियर का पहला शतक जड़ा  •  ESPNcricinfo

तमिलनाडु के सलामी बल्लेबाज़ बी साई सुदर्शन के लिए मंगलवार का दिन कभी ना भूलने वाला दिन बन गया। उन्होंने विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में छत्तीसगढ़ के विरुद्ध खेलते हुए शतक बनाया और उन्हें उनकी आईपीएल टीम गुजरात टाइटंस ने रिटेन भी किया। यह ना सिर्फ़ लिस्ट-ए में बल्कि सीनियर स्तर के किसी भी टूर्नामेंट में उनका पहला शतक था।
सुदर्शन के लिए यह शतक और भी महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि उनकी मां मैदान पर ही मौजूद थीं। वह अपने बेटे का खेल देखने के लिए चेन्नई से लगभग 500 किलोमीटर दूर अलुर आई थीं।
सुदर्शन की मां उषा भारद्वाज ख़ुद पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी और अब एक फ़िटनेस ट्रेनर हैं। सुदर्शन की फ़िटनेस की देखभाल भी वही करती हैं। वह अब तक विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी 2022 के उनके तीनों मैचों में दर्शकों के बीच रहीं हैं, जहां उनके बेटे ने ज़बरदस्त फ़ॉर्म दिखाते हुए क्रमशः 49, 73 और 121 रन बनाए हैं।
उषा कहती हैं, "आज मैं भावुक होने से ज़्यादा ख़ुश हूं। हमें पता था कि सुदर्शन जिस तरह की मेहनत कर रहा है, यह शतक आने ही वाला है। पिछले मैच में ही उसका शतक हो जाता लेकिन वह रन आउट हो गया। उसने शतक भले ही लगाया है लेकिन आज उससे हमारी सामान्य बात होगी। हम उससे सबसे ज़्यादा बात तब करते हैं, जब वह कठिन समय से गुज़र रहा होता है।"
अपने इस शतक के बारे में ख़ुद सुदर्शन ने कहा, "आज मैं बहुत ख़ुश हूं। इस शतक का मुझे लंबे समय से इंतज़ार था। मां और भाई के सामने पहला शतक लगाना मेरे लिए और भी स्पेशल है।"
आईपीएल में गुजरात टाइटंस के लिए खेलने वाले सुदर्शन का पूरा परिवार ही खेलों से जुड़ा है। उनके पिता आर भारद्वाज 1993 के ढाका साउथ एशियाई (सैफ़) खेलों की 100 मीटर दौड़ स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वहीं उनके बड़े भाई साई राम भी प्रतियोगी स्तर पर फ़ुटबॉल और क्रिकेट खेल चुके हैं। राम भी अपने छोटे भाई का खेल देखने के लिए अपनी मां के साथ मैदान पर उपस्थित थे।
सुदर्शन के लिए पिछला एक-डेढ़ साल किसी सपने जैसा ही रहा है। जुलाई 2021 में वह पहली बार तमिलनाडु प्रीमियर लीग (टीएनपीएल) में खेलने के लिए उतरे और अपने पहले ही मैच में 43 गेंदों में 87 रन बनाकर सबको प्रभावित किया। सीज़न के आठ मैचों में पांच अर्धशतकों की मदद से 358 रन बनाकर वह टूर्नामेंट के दूसरे सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ रहे और इस मामले में अपने पहले ही सीज़न में शाहरुख़ ख़ान, विजय शंकर, नारायण जगदीशन, बाबा अपराजित और बाबा इंद्रजीत जैसे घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के दिग्गजों को पछाड़ा।
सुदर्शन के इस प्रदर्शन के बाद आईपीएल टीमों की नज़र उन पर पड़ी और उन्हें राज्य की सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी और विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी टीम में भी चुना गया। गुजरात ने उन्हें आईपीएल नीलामी में ख़रीदा और आईपीएल 2022 में डेब्यू करते हुए उन्होंने पांच मैचों में 127 के स्ट्राइक रेट और 36 की औसत से 145 रन बनाए। अब सुदर्शन फिर से घरेलू सीज़न में धमाका कर रहे हैं। थोड़ी सी निराशाजनक सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी के बाद उन्होंने विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में रफ़्तार पकड़ते हुए तीन मैचों में 81 की औसत और 110 के स्ट्राइक रेट से 243 रन बनाए हैं।
सुदर्शन के इस प्रदर्शन में उनके परिवार का बहुत बड़ा हाथ रहा है। माता-पिता दोनों के खेलों से जुड़े होने के कारण उन्हें 'खेल का अनुशासन' बनाए रखने में बहुत मदद मिली है। उन्होंने सुदर्शन के खेल को निखारने में पूरा साथ दिया है।
उषा कहती है, "सुदर्शन ने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत किया है। वह आठ साल का था, जब उसने खेलों में अपनी रूचि दिखाई। मेरे पति एथलीट रह चुके हैं और हम चाहते थे कि वह भी कोई खेल चुने और खेले। लेकिन हमें नहीं पता था कि वह क्रिकेट को ही चुनेगा। हां, जब उसने क्रिकेट को चुन लिया तो हमने भी उसका पूरा साथ दिया।"
उषा आगे बताती हैं, "मैं और मेरे पति उसके मानसिक और शारीरिक फ़िटनेस का पूरा ख़्याल रखते हैं। उसके लिए ही मैंने तमिलनाडु महिला क्रिकेट टीम के फ़िटनेस ट्रेनर का जॉब छोड़ दिया। पिछले दो सालों में शायद ही कोई ऐसा दिन रहा होगा, जब उसने ध्यान और योग नहीं किया हो। रात को बिस्तर पर जाने से पहले उसके पास एक सूची होती है कि उसे अगले दिन क्या-क्या करना है? इसमें योगा, ध्यान, दौड़, फ़ील्ड ट्रेनिंग और नेट प्रैक्टिस शामिल होता है। सुदर्शन एक लिस्ट हर रोज़ ख़ुद भी बनाता है, जिसमें उसने क्या अच्छा किया और क्या बेहतर हो सकता है, जैसे बिंदु शामिल होते हैं।"
सुदर्शन ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, "मैं अक्सर हर रोज़ अपने बारे में लिखता हूं कि आज मेरा लक्ष्य क्या था या मुझे क्या सुधार करना है। इस शतक के बारे में भी मैं लिखने वाला हूं क्योंकि आज मैंने प्रदर्शन ज़रूर किया है लेकिन कुछ ऐसी चीज़े हैं, जिन्हें ठीक करने की ज़रूरत है। मेरी कोशिश होती है कि उन चीज़ों पर काम किया जाए।"
वह कहते, "मैं इसके अलावा हर रोज़ बहुत सारी चीज़ें अपने आप को बेहतर बनाने के लिए करता हूं। मैं अलग-अलग तरीक़े का स्प्रिंट करता हूं, साथ ही 15-16 मिनट का लंबा दौड़ भी लगाता हूं। इसमें मुझे मेरे माता-पिता गाइड करते हैं, क्योंकि वे खिलाड़ी रह चुके हैं। मेरे पिता ने देश का प्रतिनिधित्व भी किया है। उन्हें पता है कि जब आपको अपने देश का प्रतिनिधित्व करना है तो किस तरह से फ़िट रहना होता है।"
सुदर्शन को पता है कि अभी यह उनके सफ़र की शुरुआत है और उन्हें लंबी दूरी तय करना है। इसलिए वह अपने लिए कोई बड़े और लंबे लक्ष्य नहीं बना रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका ध्यान आईपीएल या इस साल रणजी ट्रॉफ़ी में डेब्यू करने पर है तो उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए यही कहा कि फ़िलहाल वह विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी खेल रहे हैं और उनका लक्ष्य अपनी टीम को यह ख़िताब जिताने में मदद करना है।