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वानखेड़े से वानखेड़े तक: USA के ऑलराउंडर शुभम रांजणे की भावुक क्रिकेट यात्रा

रांजणे ने मुंबई से अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी और वह अब मुंबई में ही अपना पहला विश्व कप मैच खेलने वाले हैं

नागराज गोलापुड़ी
Feb 7, 2026, 11:42 AM • 6 hrs ago
2 अगस्त 2022 को शुभम रांजणे और उनकी पत्नी मौसमी पटेल दो सूटकेस लेकर सिएटल पहुंचे थे। उस समय इस जोड़े को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि वह किस रास्ते पर क़दम रखने जा रहे हैं। तब मुंबई के पूर्व ऑलराउंडर रांजणे ने मेज़र लीग क्रिकेट (MLC) खेलने के लिए USA जाने का फैसला किया था।
"हमें नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला है। हमेशा यह सवाल दिमाग़ में रहता था, क्या USA जाने का फ़ैसला सही साबित होगा या नहीं?" रांजणे चार साल पहले लिए गए अपने फ़ैसले को याद करते हुए कहते हैं।
रांजणे को MLC के ऑफर में "नई संभावनाएं" दिखीं, क्योंकि IPL के मालिकों ने USA के इस लीग में निवहश किया था। रांजणे ने कभी नहीं सोचा था कि उनका यह फ़ैसला कुछ ही सालों में एक और ज़िंदगी बदलने वाले फ़ैसले तक ले जाएगा। शनिवार को पुणे के 31 वर्षीय रांजणे USA की ओर से खेलते हुए गत चैंपियन भारत के ख़िलाफ़ अपना पहला विश्व कप मैच खेलने वाले हैं।
अगर रांजणे भारत के ख़िलाफ़ खेलते हैं, तो यह पल भावनात्मक रूप से और भी ख़ास होगा, क्योंकि एक दशक से ज़्यादा पहले वह भारत के लिए खेलने के अंतिम लक्ष्य के साथ, बेहतर क्रिकेट अवसरों की तलाश में मुंबई आए थे।
USA के शुरुआती मैच का वहन्यू मुंबई जानकर रांजणे मुस्कुरा उठे। "जब हमें पता चला कि USA विश्व कप में भारत के ख़िलाफ़ खेलने वाली है, तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैं नर्वस हो गया था," वह कहते हैं। "और फिर जब शेड्यूल आया और मैंने सुना कि यह मैच वानखेड़े में होगा, तो वह एक नॉस्टैल्जिक एहसास था।"
रणजी ट्रॉफ़ी में महाराष्ट्र के लिए खेलने वाले अपने पिता सुभाष रांजणे को खेलते देख शुभम को क्रिकेट से लगाव हुआ था। सुभाष लंबे क़द के तेज़ गेंदबाज़ थे और उन्होंने अपने पिता वसंत रांजणे की राह पकड़ी, जिन्हें सुनील गावस्कर और चंदू बोर्डे जैसे दिग्गजों ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खेले गए सर्वश्रेष्ठ मध्य तेज़ गेंदबाज़ों में गिना था। शुभम ने 11 साल की उम्र में महाराष्ट्र के लिए एज़-ग्रुप क्रिकेट खेलना शुरू किया और फिर 2010 के दशक के मध्य में मुंबई जाने का फैसला किया।
रांजणे ने क्लब क्रिकेट में DY पाटिल टीम के साथ पूर्व भारतीय तेज़ गेंदबाज़ एबे कुरुविल्ला के साथ काम किया और एक ऑलराउंडर के रूप में पहचान बनाई। 2016-17 सीज़न में उन्होंने आखिरकार मुंबई के लिए डेब्यू किया, जो खास नहीं रहा, सिवाय इसके कि उन्हें जसप्रीत बुमराह ने आउट किया, जिन्होंने छह विकेट लेकर गुजरात को जीत दिलाई थी। "मुंबई के लिए खेलना लगभग भारत का प्रतिनिधित्व करने जैसा था," वह कहते हैं।
लेकिन मुंबई की मजबूत बल्लेबाज़ी क्रम, जिसमें सूर्यकुमार यादव, अजिंक्य रहाणे, आदित्य तरे, अभिषेक नायर, श्रेयस अय्यर और सिद्धेश लाड जैसे खिलाड़ी शामिल थे, ने रांजणे को ऊपरी क्रम में ज़्यादा मौके नहीं दिए। कोविड-19 महामारी के बाद उन्होंने गोवा जाने का फ़ैसला किया, लेकिन जल्द ही उन्हें लगा कि वहाँ का क्रिकेट स्तर मुंबई की तुलना में बहुत कमज़ोर है।
"ऐसा नहीं था कि मुझे मुंबई में मौक़े नहीं मिल रहे थे। लेकिन उस समय टीम इतनी भरी हुई थी कि मध्य क्रम के ऑलराउंडर के रूप में मैं अपनी क़ाबिलियत दिखा नहीं पा रहा था। तब मुझे लगा कि अपने लिए सही फ़ैसला लेना ज़रूरी है।"
इसके बाद अपने क्रिकेट सपने को आगे बढ़ाने की चाह में रांजणे USA पहुंचे। जब वह भारत से गए, तो उन्होंने अपने माता-पिता को नहीं बताया कि वह हमेशा के लिए जा रहे हैं। उन्होंने बस इतना कहा कि कुछ महीनों के लिए क्रिकेट खेलने जा रहे हैं, जैसे वह पहले लिवरपूल में क्लब क्रिकेट खेलने जाया करते थे।
लेकिन USA पहुंचने के लगभग एक महीने बाद उन्होंने माता-पिता को बताया कि उन्हें BCCI से NOC मिल गया है और MLC ने उनके लिए O-1 वीज़ा की व्यवस्था की है। माता-पिता भावुक और चिंतित थे, क्योंकि रांजणे ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय की नौकरी ठुकरा दी थी। मई 2022 में उनकी शादी भी हो चुकी थी।
हालांकि रांजणे ने पहले ही अपनी महत्वाकांक्षाएं मौसमी को बता दी थीं। "मैंने उससे कहा था कि मेरा सपना है कि मैं लगातार IPL टीमों के लिए खेलूं और मैं उस स्तर तक पहुंचना चाहता हूं। मैंने उसे ऑफ़र लेटर दिखाया और उसने बस इतना कहा - 'अपने दिल की सुनो।'"

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रांजणे के इस सफ़र में एक और करीबी दोस्त हमेशा साथ रहा, जो उनके फ़ैसलों को समझता और समर्थन करता रहा - सूर्यकुमार यादव। 2021 की सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी में सूर्यकुमार मुंबई के कप्तान थे, जब रांजणे ने आखिरी बार मुंबई के लिए खेला था।
"कोविड सीज़न के दौरान SMAT में हम दोनों की बात हुई थी," रांजणे याद करते हैं। "मैंने उनसे कहा कि मैं मुंबई में मिल रहे मौक़ों से खुश नहीं हूँ। मैं समझता था कि इसमें किसी की ग़लती नहीं है, लेकिन मुझे अपने बारे में सोचना था।"
रांजणे के मुताबिक सूर्यकुमार ने उनसे "भरोसा बनाए रखने" को कहा और बताया कि वह खु़द भी ऐसे दौर से गुज़र चुके हैं। "उन्होंने कहा कि अगर दिल नई राह दिखा रहा है, तो उसे अपनाना चाहिए, ताकि बाद में पछतावा ना रहे।"
हालांकि रांजणे ने उन्हें गोवा जाने के बारे में नहीं बताया। वहां उन्हें वह "इंटेंसिटी, प्रोफ़ेशनलिज़्म और कल्चर" नहीं मिला, जिसकी उन्हें तलाश थी। वह सिर्फ एक सीज़न ही गोवा के लिए खेले।
सूर्यकुमार रांजणे से चार साल बड़े हैं, लेकिन उनकी आक्रामक सोच के कारण उन्हें दादा कहकर बुलाते हैं। दोनों मैदान के बाहर भी ज़िंदगी को लेकर बातें करते थे। "हम ड्राइव पर निकल जाते थे, कभी लोनावला, कभी मरीन ड्राइव, या कोई पसंदीदा खाने की जगह। क्रिकेट हर बार बातचीत का विषय नहीं होता था।"
"यहां वापस आना, भारत के ख़िलाफ़ खेलना, विश्व कप में खेलना - जिसका मैंने बचपन से सपना देखा। अब वह पल आ गया है। यह सपने के सच होने जैसा है"
शुभम रांजणे
इस हफ्ते सूर्यकुमार ने रांजणे को मैसेज किया। "आजा, भेटू," रांजणे बताते हैं। "उन्होंने लिखा, तुम पर गर्व है। परिवार और दोस्तों से दूर जाकर जो कुर्बानियां तुमने दी थीं, वह अब रंग ला रही हैं। अपने फ़ैसले पर भरोसा रखा। अब हर पल का आनंद लो। शांत रहो और वर्तमान में जियो।"

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अब रांजणे की ज़िंदगी कुछ हद तक स्थिर हो चुकी है। वह ह्यूस्टन, टेक्सस में रहते हैं। उन्होंने अपने चार में से दूसरे वनडे में प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड जीता। MLC में वह टेक्सस सुपर किंग्स (TSK) के लिए खेले, जिसने प्ले-ऑफ में जगह बनाई। रांजणे टीम के दूसरे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ रहे, उन्होंने आठ पारियों में 160.47 के स्ट्राइक रेट से 268 रन बनाए। पिछले कुछ सीज़न में उन्होंने अपनी फिटनेस पर काफ़ी काम किया है, जिससे वह बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी और फ़ील्डिंग तीनों में पूरा योगदान दे सकें।
TSK में उन्हें पूर्व साउथ अफ़्रीकी कप्तान फ़ाफ़ डु प्लेसिस से काफ़ी प्रेरणा मिली। "मैं फ़ाफ़ जैसा बनना चाहता हूं," वह कहते हैं। "हमारी भूमिकाएं अलग-अलग हैं, लेकिन उनकी गेम अवेयरनेस, बल्लेबाज़ी की शैली, फ़िटनेस और फ़ील्डिंग क्षमता मुझे प्रेरित करती है।"
पूर्व साउथ अफ़्रीकी ऑलराउंडर एलबी मोर्कल ने उन्हें पावर हिटिंग पर काम करने में मदद की। सूर्यकुमार ने भी उन्हें गेम अवेयरनेस और गेंदबाज़ की योजनाएं पढ़ने की समझ दी।
वानखेड़े में खेले उन्हें पांच साल हो चुके हैं, लेकिन वहां की यादें आज भी ताज़ा हैं। "वानखेड़े मेरे दिल के बहुत क़रीब है," वह कहते हैं। "इतिहास से भरे इस मैदान में खेलना रोमांचक होगा।"
रांजणे गर्व महसूस करते हैं कि उन्होंने अपने करियर में कई बार सुरक्षित रास्ता छोड़कर जोखिम उठाया। बातचीत के अंत में पुणे से उनके माता-पिता सुभाष और स्मिता उनसे मिलने टीम होटल पहुंचते हैं। दोनों भावुक हैं, लेकिन उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। "वह हमेशा मेहनती और ज़िद्दी रहा है," स्मिता कहती हैं।
सुभाष मानते हैं कि उनके बेटे में हमेशा क़ाबिलियत थी, बस उसे सही दिशा देने की ज़रूरत थी।
रांजणे चुपचाप सुनते हैं, लेकिन चेहरे पर मुस्कान है। "बचपन से आप यह सपना देखते हैं। आंखें बंद करके जो सपना आपने देखा था, उसका सच होना- यह वाकई एक शानदार एहसास है।"

नागराज गोलापुड़ी ESPNcricinfo के न्यूज़ एडिटर हैं।