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भारत में साउथ अफ़्रीका जैसा प्रदर्शन दोहराना चाहते हैं करुणारत्ने

कहा- दबाव हम पर नहीं भारत पर होगा

श्रीलंका भारत में 20 टेस्ट मैच खेल चुका है। इनमें से 11 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है और वह एक बार भी नहीं जीता है। श्रीलंका की महान टीमें, जिनमें मुथैया मुरलीधरन, चामिंडा वास, कुमार संगकारा और सनथ जयसूर्या जैसे धुरंधर खिलाड़ी मौजूद थे, भी जीत का स्वाद चखने से वंचित रहे।
दिमुथ करुणारत्ने के पास जो टीम है उसमें शायद इतने बड़े नाम नहीं हैं। लेकिन पहले टेस्ट के एक दिन पूर्व श्रीलंकाई कप्तान ने याद दिलाया कि इस टीम के पास इतिहास बदलने का अनुभव है। भारत अब तक साउथ अफ़्रीका में कोई सीरीज़ नहीं जीता है। 2019 में डर्बन और पोर्ट एलिज़ाबेथ की सूखी तटवर्ती पिचों पर करुणारत्ने की टीम ने यह कर दिखाया था।
करुणारत्ने कहते हैं कि इस टीम को अपनी शक्तियों का ज्ञान है और पिछले एक साल से इसमें निरंतर सुधार दिख रहा है। उन्होंने कहा, "आम तौर पर भारत में आते हुए हमारी टीम में जितना आत्मविश्वास रहता है, इस बार मुझे उससे कहीं ज़्यादा आत्मविश्वास दिख रहा है। हमने गत वर्ष टेस्ट में अच्छा खेल दिखाया है और हमारी टीम में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का अच्छा मिश्रण है।"
"ठीक 2019 की तरह हम इस बार भी कुछ ख़ास करने की क्षमता रखते हैं। तब भी हम पर अपेक्षाओं का कोई दबाव नहीं था और अब भी ऐसा ही है। हम भारत में कभी मैच नहीं जीते हैं और दबाव मेज़बान पर ही रहेगा कि कोई मैच उनके हाथ से ना छूटे। हमें इस दबाव का फ़ायदा उठाना होगा। भारत की टीम बहुत मज़बूत है लेकिन उनके पास भी कुछ युवा खिलाड़ी होंगे। यह एक अलग भारतीय टीम है और मुझे यक़ीन है हम उन्हें कड़ा मुक़ाबला देंगे।"
हालांकि भारत में सफल होने के लिए श्रीलंका को अपनी बल्लेबाज़ी में सुधार लाने की ज़रूरत पड़ेगी। करुणारत्ने की कप्तानी में पहली पारी की बल्लेबाज़ी ने ख़ासा निराश किया है - ऐसे 16 टेस्ट मैचों में टीम ने 250 का आंकड़ा केवल 10 बार पार किया है।
उन्होंने कहा, "टेस्ट में पहली पारी का स्कोर अहम होता है। हमें 300 से 350 के बीच तो बनाने ही होंगे क्योंकि यहां पिच जल्दी ख़राब होने लगती है और गेंदबाज़ों को मदद मिलने लगती है। यह ज़रूरी है कि बल्लेबाज़ ज़िम्मेदारी से खेलें और गेंदबाज़ों का हाथ बटाएं। मुझे इस टीम पर भरोसा है। हमारे पास अनुभवी खिलाड़ी हैं जो पुरानी ग़लतियों को नहीं दोहराएंगे।"
यह टेस्ट सीरीज़ सुरंगा लकमल के लिए एक आख़िरी मौक़ा होगा क्योंकि वह डर्बीशायर के साथ काउंटी क्रिकेट खेलने के लिए इस प्रारूप से संन्यास ले रहे हैं। श्रीलंका के स्पिनिंग पिच पर वह ज़्यादा गेंदबाज़ी नहीं करते लेकिन देश के बाहर वह शायद उनके सबसे निरंतर खिलाड़ी रहे हैं। 2018 के बाद से उन्होंने श्रीलंका के बाहर 22.61 की औसत से 55 विकेट लिए हैं।
करुणारत्ने ने कहा, "मुझे पता है लकमल का जाना मेरे लिए कितनी बड़ी क्षति होगी। लेकिन हमारे पास दुश्मांता चमीरा, लहिरु कुमारा और विश्वा फ़र्नांडो जैसे विकल्प मौजूद हैं। व्यक्तिगत तौर पर मैं लकमल के लिए बहुत ख़ुश हूं क्योंकि काउंटी में मौक़ा मिलना आसान नहीं होता।"
"हम आगे काफ़ी क्रिकेट श्रीलंका में खेलेंगे और ऐसे में उन्हें गेंदबाज़ी करने के मौक़े कम ही मिलते। उन्होंने पिछले साल वेस्टइंडीज़ में ग़ज़ब की बोलिंग की थी। मुझे विश्वास है हम उन्हें एक यादगार सीरीज़ विदाई के रूप में देंगे।"

ऐंड्रयू फ़िडेल फ़र्नांडो ESPNcricinfo के श्रीलंका संवाददाता हैं, अनुवाद ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के वरिष्ठ सहायक संपादक और स्थानीय भाषा प्रमुख देबायन सेन ने किया है