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द्रविड़ : भारत अपने खिलाड़ियों को विदेशी लीगों में खेलने के लिए नहीं भेज सकता

"हमने देखा है इससे वेस्टइंडीज़ क्रिकेट पर क्या प्रभाव पड़ा है और मैं नहीं चाहता कि भारतीय क्रिकेट उस राह पर जाए"

राहुल द्रविड़ : अगर आप भारतीय खिलाड़ियों को इन लीगों में खेलने की अनुमति देंगे तो हमारा घरेलू क्रिकेट बचेगा ही नहीं  •  Getty Images

राहुल द्रविड़ : अगर आप भारतीय खिलाड़ियों को इन लीगों में खेलने की अनुमति देंगे तो हमारा घरेलू क्रिकेट बचेगा ही नहीं  •  Getty Images

बिग बैश लीग (बीबीएल) में खेलने और इस मौसम में ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करने के बीच की कड़ी हो सकती है लेकिन प्रमुख कोच राहुल द्रविड़ के अनुसार भारत अपने खिलाड़ियों को विदेशी लीग में खेलने के लिए नहीं भेज सकता है। इसका कारण यह है कि कई सारी लीग भारतीय घरेलू सीज़न के दौरान खेली जाती हैं। सेमीफ़ाइनल में मिली हार के बाद द्रविड़ को पूछा गया कि क्या बीबीएल में इंग्लैंड के खिलाड़ियों का खेलना और भारतीय खिलाड़ियों का ना खेलना एक बड़ा कारण बना और क्या भारत अपने खिलाड़ियों को बीबीएल में खेलने की अनुमति देगा।
इस पर द्रविड़ ने कहा, "देखिए, इसमें कोई दो राय नहीं है कि इंग्लैंड के कई खिलाड़ी यहां आकर खेलते हैं। इस टूर्नामेंट में यह साफ़ नज़र आया है कि (खिलाड़ियों को यहां भेजना) कठिन है। मुझे लगता है कि भारतीय क्रिकेट के लिए यह कठिन है क्योंकि यह टूर्नामेंट हमारे सीज़न के व्यस्त महीनों में होते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "यह हमारे लिए बड़ी चुनौती है। मेरा मानना है कि हमारे कई लड़के इन लीगों में खेलने के अवसर से चूक जाते हैं लेकिन अगर आप चाहे... तो यह निर्णय बीसीसीआई को लेगा है। बात यह है कि यह ठीक हमारे सीज़न के बीच खेला जाता है और भारतीय खिलाड़ी जिस तरह की डिमांड में होते हैं, अगर आप सभी भारतीय खिलाड़ियों को इन लीगों में खेलने की अनुमति देंगे तो हमारा घरेलू क्रिकेट बचेगा ही नहीं। हमारी घरेलू ट्रॉफ़ी, हमारी रणजी ट्रॉफ़ी ख़त्म हो जाएगी और इसका अर्थ यह होगा कि टेस्ट क्रिकेट समाप्त हो जाएगा।"
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए द्रविड़ ने कहा, "मैं जानता हूं कि कई सारे लोग इसकी बात करेंगे लेकिन हमें सावधानी बरतनी होगी, हमें समझना होगा कि इस स्थिति में भारतीय क्रिकेट और बीसीसीआई को किन कठिनाइओं का सामना करना होगा। आपने हमारे लड़कों को देखा है। कई लड़कों को हमारे सीज़न के ठीक बीच में लीगों में खेलने को कहा जाता है। हमने देखा है इससे वेस्टइंडीज़ क्रिकेट पर क्या प्रभाव पड़ा है और मैं नहीं चाहता कि भारतीय क्रिकेट उस राह पर जाए। यह हमारी रणजी ट्रॉफ़ी को प्रभावित करेगा और टेस्ट क्रिकेट को भी। मैं समझता हूं कि भारतीय खिलाड़ियों का टेस्ट क्रिकेट खेलना टेस्ट क्रिकेट के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।"
इंग्लैंड के कप्तान जॉस बटलर को भी इस बारे में पूछा गया लेकिन वह तुरंत अहम योगदान देने वाले ऐलेक्स हेल्स की प्रशंसा करने लगे। उन्होंने कहा, "मुझे लगा कि ऐलेक्स (हेल्स, जो रन-चेज़ में हावी रहे) ने बिग बैश में बहुत क्रिकेट खेला है और आज उनका प्रदर्शन बेहतरीन था। विकेट के स्क्वेयर दिशा में खेलना उनका मज़बूत पक्ष है जो इस तरह के मैदान पर बढ़िया रहता है। उन्हें गेंदबाज़ी करना कठिन है। वह लंबे समय से अच्छा करते आ रहे हैं। दुर्भाग्यवश अन्य खिलाड़ियों के अच्छा खेलने के कारण वह टीम में वापस नहीं आ पाए हैं। संयोग से उनका मौक़ा बना और वह अंदर आए और विशेषकर पिछले तीन मैचों में उनका फ़ॉर्म शानदार रहा है। आज दूसरे छोर पर रहकर उन्हें खेलते देखना अच्छा था।"
विदेशी लीगों में अपने खिलाड़ियों को भेजना भारतीय क्रिकेट में एक हिचकिचाने वाला विषय रहा है। बड़ी चिंता यह है कि भले ही बोर्ड केवल उन लोगों को, जिनके पास प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खेलने की जगह या कोई महत्वाकांक्षा नहीं है, विदेशी लीगों में खेलने की अनुमति देता है तो इससे अधिकतर खिलाड़ी प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने से इनकार कर देंगे। इससे मज़बूत टेस्ट टीम की नींव कमज़ोर हो जाएगी। अन्य टीमों को भी इस समस्या से जूझना पड़ता है लेकिन ब्रॉडकास्ट कारणों के लिए भारतीय खिलाड़ियों की डिमांड बहुत ज़्यादा होगी।

सिद्धार्थ मोंगा ESPNcricinfo में असिस्टेंट एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।