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विश्व कप से पहले भारत की कमज़ोर गेंदबाज़ी चिंता का विषय

हालिया समय में बल्लेबाज़ी में सुधार करने के बाद अब भारतीय टीम ख़राब गेंदबाज़ी की समस्या में फंसी

जब राहुल द्रविड़ और रोहित शर्मा ने टी20आई टीम की कमान संभाली तो भारतीय टीम का मुख्य मुद्दा उनकी रूढ़िवादी बल्लेबाज़ी थी। भारतीय बल्लेबाज़ों को भी इस क्षेत्र में सुधार करने में थोड़ा वक़्त लगा लेकिन टीम के मांग की अनुसार प्रदर्शन करने में कहीं ना कहीं वह सफल रहे। अगर भारत पिछले कुछ मैचों से सकारात्मक पहलू पर नज़र डालना चाहे तो बल्लेबाज़ी उनका सबसे मज़बूत पक्ष होगा।
हालांकि एक समस्या से निकलने के बाद भारतीय टीम एक और क्षेत्र में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछली तीन हार में भारतीय टीम लक्ष्य की रक्षा करते हुए पराजित हुई है। इन तीनों मैचों में भारत को अंतिम चार ओवरों में 54, 42 और 41 रनों की रक्षा करनी थी और तीनों मैच उनके झोली में नहीं गिरी। इन तीनों मैचों में भारतीय टीम ने बढ़िया बल्लेबाज़ी की थी लेकिन गेंदबाज़ी लगातार एक समस्या बन कर उभर रही है।
हालांकि इन तीनों मैचों में एक बात कॉमन थी कि जसप्रीत बुमराह प्लेइंग 11 में मौजूद नहीं थे और भुवनेश्वर कुमार ने प्रत्येक मैच के 19वें ओवर में क्रमश: 16, 14, और 19 रन ख़र्च किया था। ऐसा नहीं है कि भुवनेश्वर को 19वां ओवर देकर भारत रणनीतिक रूप से कोई ग़लती कर रहा था क्योंकि बुमराह की अनुपस्थिति में भुवनेश्वर ही अंतिम ओवरों के सबसे बेहतरीन गेंदबाज़ हैं।
2020 की शुरुआत से लेकर इस महीने की शुरुआत तक, भुवनेश्वर टी20 क्रिकेट में तीसरे सर्वश्रेष्ठ भारतीय डेथ बॉलर रहे हैं। कुल तीन में से दो सर्वश्रेष्ठ अर्शदीप सिंह और बुमराह यह मैच नहीं खेल रहे थे।
यह हमेशा थोड़े आश्चर्य की बात है कि भुवनेश्वर अंतिम ओवरों में लगातार बढ़िया प्रदर्शन करते आए हैं। स्वाभाविक रूप से देखा जाए तो उनमें अंतिम ओवरों में गेंदबाज़ी करने के लिए पर्याप्त गुण नहीं है। उनके पास तेज़ गति नहीं है। बाएं हाथ का कोण या अजीब रिलीज़ नहीं है। उनके पास एक प्यारा सा साफ़ एक्शन है। वह शायद ही कभी 140 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से गेंदबाज़ी करते हैं। यह उनकी योजना और निष्पादन में सटीकता है जिसने उन्हें खेल में बनाए रखा है।
भुवनेश्वर शायद इस बात को बड़े आराम से स्वीकार करेंगे कि मोहाली में वह अपनी योजनाओं के साथ गेंदबाज़ी करनें में सक्षम नहीं थे। किसी क्षेत्ररक्षक के सिर के ऊपर से गेंद को मारना एक अलग बात है लेकिन मैथ्यू वेड से बार-बार उसी दिशा में मार खाना, जहां कोई फ़ील्डर नहीं है, वह एक अलग बात है और निश्चित रूप से यह भुवनेश्वर को दुखी करेगा। अंतर्राष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में यह पहली बार था जब भुवनेश्वर ने अपने चार ओवर में 50 से अधिक रन ख़र्च किए। भारतीय टीम उम्मीद करेगी कि भुवनेश्वर जल्द ही अपनी गेंदबाज़ी में सुधार लाएं।
चोट के बाद वापसी कर रहे हर्षल पटेल ने अपने चार ओवर में 49 रन ख़र्च किए। यही नहीं उन्होंने 18वें ओवर में 22 रन ख़र्च किए। वेड ने हर्षल की धीमी गेंदों को शानदार तरीक़े से पढ़ा और उन पर बड़े शॉट्स लगाए। मोहाली की पिच ऑस्ट्रलियाई पिचों की तुलना में काफ़ी हद तक समान थी। पिच पर बढ़िया बाउंस था और कभी भी गेंद रूक कर नहीं आ रही थी। ऐसी पिचों पर धीमी गेंदों का कारगर होना, हमेशा ही एक संदेह के घेरे में रहता है। अगर टी20 विस्व कप के दौरान भी यही हाल रहता है तो हर्षल के पास दूसरे क्या विकल्प होंगे, यह सोचने वाली बात होगी।
रोहित ने मैच के बाद कहा, "मुझे नहीं लगता कि हमने अच्छी गेंदबाज़ी की। 200 से अधिक रन निश्चित तौर पर एक अच्छा स्कोर है, और हमने क्षेत्ररक्षण में भी कई मौक़े गंवाए। हमारे बल्लेबाज़ों ने बढ़िया प्रयास किया लेकिन गेंदबाज़ी में काफी कमी थी। आप हर रोज 200 रन नहीं बना सकते। हार्दिक [पांड्या] ने हमें उस स्कोर तक पहुंचाने के लिए वास्तव में अच्छी बल्लेबाज़ी की। हमें अगले गेम से पहले अपनी गेंदबाज़ी के बारे में काफ़ी कुछ सोचने की ज़रूरत है।"
आपको टी20 में दार्शनिक होना होगा। इस तरह के एक छोटे प्रारूप के खेल में भाग्य और टॉस एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। आप हमेशा परिणामों के आधार पर ख़ुद को नहीं आंक सकते। एक शॉट जीत और हार का कारण बन सकती है। हालांकि भारतीय टीम को पहले मैच में जो हार मिली, वह दार्शिनिक सोच की तरफ़ आगे बढ़ने के लिए आपको विवश नहीं कर सकता। ऑस्ट्रेलिया ने जिस सहता के साथ 24 गेंदों में 55 रनों का पीछा किया, वह एक सबक की तरह था कि बल्लेबाज़ी वाली पिचों पर आपकी गेंदबाज़ी के पास बेहतर प्रदर्शन करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

सिद्धार्थ मोंगा ESPNcricinfo अस्सिटेंट एडिटर हैं।अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।