शनिवार को चाय के बाद चौथे ओवर में विराट कोहली ने मोहम्मद सिराज को गेंदबाज़ी करते हुए अपनी भावनाओं पर काबू रखने को कहा। इस बात से सभी को आश्चर्य हुआ क्योंकि कोहली हमेशा मैदान पर हर समय भावनाओं से लदे रहते हैं। सिराज ने न केवल दो बाउंसरों सहित सैम करन के सिर के करीब तीन शॉर्ट पिच गेंदें की थी, वह चलकर उनकी तरफ गए और शब्दों का आदान-प्रदान भी किया। सिराज ने यह प्रतिक्रिया ओवर की पहली गेंद पर चौका लगने के बाद दी थी।

यह टी ब्रेक के दोनों तरफ मिलाकर आधे घंटे के खेल का वह हिस्सा था जिसने मैच के रोमांच को बढ़िया और इस आकर्षक टेस्ट मैच में चार चांद लगा दिए। कप्तान कोहली समझ गए थे कि जो रूट इस मैच को भारत की पकड़ से काफी दूर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी समझा कि उनके गेंदबाज़ों को इस धीमी पिच पर तेज़ धूप में और अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता थी। इंग्लैंड ने शुक्रवार की दोपहर और फिर शनिवार सुबह पिच पर भारी रोलर का इस्तेमाल किया था जिसके कारण गेंदबाज़ी थोड़ी मुश्किल हो गई थी। इसलिए कोहली चाहते थे कि गेंदबाज़ लक्ष्य से अपनी नज़रें ना हटाए।

रूट की आक्रामक बल्लेबाज़ी के दम पर इंग्लैंड ने लगातार तीन रन प्रति ओवर के दर से रन बनाए। रोरी बर्न्स और ज़ैक क्रॉली को आउट करने के बाद भारत को मिली अच्छी शुरुआत पर जो रूट और डॉम सिबली ने लगाम लगाई। तेज़ गति से रन बनाकर दोनों ने भारतीय गेंदबाज़ों पर दबाव डाला था।

जब भी गेंदबाज़ों ने फ़ुल लेंथ पर गेंदबाज़ी की या हाथ खोलने का मौका दिया, रूट ने उसका पूरा फ़ायदा उठाया। रूट के सकारात्मक अंदाज़ का असर सिबली पर भी हुआ। रक्षात्मक ढंग से बल्लेबाज़ी कर रहे सिबली फ़ील्डरों के पास ही सही पर अपने शॉट्स खेल रहे थे। लंच के समय इंग्लैंड की लीड 24 रनों की थी। चाय तक यह बढ़त 140 पर पहुंच गई। जब सिराज ने सैम करन को वह तीन शॉर्ट गेंदे डाली, तब तक भारत को तीन और विकेट मिल चुके थे पर वह दूसरे छोर पर कप्तान जो रूट को आउट करने के आस-पास भी नज़र नहीं आ रहे थे जो एक यादगार टेस्ट शतक के करीब थे।

ऐसा नहीं है कि उन्होंने कोशिश नहीं की।

"ये वाला आगे डालना, बीच में से", कोहली ने सुबह के सत्र में सिराज को अपने पहले स्पेल के अंतिम भाग में निर्देश दिया। पिछली ही गेंद पर रूट ने बैकफ़ुट से उसे रक्षात्मक रूप से धकेला था। वह भाग्याशाली थे कि गेंद जाकर स्टंप्स पर नहीं लगी। भारत ने अपना होमवर्क किया था। वह जानते थे कि हाल ही में रूट को स्टंप्स पर आने वाली सीधी गेंदों को खेलने में मुश्किल हो रही हैं। इसलिए कोहली ने सिराज को स्टंप-टू-स्टंप गेंदबाज़ी करने को कहा। अगली गेंद पर सिराज ने क्रॉस सीम के साथ गेंद को सीधे स्टंप की लाइन में पिच किया। गेंद एक बार फिर बल्ले का अंदरूनी किनारा लेकर स्टंप्स से पास से निकल गई और रूट बाल बाल बच गए।

अगले ओवर में जसप्रीत बुमराह ने रूट को ऑफ़ स्टंप पर गुड लेंथ गेंदबाज़ी की। उनकी एक गेंद ऑफ स्टंप पर पड़कर सीधी रही और बाहरी किनारा लेकर स्लिप की ओर चल पड़ी। लेकिन रूट चौकस थे और उन्होंने हल्के हाथों से उस गेंद को खेला और इस वजह से गेंद स्लिप में खड़े कप्तान कोहली के पास एक टप्पे में पहुंची। उनके पास मुस्कुराने के अलावा और कोई चारा नहीं था।

इस टेस्ट से पहले तक भारत इंग्लैंड में 173 रनों के सर्वोच्च लक्ष्य का पीछा करने में कामयाब रहा था और वह भी 50 साल पहले ओवल के मैदान पर। 1980 में वेस्टइंडीज़ द्वारा हासिल किया गया 208 रनों का लक्ष्य ट्रेंट ब्रिज पर किसी भी मेहमान टीम का सबसे बड़ा सफल रन चेज़ है। इंग्लैंड भारत के लिए 200 रन से अधिक का लक्ष्य खड़ा करना चाहता था।

गेंद पुरानी हो रही थी जिसकी वजह से गेंदबाज़ी करना आसान नहीं था। पिच धीमी होती जा रही थी और स्विंग भी नहीं मिल रही थी। जब रूट और उनके साथी बल्लेबाज़ लगातार ढीली गेंदों का फ़ायदा उठा रहे थे, कोहली को बुमराह को छोड़कर सभी तेज़ गेंदबाज़ों को याद दिलाना पड़ा कि वह स्टंप-टू-स्टंप गेंदबाज़ी करें।

जो चीज़ भारतीय गेंदबाज़ों की मदद नहीं कर रही थी, वह यह थी कि हर नया बल्लेबाज़ क्रीज़ पर आते संग ही शॉट्स खेल रहा था - खासकर जॉनी बेयरस्टो और जॉस बटलर। बटलर को पहली पारी में बुमराह की गेंदें समझ ही नहीं आ रही थी। अब वह आसानी से चहलकदमी करते हुए उन्हें चौका लगा रहे थे। चाय के समय भारत नई गेंद से लगभग 10 ओवर था और रूट और बटलर क्रीज़ पर जमे हुए थे।

पर ब्रेक के बाद पहले ही ओवर में शार्दुल ठाकुर ने अपना जलवा दिखाया। रिवर्स स्विंग करवा रहे ठाकुर ने लेंथ गेंद पर जॉस बटलर का ऑफ़ स्टंप बिखेरा जब उन्होंने उस गेंद का कीपर के पास जाने का रास्ता साफ़ करने के लिए अपने हाथ खड़े कर दिए। अगले ओवर में सिराज की लेंथ गेंद ने चौथे स्टंप से कांटा बदला और रूट के पैड पर जा लगी। पगबाधा की अपील हुई पर अंपायर माइकल गॉफ़ ने उसे खारिज कर दिया। कोहली भी अंपायर के फ़ैसले से सहमत थे पर सिराज और मोहम्मद शमी के कहने पर उन्होंने टीम के तीसरे और अंतिम रिव्यू का इस्तेमाल किया और फ़ैसले को बदलने में नाकामयाब रहे।

थोड़ी देर बाद, ठाकुर ने रूट को एक लेंथ गेंद खेलने पर मजबूर किया जो उन्हें छकाती हुई पैड पर जा टकराई। लेकिन इस बार भी इम्पैक्ट ऑफ़ स्टंप के बाहर था। ठाकुर अपने फ़ॉलो-थ्रू में पिच के बीच में खड़े होकर कोहली को घूर रहे थे क्योंकि टीम ने अपने तीनों रिव्यू गंवा दिए थे।

जब तक नई गेंद ली गई, तब तक इंग्लैंड की बढ़त 177 पर पहुंच गई थी और रूट आत्मसमर्पण करने के मूड में नहीं थे। इंग्लैंड के कप्तान जो रूट को अंततः बुमराह ने चालाकी से अपने जाल में फंसाया। उन्होंने नई गेंद को सीधी सीम से गुड लेंथ पर फेंका और उछाल प्राप्त किया। उन्होंने अपनी जादुई कलाई से उस गेंद को हल्का सा बाहर निकाला जिससे रूट के बल्ले का बाहरी किनारा लेकर गेंद विकेटकीपर पंत के दस्तानों में जा समाई। अपने बोलिंग स्थान पर वापस जाते हुए उन्होंने शमी को इशारा किया कि वह पूरे दिन ऐसी गेंद डालने के प्रयास में उनसे बार बार चूक हो रही थी।

अगली गेंद पर बुमराह ने यॉर्कर पर स्टुअर्ट ब्रॉड को चलता किया। अब वह हैट्रिक पर थे पर उसे पूरा करने में विफल रहे। बुधवार को इस टेस्ट में अपना पहला विकेट लेने के बाद बुमराह ने भावनात्मक रूप से जश्न मनाया था। हालांकि आज उन्होंने चेहरे पर मुस्कुराहट के साथ स्टैंड्स में मौजूद अपनी पत्नी की ओर हाथ हिलाकर विकेटों की ख़ुशी ज़ाहिर की।

यह टेस्ट मैच अपने अंतिम अध्याय की ओर बढ़ रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि बुमराह और पूरे तेज़ गेंदबाज़ी दल ने अपने धैर्य और दृढ़ता भरे प्रदर्शन के साथ भारत को एक मज़बूत स्थिति में ला खड़ा किया है।

नागराज गोलापुड़ी ESPNcricinfo के न्यूज़ एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।