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अराजकता से शांति की ओर : अपने पिछले साउथ अफ़्रीका दौरे के बाद से भारतीय टीम का विकास

टीम में हमेशा कौशल रहा है, लेकिन अब उन्होंने पूरी दुनिया में जीत हासिल करने का नुस्ख़ा सीख लिया है

भारत के पास इस बार साउथ अफ्रीका में सीरीज जीतने का मौका है  •  Associated Press

भारत के पास इस बार साउथ अफ्रीका में सीरीज जीतने का मौका है  •  Associated Press

पिछली बार जब भारत ने साउथ अफ़्रीका में टेस्ट सीरीज़ खेली थी, तो उन्होंने असाधारण शुरुआत की थी। केपटाउन में पहली सुबह 29 गेंदों के भीतर, साउथ अफ़्रीका ने 12 रन पर तीन विकेट खो दिए थे , जिसमें भुवनेश्वर कुमार का बड़ा योगदान था।
उस समय विराट कोहली तीन साल तक भारत के पूर्णकालिक टेस्ट कप्तान थे। उनकी टीम ने घर में हर विपक्षी टीम पर अपना दबदबा क़ायम रखा और श्रीलंका और वेस्टइंडीज़ में शानदार सीरीज़ जीती। वे अब दौरों का एक ऐसा चक्र शुरू कर रहे थे जो उनके कौशल, उनकी अनुकूलन क्षमता और उनकी महत्वाकांक्षाओं को सीमा तक परखता और उन्होंने पहली छाप ही अच्छी नहीं छोड़ी।
उस दिन के बाक़ी हिस्सों में हालांकि, भुवनेश्वर, मोहम्मद शमी और डेब्यू कर रहे जसप्रीत बुमराह ने न केवल अपने स्पष्ट कौशल का प्रदर्शन किया, बल्कि भोलेपन की भावना का भी प्रदर्शन किया, विकेटों के लिए अपनी अति-उत्सुकता में लंबाई और लाइन में अक़्सर ग़लती की और अंत में तीन विकेट पर 12 का स्कोर 286 में बदल गया।
उस ऊर्जा ने साउथ अफ़्रीका के बाक़ी दौरे और उसके बाद इंग्लैंड के दौरे में व्याप्त कर दिया। भारत ने जोहान्सबर्ग और नॉटिंघम में टेस्ट जीते, लेकिन वे अन्य छह हार गए, वो भी एक अच्छी स्थिति में होने के बावजूद। उनके गेंदबाज़ विश्व स्तरीय थे, लेकिन साउथ अफ़्रीका और इंग्लैंड के भी गेंदबाज़ थे, जिनकी घरेलू परिस्थितियों से परिचित होते हुए लंबी अवधि तक नियंत्रण बनाए रखा।
तब से लेकर अब तक भारत कितनी दूर आ गया है, यह देखने के लिए यह वीडियो देखें। यह सितंबर में द ओवल में भारत के सबसे हालिया दौरे के आख़िरी टेस्ट के अंतिम दिन का मुख्य आकर्षण है। यह 15 मिनट और 39 सेकंड लंबा है और भारत पहले दो मिनट और 48 सेकंड के लिए विकेट रहित है। उस अवधि में कुछ भी शानदार नहीं होता है।
विकेट और पुल और कवर ड्राइव के बजाय जो आमतौर पर हाइलाइट पैकेज में होता है, हम इसे देखते हैं: भारत मज़बूत लेग-साइड फ़ील्ड के साथ स्टंप-टू-स्टंप लाइनों पर गेंदबाज़ी कर रहा है और वे कभी-कभी सिंगल को स्वीकार करते हैं या, एक दो मौकों पर एक ग्लांस से रन खाते हैं। एक ऑफ़ साइड बाउंड्री भी है जो एक रक्षात्मक शॉट खेलने के प्रयास में बल्ले का बाहरी किनारा लेकर स्लिप में बने गैप के बीच से निकल जाती है।
वे दो मिनट और 48 सेकंड के गैर-हाइलाइट खेल के एक उस भाग से हैं, जिसमें भारत ने 8.3 ओवर में दो सेट बल्लेबाज़ों को 19 रन दिए। इंग्लैंड ने अच्छी बल्लेबाज़ी की की थी और दिन की शुरुआत बिना किसी विकेट गंवाए 77 रन से की थी।
वे एक मौक़े का इंतज़ार कर रहे थे, उन्हें भरोसा था कि वह समय आएगा और यह सुनिश्चित करने का संभव प्रयास कर रहे थे कि मैच पर से कोई नियंत्रण नहीं छोड़ा जाए। 2018 की शुरुआत की अराजक ऊर्जा के स्थान पर, भारत ने शांति की भावना दिखाई।
2017-18 के साउथ अफ़्रीका दौरे और उनकी अभी शुरुआत के बीच, यह एक टेस्ट टीम के रूप में भारत की सबसे बड़ी छलांग है। यह उनकी श्रमसाध्य तैयारी का फल है।
इसके दो उदाहरण भी हैं रवि शास्त्री और भरत अरुण ने ऑस्ट्रेलिया के अपने 2020-21 दौरे से पांच महीने पहले लेग थ्योरी का 21वीं सदी का संस्करण तैयार किया और आर अश्विन ने स्टीवन स्मिथ को "लगभग छह महीने के लिए जुनून" बनाया। लेकिन उनके गेंदबाज़ों ने योजनाओं को अच्छे से अंजाम भी दिया।
उदाहरण के लिए, 2021 के शमी 2018 की शुरुआत के शमी से एक बहुत ही अलग गेंदबाज़ हैं। उनके पास एक ही स्किडी गति और बेहतरीन कलाई की स्थिति है, लेकिन लेकिन वह एक बेहतर एक्शन के साथ गेंदबाज़ी करते हैं और फ़िट हैं, इसीलिए वह बहुत ही कम बार लाइन या लेंथ से भटकते हैं।
अनुभव और सफलता के माध्यम से वह अधिक धैर्यवान और अपने स्वयं के तरीक़ों पर भरोसा करने लगे हैं और उनके भटकने की संभावना कम ही है। भारत के आक्रमण में भी अधिक गहराई है, जिसने उन्हें जब भी संभव हो अपने वरिष्ठ तेज़ गेंदबाज़ों को आराम करने और नई गेंद के गेंदबाज़ों के बीच गुणवत्ता में भारी गिरावट नहीं होने देने का मौक़ा दिया है, जहां पर नई गेंद के तेज़ गेंदबाज़ों और दूसरे चेंज़ गेंदबाज़ के बीच गुणवत्ता गिरती नहीं है।
हालांकि, किसी भी दौरे की तरह यह चुनौतियों से शुरू होने वाला दौरा है। रवींद्र जाडेजा की अनुपस्थिति भारत की पांच गेंदबाज़ों को खिलाने की क्षमता की परीक्षा लेगी। यह देखा जाना बाक़ी है कि क्या वे ऐसा करने के लिए अश्विन और शार्दुल ठाकुर की निचले क्रम की क्षमता पर भरोसा करते हैं। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें साउथ अफ़्रीका के बल्लेबाज़ों पर लागू दबाव से समझौता किए बिना चार गेंदबाजों के कार्यभार को संभालने के तरीक़े खोजने होंगे।
इस बीच, बल्लेबाज़ी इकाई 2021 में बेहतरीन लय में चल रहे खिलाड़ी रोहित शर्मा के बिना है। और पिछले साउथ अफ़्रीका के दौरे पर कोहली, चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे सभी 29 थे और 2017-18 के दौरे के दौरान 33 के हो चुके हैं। इन दो सालों में उनका औसत भी 20 के अंदर रहा है जबकि तीनों के बीच में सिर्फ़ एक ही शतक आया है।एक नया कोचिंग ग्रुप भी है। राहुल द्रविड़ और पारस म्हाम्ब्रे ने अभी तक उन खिलाड़ियों के साथ संबंध स्थापित नहीं किए हैं जिन्हें शास्त्री और अरुण ने अपने कार्यकाल में बनाया था।
कप्तान अब केवल एक प्रारूप में कप्तान है और अपने क्रिकेट बोर्ड के साथ उसका रिश्ता अब तक का सबसे कठिन है।लेकिन टेस्ट सीरीज़ की जान दो गेंदबाज़ी आक्रमणों के बीच है। और साउथ अफ़्रीका को वर्नोन फ़िलेंडर, डेल स्टेन और मोर्नी मोर्केल के दौर से बाहर निकलना है।
उन्होंने कूल्हे की चोट के कारण आनरिख़ नॉर्ख़िये को भी खो दिया है। कगिसो रबाडा, लुंगी एनगिडी और डुएन ओलिवियर के बॉक्सिंग डे टेस्ट में उतरने की संभावना है। ज़ाहिर तौर पर यह घरेलू परिस्थति में मुश्किल साबित हो सकते हैं, लेकिन पिछले दौरे पर फिलेंडर, स्टेन, मोर्केल, रबाडा से तो यह आक्रमण बहुत आम है। इस बीच, भारत के पास कौशल और विविधता वाला गेंदबाज़ी आक्रमण है और दुनिया के लगभग हर हिस्से में टेस्ट खेलने और जीतने के बारे में जानकारी है। तब, उनके पास यह मानने का सबसे बड़ा कारण है कि वह अब साउथ अफ़्रीका टेस्ट सीरीज़ जीत सकते हैं।

कार्तिक कृष्णस्वामी ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।